कर्नलगंज-गोण्डा। अब सर्पदंश से होने वाली मौत पर मृतक के परिजनों को चार लाख रूपये की आर्थिक मदद मिलेगी। शासन ने सर्पदंश को दैवी आपदा से जोड़ दिया है। उप जिलाधिकारी हीरालाल के मुताबिक प्रदेश सरकार ने सांप के काटने से होने वाली मृत्यु दर को देखते हुए इसे दैवीय आपदा में शामिल कर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिसमें सांप के काटने से किसी भी व्यक्ति की मौत होने के बाद पीड़ित परिवार को संबंधित थाने की पुलिस, क्षेत्रीय लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार या एसडीएम में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी को इसकी सूचना देनी होगी। सूचना के बाद मृतक का पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होगा। सर्पदंश में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता रखी गई है। उस पीड़ित परिवार को तत्काल प्रभाव से चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। एसडीएम ने बताया कि शासन द्वारा जारी आदेश का अनुपालन कराने के लिए तहसील क्षेत्र के समस्त राजस्व कर्मचारियों, अधिकारियों को इस शासनादेश की जानकारी दी गई है और उन्हें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने व इस शासनादेश की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।
गोण्डा-अब सर्पदंश से होने वाली मौत पर मृतक के परिजनों को चार लाख रूपये की आर्थिक मदद
कर्नलगंज-गोण्डा। अब सर्पदंश से होने वाली मौत पर मृतक के परिजनों को चार लाख रूपये की आर्थिक मदद मिलेगी। शासन ने सर्पदंश को दैवी आपदा से जोड़ दिया है। उप जिलाधिकारी हीरालाल के मुताबिक प्रदेश सरकार ने सांप के काटने से होने वाली मृत्यु दर को देखते हुए इसे दैवीय आपदा में शामिल कर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिसमें सांप के काटने से किसी भी व्यक्ति की मौत होने के बाद पीड़ित परिवार को संबंधित थाने की पुलिस, क्षेत्रीय लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार या एसडीएम में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी को इसकी सूचना देनी होगी। सूचना के बाद मृतक का पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होगा। सर्पदंश में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता रखी गई है। उस पीड़ित परिवार को तत्काल प्रभाव से चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। एसडीएम ने बताया कि शासन द्वारा जारी आदेश का अनुपालन कराने के लिए तहसील क्षेत्र के समस्त राजस्व कर्मचारियों, अधिकारियों को इस शासनादेश की जानकारी दी गई है और उन्हें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने व इस शासनादेश की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।
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