-देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध एवं नवाचार के विचार
-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम।
गोण्डा । एससीपीएम कॉलेज ऑफ फार्मेसी द्वारा आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "आईकॉनएससीपीएम-2026" का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ। सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा फार्मेसी विशेषज्ञों ने भाग लेकर फार्मास्यूटिकल विज्ञान के नवीनतम शोध, तकनीकी नवाचार, वैश्विक सहयोग एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के समागम का सशक्त मंच साबित हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमोद कुमार त्रिपाठी, रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल, लखनऊ ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि "आज का युग नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास का युग है। फार्मेसी केवल दवा निर्माण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने, नई चिकित्सा पद्धतियों के विकास तथा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों के साथ संवाद का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनमें शोध की नई सोच विकसित होती है। मुझे विश्वास है कि आईकॉनएससीपीएम-2026 से निकले विचार भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं और फार्मास्यूटिकल उद्योग को नई दिशा देंगे।"
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य संरक्षक डॉ. ओ.एन. पाण्डेय एवं श्रीमती अलका पाण्डेय, संरक्षक डॉ. आयुष पाण्डेय, डॉ. आयुषी पाण्डेय, अजीताभ दुबे एवं धीरज कुमार दुबे सहित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सम्मेलन संयोजक प्रो. तारकेश्वर प्रसाद शुक्ला ने स्वागत संबोधन में कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोध संस्कृति को मजबूत करने के साथ-साथ नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के बीच विचारों का आदान-प्रदान नई खोजों और अनुसंधान को गति प्रदान करता है।
आयोजन सचिव सरफराज़ अहमद एवं डॉ. शिव कुमार ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और फार्मास्यूटिकल उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करना तथा विद्यार्थियों को वैश्विक शोध प्रवृत्तियों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन अकादमिक उत्कृष्टता और व्यावसायिक कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने आधुनिक औषधि अनुसंधान, नई दवा विकास तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फार्मास्यूटिकल अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण, क्लीनिकल रिसर्च तथा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे विषयों पर अपने शोध एवं अनुभव प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक चर्चाओं में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए शोध के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राओं तथा फार्मेसी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे सम्मेलन का सफलतापूर्वक एवं सुव्यवस्थित संचालन किया गया। सम्मेलन के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया।

