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लीवर सिरोसिस के कारण, लक्षण और घरेलू टिप्स

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लीवर शरीर का सबसे बड़ा और एक महत्वपूर्ण अंग है। यह न सिर्फ खाना पचाने, बल्कि उर्जा को संचित करने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में भी मदद करता है । शरीर की कार्यप्रणाली को सही तरीके से चलाने में इसकी अहम भूमिका होती है, लेकिन कभी-कभी खान-पान संबंधी गड़बड़ी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती हैं। इनमें एक नाम लीवर सिरोसिस का भी है। आइये, इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि लीवर सिरोसिस क्या है और लीवर सिरोसिस के कारण क्या-क्या हो सकते हैं।

इस लेख में लीवर सिरोसिस का इलाज किस प्रकार किया जा सकता है, इस संबंध में भी जानकारी दी गई है। लेख में कुछ लीवर सिरोसिस के लिए घरेलू उपाय भी बताए गए हैं, जो इसके लक्षणों के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

लीवर सिरोसिस क्या है – 
लीवर सिरोसिस, धीरे-धीरे बढ़ने वाला एक गंभीर रोग है, जो लीवर के टिश्यू को बुरी तरह प्रभावित करता है और लीवर की कार्यप्रणाली को बाधित करता है। इसे क्रानिक लीवर डिजीज का अंतिम चरण माना जाता है। इस स्थिति में लीवर के टिश्यू जख्मी हो जाते हैं और सामान्य रूप से काम करना बंद कर देते हैं। ये जख्मी टिश्यू वो सारे काम नहीं कर पाते, जो एक स्वस्थ लीवर के टिश्यू करते हैं, जैसे प्रोटीन का निर्माण, संक्रमण से लड़ना, उर्जा को संचित करना, रक्त को साफ करना और पाचन में मदद करना  । लेख में आगे लीवर सिरोसिस के प्रकार, कारण, लक्षण और इलाज को विस्तारपूर्वक बताया गया है।

लीवर सिरोसिस के चरण –
लीवर सिरोसिस के दो अलग-अलग चरण हैं -

कम्पेंसेटेड (Compensated) – यह लीवर सिरोसिस का वो चरण होता है, जिसमें लक्षण नजर नहीं आते है। इस चरण में लक्षणों के न दिखने पर लीवर सिरोसिस का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।

डीकम्पेंसेटेड (Decompensated) – यह लीवर सिरोसिस का गंभीर स्टेज होता है। इसमें व्यक्ति अपने स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट महसूस करता है। इस चरण में कई गंभीर जटिलताएं देखी जा सकती हैं, जैसे जलोदर (Ascites, अत्यधिक तरल के जमा होने से पेट फूलना) और हेपेटिक एन्सेफ्लोपैथी (लीवर डैमेज की वजह से मस्तिष्क कार्यप्रणाली का निष्क्रिय होना)।

लीवर सिरोसिस के कारण –
क्यों होता लीवर सिरोसिस? आखिर लीवर सिरोसिस के कारण क्या है? इसी सवाल का जवाब हम नीचे बता रहे हैं  –
लंबे वक्त तक शराब का सेवन और हेपेटाइटिस सी इसके सबसे मुख्य कारण हैं। इसके अलावा भी कई अन्य कारण हैं जैसे –
  • फैटी लीवर (लीवर में फैट जमा होना)
  • हेपेटाइटिस बी (हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण लीवर में सूजन या संक्रमण होना)
  • पित्त नली के विकार (Bile Duct Disorders)
  • अगर परिवार में किसी को लीवर की बीमारी रही हो।
  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस जिसमें लीवर में सूजन की समस्या हो जाती है।
  • कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट।
लीवर सिरोसिस के लक्षण –
नीचे जानिए लीवर सिरोसिस के लक्षण क्या-क्या हो सकते हैं ।
  • थकावट या ऊर्जा की कमी महसूस होना
  • भूख न लगना और वजन कम होना
  • मतली और पेट में दर्द होना
  • त्वचा पर खुजली होना
  • त्वचा पर छोटी, लाल मकड़ी जैसी रक्त वाहिकाएं दिखना
  • बाल झड़ना
  • मूत्र के रंग में बदलाव होना
  • मल का रंग काला हो जाना
  • त्वचा का पीला पड़ना और जॉन्डिस के लक्षण दिखना
  • हथेलियों का लाल होना
  • पुरुषों में नपुंसकता और अंडकोष का सिकुड़ना।
  • पैरों में या पेट में तरल पदार्थ जमने से सूजन की समस्या।
  • पेट के बाएं तरफ के ऊपरी हिस्से में हल्का-हल्का सा दर्द होना।
  • मस्तिष्क संबंधी समस्या होना जैसे – भूलना, किसी काम में ध्यान न लगना या या उलझन महसूस होना।
लीवर सिरोसिस के लिए घरेलू उपाय – 
ध्यान रहे कि नीचे बताए गए घरेलू उपाय सिर्फ लीवर सिरोसिस के लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं। इन उपायों को लीवर सिरोसिस का इलाज समझने की भूल न करें। साथ ही अगर कोई व्यक्ति लीवर सिरोसिस के लिए डॉक्टरी इलाज करा रहा है तो इन घरेलू उपायों को आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

