तिल को उपयोग करने के कई तरीके हैं, जिनमें तिल के तेल का इस्तेमाल भी शामिल है। यह कई औषधीय गुण से भरपूर होता है। इस कारण इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। तिल के तेल को त्वचा और बालों में लगाने के साथ-साथ भोजन बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। वहीं, तिल का तेल कुछ रोगों के लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकता है, लेकिन रोगों के पूर्ण इलाज के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट आवश्यक है। इस आर्टिकल में हम तिल के तेल के गुण और तिल के तेल के फायदे के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही तिल के तेल के नुकसान के बारे में भी बताएंगे।
तिल के तेल के फायदे –
तिल के तेल के फायदे को तीन भागों में समझाया जा रहा है, जिसमें सबसे पहले हम सेहत के लिए तिल के तेल के फायदे जानेंगे।
सेहत/स्वास्थ्य के लिए तिल के तेल के फायदे –
सेहत के लिए तिल के तेल का ज्यादातर उपयोग आहार के साथ हो सकता है। जिसका असर इसके सेवन के कुछ दिन में नजर आ सकता है।
1. उच्च प्रोटीन आहार
कई खाद्य पदार्थों को तैयार करने में तिल का तेल इस्तेमाल किया जाता है। जो लोग इस तेल को अपने आहार में शामिल करते हैं, वो इसके लजीज स्वाद से भलीभांति परिचित होंगे। तिल के तेल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। जो शरीर को जरूरी प्रोटीन प्रदान करने का काम करता है (1)। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं में सुधार और कोशिका निर्माण में मदद कर सकता है। इसके अलावा, प्रोटीन बच्चे, किशोर और गर्भवती के विकास में भी मदद कर सकता है ।
2. मधुमेह को दूर रखने में
एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, तिल के तेल के लाभ मधुमेह के जोखिम से बचाने में मदद कर सकते हैं। दरअसल, सफेद तिल का तेल ब्लड शुगर (GLU) को रेगुलेट करने का काम करता है। साथ ही मधुमेह के नुकसानदायक प्रभाव को कम करने में मदद करता है (3)। इस कारण यह माना जा सकता है कि तिल का तेल मधुमेह की समस्या से राहत दिला सकता है। हां, अगर कोई मधुमेह से पीड़ित है, तो उसे यह घरेलू उपचार करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लेना चाहिए। साथ ही डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाइयां जरूर लेनी चाहिए।
3. एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध
एनसीबीआई की ओर से प्रकाशित शोध के अनुसार, तिल का तेल कई लाभकारी तत्वों से समृद्ध होता हैं। इसमें सेसमोल और सेसमिनोल नामक तत्व भी शामिल हैं। ये दोनों तत्व शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं । वहीं, एक अन्य शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, इस्केमिक हृदय रोग (इसे कोरोनरी धमनी रोग के नाम से भी जाना जाता है), चोट को भरने और मधुमेह जैसी कई समस्याओं को दूर करने में लाभकारी परिणाम प्रदर्शित कर सकता है ।
4. हृदय स्वास्थ्य के लिए
हृदय को स्वस्थ रखने में आहार और उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले तेल की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। तिल का तेल हृदय को स्वस्थ रखने का काम कर सकता है। दरअसल, तिल के तेल में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो हृदय को सुरक्षित रखने का काम कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें लिग्नैंस (फाइबर का एक प्रकार) भी होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने और रक्तचाप को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं । इस कारण तिल के तेल को हृदय संबंधी जोखिम से राहत दिलाने में सहायक माना जा सकता है।
5. एंटी इंफ्लेमेटरी गुण से भरपूर
तिल के तेल के औषधीय गुणों में से एक एंटी-इंफ्लेमेटरी भी है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण तेल का तेल शरीर की सूजन संबंधी समस्या को दूर रखने का काम कर सकता है। सूजन शरीर के बाहरी और अंदरुनी दोनों भाग में हो सकती है, जिससे तिल के तेल का उपयोग राहत दिला सकता है ।
6. दर्द से राहत
एनसीबीआई के एक शोध के अनुसार, तिल के तेल के गुण जिन समस्याओं में फायदेमंद साबित हो सकते हैं, उनमें दर्द से राहत भी शामिल है। दरअसल, तिल के तेल में एंटी-नोसिसेप्टिक (दर्द को कम करने वाला गुण) पाए जाते हैं, जो दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। इस कारण तिल के तेल का उपयोग जोड़ों के दर्द, दांत दर्द, मासिक धर्म सिंड्रोम, खरोंच और कटने के कारण होने वाले दर्द को कम करने में सहायक साबित हो सकता है
7. रूमेटाइड अर्थराइटिस
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक तरह की समस्या है, जिसे गठिया के नाम से भी जाना जाता है। इसके लिए तिल के तेल में पाया जाने वाला एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मदद कर सकता है। दरअसल, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को तो कम करता ही है, साथ ही रूमेटाइड अर्थराइटिस से भी राहत दिला सकता है ।
8. बेहतर नींद के लिए
