-महादेवा और बैरीपुर गौ आश्रय केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, बारिश में जलभराव से बढ़ा संक्रमण का खतरा; ग्राम प्रधान ने उठाए गंभीर सवाल, तत्काल निर्माण की मांग।
गोण्डा । प्रदेश सरकार जहां गौ संरक्षण और गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं जनपद गोण्डा के नवाबगंज विकासखंड के ग्राम महादेवा स्थित गौ आश्रय केंद्र तथा मनकापुर विकासखंड के वृहद गौ आश्रय केंद्र बैरीपुर की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। दोनों गौशालाओं में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर समस्या सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) का न होना है, जिसके कारण संरक्षित गौवंश हर समय असुरक्षा के साए में जीवन बिता रहे हैं। दूसरी ओर लगातार हो रही बारिश के कारण परिसर में फैले जलभराव और कीचड़ ने व्यवस्थाओं की बदहाली को और उजागर कर दिया है।
महादेवा गौ आश्रय केंद्र में वर्तमान में 144 तथा बैरीपुर वृहद गौ आश्रय केंद्र में 255, कुल 399 गौवंश संरक्षित हैं। चारा, दाना और भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। गौशालाओं तक पहुंचने और अंदर आवागमन के लिए पक्का खड़ंजा न होने से बारिश के दिनों में पूरा परिसर दलदल में तब्दील हो जाता है।
सुरक्षा दीवार के अभाव में हर समय बना रहता है खतरा
दोनों गौशालाओं में बाउंड्री वॉल न होने के कारण आवारा पशुओं और अन्य जानवरों के परिसर में घुसने का खतरा लगातार बना रहता है। कर्मचारियों को गौवंश की निगरानी और सुरक्षा में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खुले परिसर के कारण गौवंश के बाहर निकलने अथवा बाहरी जानवरों के प्रवेश की आशंका बनी रहती है, जिससे किसी भी समय अप्रिय घटना हो सकती है।
कीचड़ और जलभराव से बिगड़ रहे हालात
हाल की बारिश के बाद गौशालाओं का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया है। चारों ओर फैले कीचड़ के कारण गौवंश को बैठने और आराम करने के लिए सूखी जगह तक उपलब्ध नहीं है। लगातार गीली जमीन पर रहने से खुर संबंधी रोग, त्वचा संक्रमण तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यदि समय रहते जलनिकासी और पक्के फर्श की व्यवस्था नहीं की गई तो पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौ संरक्षण केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब गौशालाओं में सैकड़ों गौवंश संरक्षित हैं तो उनकी सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बावजूद इसके वर्षों से बाउंड्री वॉल और खड़ंजा निर्माण लंबित पड़ा है।
ग्राम प्रधान ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्राम प्रधान ने शासन, प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि दोनों गौशालाओं में प्राथमिकता के आधार पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए तथा परिसर में खड़ंजा और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में सुरक्षा दीवार न होने से गौवंश की सुरक्षा पर गंभीर संकट बना रहता है और बिना पक्के मार्ग के गौशाला का संचालन भी प्रभावित हो रहा है।
अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र बाउंड्री वॉल, खड़ंजा और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं कराई गई तो गौ संरक्षण की पूरी व्यवस्था केवल दावों तक सीमित रह जाएगी। लोगों ने पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक निर्माण कार्य स्वीकृत कराने की मांग की है, ताकि गौवंश को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके तथा गौशालाओं की बदहाली दूर हो सके।