1. मिल्क थीस्ल
सामग्री
  • एक से दो चम्मच मिल्क थीस्ल चाय
  • एक कप गर्म पानी
  • शहद
बनाने की विधि
  • एक कप गर्म पानी में एक से दो चम्मच मिल्क थीस्ल टी डालें।
  • 5 से 10 मिनट के लिए उसे गर्म पानी में डाले रखें और फिर फिर छान लें।
  • पीने से पहले गर्म चाय में स्वादानुसार शहद मिलाएं।
  • इस चाय को रोजाना एक से दो बार पी सकते हैं।
कैसे फायदेमंद है?
मिल्क थीस्ल में एक यौगिक होता है, जिसे सिलीमरिन  कहा जाता है। सिलीमरिन एंटीऑक्सीडेंट गुण को प्रदर्शित कर सकता है। इतना ही नहीं इसमें हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण भी पाया गया है। एनसीबीआई ) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, शराब की वजह से लीवर की समस्या, एक्यूट और क्रॉनिक वायरल हेपेटाइटिस और विषैले पदार्थों की वजह से होने वाले लीवर रोग की स्थिति में सिलीमरिन का उपयोग फायदेमंद साबित हो सकता है । फिलहाल, इंसानों पर इसके बेहतर प्रभाव जानने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

इसके अलावा, ‘दी जर्मन कमिशन ई’ ने भी मिल्क थीस्ल को विषाक्त पदार्थों के कारण होने वाली लीवर की समस्या और लीवर सिरोसिस के उपचार के लिए सहायक माना है। अन्य शोध भी बताते हैं कि मिल्क थीस्ल का उपयोग लीवर को क्षति पहुंचाने वाले विषाक्त पदार्थों से बचाव का काम कर सकता है।

2. अदरक
सामग्री
  • एक अदरक का छोटा टुकड़ा
  • एक कप गर्म पानी
  • स्वादानुसार शहद
बनाने की विधि
  • एक कप गर्म पानी में अदरक को कूटकर डालें।
  • 5 से 10 मिनट बाद इसे छान लें।
  • फिर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर इस चाय का सेवन करें।
  • इस चाय को हर रोज एक से दो बार पी सकते हैं।
कैसे फायदेमंद है?
अदरक के फायदे कई सारे हैं। लीवर सिरोसिस के लिए अदरक एक प्राकृतिक उपाय हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर इससे जुड़ा एक शोध उपलब्ध है। शोध में पाया गया कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (NAFLD, लीवर में फैट का जमाव) से जूझ रहे जिन लोगों ने 12 हफ्तों तक दो ग्राम अदरक के सप्लीमेंट का सेवन किया, उनमें से कुछ पर सकारात्मक प्रभाव देखे गए । जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि लीवर सिरोसिस का एक कारण फैटी लीवर डिजीज भी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि अदरक, लीवर सिरोसिस के जोखिम को कुछ हद तक कम करने में एक सहायक भूमिका निभा सकता है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

3. अलसी के बीज का तेल
ऐसे तो अलसी के लाभ अनेक हैं, लेकिन अलसी के बीज का तेल भी गुणकारी माना जाता है। अलसी के बीज का तेल अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के साथ गट माइक्रोबायोटा (Gut Microbiota – आंत के बैक्टीरिया) में सुधार कर अल्कोहलिक लीवर की बीमारी को ठीक करने में मदद कर सकता है । इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए बेहतर है कि अलसी के बीज के तेल के उपयोग से पहले व्यक्ति एक बार डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।

