आप जानते है जीवाणु की खोज किसने किया या खोजकर्ता का नाम नहीं तो आइए जाने जीवाणु की खोज किसने किया खोजकर्ता के बारे मे. यहा क्लिक से पढे विषाणु की खोज किसने किया। जीवाणु जीवन का सबसे सरल रूप है। जीवाणु एक कोशिकीय जीव होते है। जिन्हें हम बैक्टीरिया(Bacteria) भी कहते है।” इनके कोई अंग नहीं होते है। बैक्टीरिया लगभग सभी आकारों में पाए जाते है। बैक्टीरिया अक्सर जानवरों के शरीर में भी पाए जाते है। इनमें से कुछ तो इनके शरीर के लिए उपयोगी होते है, तो कुछ शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकते है। उदाहरण के लिए गाय के पेट मे ऐसा बैक्टीरिया पाया जाता है जो घास को पचा सकता है। लेकिन मनुष्य के शरीर में ऐसा बैक्टीरिया नहीं पाया जाता है। यही कारण है कि जानवर घास को पचा पाते है और मनुष्य घास को नहीं पचा सकता है। बैक्टीरिया मनुष्य शरीर को हानि पहुँचा सकतें है इसलिए इनसे बचने के लिए हमें जिंक और विटामिन सी से भरपूर पोषक तत्वों को ग्रहण करना चाहिए।
जीवाणु की खोज किसने किया खोजकर्ता नाम
जीवाणु की खोज 1683 ई. मे हालैंड के एंटोनिवान ल्यूवेनहाक ने किया था साथ ही जीवाणु विज्ञान का पिता ल्यूवेनहाक को कहा जाता है।
एहरेबर्ग ने सन 1829 ई. मे इन्हे जीवाणु नाम दिया था।
1843 - 1910 ई. मे रॉबर्ट कोच ने कालरा तथा तपेदिक के जीवाणुओ की खोज की रोग का जर्म सिद्धान्त बताया था ।
1812 - 1892 ई . लुई पाश्चर ने रेबीज का टीका, दूध के पाश्चुराइजेशन की खोज किया था।
जीवाणु के प्रकार -
आकृति के आधार पर जीवाणु कई प्रकार के होते है -
छड़ाकार या बेसिलम - यह छड़नुमा या बेलनाकर होता है।
गोलाकार या कोकस - यह गोलाकर एंव सबसे छोटे जीवाणु होते है।
कोमा - आकार या विब्रियो - अँग्रेजी के चिन्ह कोमा [ , ] के आकार के उदाहरण विब्रियो आदि।
सर्पीलाकर - यह स्प्रिंग या स्क्रू के आकार मे होते है ।
जीवाणु एंव तथ्य -
चर्म उधोग मे चमड़े से बालो और वसा को हटाने का कार्य जीवाणुओ के द्वारा होता है इसे चमड़ा कमाना कहते है।
आचार मुरब्बे शर्बत को शक्कर चासनी मे या अधिक नमक मे रखते है ताकि जीवाणुओ का संक्रमण होते ही जीवाणुओ का जीव द्रवकुंचन हो जाता है साथ ही जीवाणु नष्ट हो जाते है इसलिए आचार, मुरब्बे बहुत अधिक दिनो तक खराब नहीं होते।