अनिद्रा की स्थिति में तिल के तेल का उपयोग लाभकारी हो सकता है। एनसीबीआई के एक रिसर्च के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट गुण मस्तिष्क में रक्त को सही तरह से प्रवाहित कर नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद कर सकता है (9)। जैसा कि ऊपर आपने पढ़ा कि तिल के तेल में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि तिल के तेल के फायदे नींद में सुधार के लिए भी कारगर साबित हो सकते हैं।
त्वचा के लिए तिल के तेल के फायदे –
1. हीलिंग प्रॉपर्टीज
कैसे है फायदेमंद:
अगर शरीर में किसी तरह का घाव है, तो उसके इलाज में तिल का तेल सहायक हो सकता है। ओजोनेटेड सीसम ऑयल में हीलिंग प्रॉपर्टीज होती है, जो घाव को भरने में मदद कर सकती है । इसलिए, इस तेल को घाव भरने की समस्या में भी उपयोगी माना जा सकता है।
उपयोग की विधि:
इस तेल को सामान्य तरह से त्वचा पर लगा सकते हैं या इसे हल्का गर्म करके कुछ समय के लिए ठंडा होने दें। फिर त्वचा पर लगा लें।
2. सनबर्न का इलाज
कैसे है फायदेमंद:
अधिक धूप के कारण हुए सनबर्न से छुटकारा पाने के लिए तिल के तेल को प्रभावी माना जा सकता है। तिल के तेल में टोकोफेरॉल नामक खास तत्व पाया जाता है, जो विटामिन-ई का एक प्रकार होता है। टोकोफेरॉल सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा प्रदान करने का काम कर सकता है , जिससे सनबर्न की शिकायत कम हो सकती है।
उपयोग की विधि:
- तिल के तेल को सनस्क्रीन की तरह त्वचा पर लगाया जा सकता है।
3. स्किन डिटॉक्सिफायर की तरह
कैसे है फायदेमंद:
एनसीबीआई में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, तिल के तेल में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा से बैक्टीरिया और फंगस को दूर करने में मदद कर सकते हैं, जिससे त्वचा साफ रह सकती है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि तिल का तेल स्किन डिटॉक्सिफायर की तरह भी काम कर सकता है ।
उपयोग की विधि:
- सबसे पहले तेल को हल्का गर्म कर लें।
- फिर इसे त्वचा पर लगा लें।
- इसे त्वचा पर लगे रहने दें।
बालों के लिए तिल के तेल के फायदे –
जिस तरह त्वचा पर लगाने के लिए इस तेल का इस्तेमाल हो सकता है। उसी तरह बालों में लगाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
1. स्कैल्प की समस्याओं को रोकने के लिए
कैसे है फायदेमंद:
तिल के तेल स्कैल्प को पर्याप्त पोषण प्रदान करने में मदद कर सकते हैं। तिल का तेल एंटी बैक्टीरियल गुण से समृद्ध होते हैं, जो पैथोजन जैसे जीवाणु को दूर कर स्कैल्प को संक्रमण से छुटकारा दिला सकता हैं। वहीं, इससे स्कैल्प की कई और समस्याओं से भी राहत मिल सकती हैं ।
उपयोग की विधि:
- सबसे पहले इस तेल को हल्का गर्म कर लें।
- फिर पूरे स्कैल्प पर अच्छे से लगा लें।
- इसे रातभर के लिए छोड़ दें।
- अगली सुबह नहाते समय इसे धो लें।
2. रूसी के लिए
कैसे है फायदेमंद:
रूसी की समस्या से निजात दिलाने वाले ज्यादातर प्रोडक्ट में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं, जो रूसी को दूर करने का काम कर सकते हैं (14)। वहीं, तिल के तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं । इसलिए, तिल के तेल को रूसी की समस्या से राहत पाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
उपयोग की विधि:
- एक चम्मच तिल के तेल में आधा चम्मच नारियल तेल मिला लें।
- फिर उसे बाल और स्कैल्प पर अच्छी तरह लगा लें।
- इसे रातभर के लिए लगा छोड़ दें।
- अगली सुबह शैम्पू से बालों को धो लें।
तिल के तेल के पौष्टिक तत्व –
तिल के तेल में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में हम यहां टेबल के जरिए विस्तार से बता रहे हैं
तिल के तेल का उपयोग –
तिल के तेल का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
कैसे खाएं:
- तिल का तेल का उपयोग सब्जी बनाने में किया जा सकता है।
- इसे सलाद में ऊपर से डालकर खाया जा सकता है।
- इसे सूप में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।
- तिल के तेल से फ्राइड राइस तैयार करके खाए जा सकते हैं।
- तिल के तेल को विनगेट्रेट (Vinaigrette) की तरह लिया जा सकता है। विनगेट्रेट में तेल को कुछ एसिडिक पदार्थ के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है, जैसे सिरका या नींबू का रस।
कब खाएं:
- इसे सुबह सलाद में मिलाकर खाया जा सकता है।
- तिल के तेल को शाम के सूप के साथ ले सकते हैं।
- इसे दोपहर और रात के आहार में शामिल कर सकते हैं।
कितना खाएं: तेल की सीमित और संतुलित मात्रा के बारे में कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए, अगर आप इसे नियमित इस्तेमाल में लाना चाह रहें, तो इसकी मात्रा के संबंध में आहार विशेषज्ञ से सलाह जरूर करें।
तिल के तेल के नुकसान –
कई बार तिल के तेल का उपयोग नुकसानदायक भी हो सकता है, जो इस प्रकार से हो सकता हैं:
- कुछ लोगों को तिल के तेल के उपयोग से एलर्जी हो सकती है ।
- गर्भवती को तिल के तेल का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए, ताकि तिल के तेल से होने वाले किसी भी नुकसान से बचा जा सके।
अब यह बात तो स्पष्ट हो गई होगी कि तिल का तेल कई समस्याओं के इलाज में सहायक बन सकता है, लेकिन बीमार का इलाज करने के लिए पूरी तरह से इस तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। किसी भी समस्या को यह कुछ समय के लिए ही दूर कर सकता है। रोग के सही उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाए।