4. ग्रीन टी
सामग्री
  • एक चम्मच ग्रीन टी या एक ग्रीन टी बैग
  • एक कप गरम पानी
  • शहद स्वादानुसार

बनाने की विधि
  • एक कप गर्म पानी में एक चम्मच ग्रीन टी मिलाएं या एक ग्रीन टी डालें।
  • इसे लगभग पांच मिनट तक गर्म पानी में रखें।
  • जब चाय थोड़ी ठंडी हो जाए तो इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर इसका सेवन करें।
  • हर दूसरे दिन एक से दो बार इसका सेवन किया जा सकता है।
कैसे फायदेमंद है?
एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित कई शोधों में यह बात सामने आयी है कि ग्रीन टी का उपयोग लीवर संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है खासतौर पर ग्रीन टी का हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण नॉन अल्कोहलिक लीवर की बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है । साथ ही इस बात को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि इसका जरूरत से ज्यादा सेवन लीवर की बीमारी को बढ़ा भी सकता है । बेहतर है कि इसके सेवन से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह ली जाए।

लीवर सिरोसिस का इलाज – 
लीवर सिरोसिस लाइलाज है, लेकिन निम्नलिखित उपचार के जरिए इसकी स्थिति को बदतर होने से (कुछ मामलों में) कुछ हद तक बचाया जा सकता है –

लीवर डैमेज के कारणों का इलाज – हेपेटाइटिस (बी या सी) वायरस संक्रमण या लीवर डैमेज के अन्य कारणों का पता कर इलाज करना।

आहार और जीवन शैली में बदलाव – कम वसा वाले पौष्टिक आहार, हाई प्रोटीन डाइट का सेवन और व्यायाम।

शराब से परहेज – शराब लीवर को नुकसान पहुंचाने का काम करती है, इसलिए इसका परहेज जरूरी है।

दवाइयां – रक्तचाप कम करने के लिए और रक्तस्राव के जोखिम को कम करने के लिए बीटा-ब्लॉकर्स मेडिसीन और अत्यधिक तरल निकालने के लिए मूत्रवर्धक दवाइयों का सेवन।

कुछ दवाइयों से परहेज – नॉन स्टेरायडल इंफ्लामेटरी ड्रग्स (NSAID) और सेडेटिव (नींद की दवा) दवाइयां।

नियमित रूप से मेडिकल जांच – डॉक्टर के कहे अनुसार नियमित रूप से जांच करवाते रहें।

इंडोस्कोपिक जांच  –  पेट या भोजन-नलिका में वेरिकोज वेंस का पता लगाने के लिए इंडोस्कोपिक जांच भी जरूरी है।

लीवर ट्रांसप्लांट – गंभीर मामलों में डॉक्टर लीवर ट्रांसप्लांट के लिए भी कह सकता है।

लीवर सिरोसिस से बचाव  – 
नीचे पढ़ें लीवर सिरोसिस से बचाव के कुछ उपाय 
  • शराब का सेवन न करें।
  • हेपटाइटिस बी की वजह से लीवर सिरोसिस का खतरा हो सकता है, इसलिए हेपटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं।
  • जंक फूड से दूर रहें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • व्यायाम करें।
जैसा कि हमने बताया कि लीवर सिरोसिस एक लाइलाज बीमारी है, इसलिए इससे बचे रहने के लिए स्वस्थ आहार और स्वस्थ दिनचर्या का पालन करना अति आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति लीवर से जुड़ी किसी बीमारी के चपेट में आ चुका है, तो वो उसका जल्द से जल्द सटीक उपचार जरूर कराए। हम उम्मीद करते हैं लेख के जरिए आपको इस घातक बीमारी से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्राप्त हो गई होगी। साथ ही हम आपके स्वस्थ शरीर की कामना करते हैं, जिससे आपको कभी लीवर सिरोसिस का इलाज कराने की नौबत न आए। आपको यह लेख कैसा लगा, इसके बारे में हमें कमेंट के जरिए लिख भेजें। इसके अलावा, इस लेख से जुड़ा कोई सवाल हो तो उसे भी हमारे साथ कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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