योग, प्राचीन भारत का विज्ञान है। ये विज्ञान हमें प्रकृति से सीखना और उसे खुले दिल से अपनाना सिखाता है। योग मनुष्य शरीर और प्रकृति के बीच का सेतु है। योग प्रकृति में मौजूद वस्तुओं और अन्य जीवित प्राणियों के गुणों को मानव शरीर में लाने का माध्यम है।
संसार के हर प्राणी से मानव को अधिक बुद्धिमान माना जाता है क्योंकि वह संसार की दुर्गम से दुर्गम परिस्थिति में भी खुद को बचाए रह सकता है। लेकिन प्रकृति ने बाकी जीवों को किसी विशेष परिस्थिति में रहने के लिए ही अनुकूलित किया है।
योग उन विशेष परिस्थिति में रहने वाले जीवों के अनुकूलन के गुणों को मानव शरीर में ढालने और उससे लाभ उठाने का विज्ञान है। इस आर्टिकल में मैं आपको मत्स्यासन के बारे में जानकारी दूंगा। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।
क्या है मत्स्यासन?
हिंदू धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि प्रलयकाल में जब पृथ्वी जल में डूब गई थी। तब भगवान विष्णु ने मत्सय अवतार लिया था। इस अवतार में विष्णु ने मछली का रूप लिया था। उन्होंने इस प्रलय में सभी मानवों की नाव को संतुलन बनाकर बाहर निकाल दिया था।
मत्स्यासन भी योगी की उसी प्रकार से सहायता करता है। इस आसन में शरीर मछली की मुद्रा बनाता है। ये आसन शरीर और मन में वैसा ही बैलेंस बनाता है जैसा मत्सयावतार में भगवान ने धरती और समुद्र के बीच बनाया था।
मत्स्यासन से पहले जानें कुछ जरूरी बातें
ये बहुत जरूरी है कि मत्स्यासन को करने से पहले आपका पेट एकदम खाली हो। बेहतर होगा कि आप शौच के बाद ही मत्स्यासन का अभ्यास करें। अगर आप शाम को ये आसन कर रहे हैं तो आसन से कम से कम 4-6 घंटे पहले भोजन कर लें। इससे भोजन को पचने का पर्याप्त समय मिल जाता है। वैसे तो इस आसन को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का है लेकिन इस आसन का अभ्यास शाम को भी किया जा सकता है।
मत्स्यासन -
- स्तर : साधारण
- शैली : हठ योग
- अवधि : 30 से 60 सेकेंड
- दोहराव : नहीं
- खिंचाव : गला, नाभि, हिप्स की मांसपेशियों पर, सामने गर्दन पर, पसलियों की मांसपेशियों पर
- मजबूत बनाए : पीठ की ऊपरी मांसपेशियां, गर्दन के पीछे का हिस्सा
कैसे करें मत्स्यासन
- योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं, आपकी टांगें जुड़ी रहें, जबकि आपके साथ आराम से शरीर से जुड़े रहें।
- अपनी हथेलियों को हिप्स के नीचे लगाएं, हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी। अब कोहनियों को एक-दूसरे के करीब लाने की कोशिश करें। कोहनियों की स्थिति कम के पास होगी।
- अपने पैरों की पालथी मार लें। जांघें और घुटने फर्श पर सपाट रहेंगे।
- सांस खींचते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं। सिर भी ऊपर की तरफ उठाएं, और सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छूता रहेगा।
- शरीर का पूरा वजन कोहनियों पर रहेगा न कि सिर पर।
- जैसे-जैसे सीना उठेगा वैसे ही कंधों की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ेगा।
- इस स्थिति में तभी तक रहें जब तक आप सहज अनुभव करते रहे। सांसों की गति सामान्य बनाए रहें।
- सांस बाहर निकालें और पुरानी स्थिति में वापस लौटें।
- सबसे पहले सिर को उठाएं और उसके बाद सीने को जमीन पर वापस लाएं। टांगों को सीधा करें और विश्राम करें।
मत्स्यासन के फायदे
मत्स्यासन करने से शरीर को ढेर सारे फायदे मिलते हैं। जैसे,
- इस आसन के अभ्यास से शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ जाता है।
- मत्स्यासन सीने और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है और कंधों, गर्दन की मांसपेशियों से टेंशन को मुक्त करता है।
- ये सांस लेने के सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करता है। सांस की समस्याओं को दूर करने के लिए ये बेस्ट है।
- मत्स्यासन के अभ्यास से पिट्यूटरी, पैराथायरॉयड और पीनल ग्लैंड्स भी टोन हो जाती हैं।
- ये पीठ को स्ट्रेच करता है और उसे टोन करता है। इससे पीठ और कमर में दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है।
- ये पीठ के ऊपरी हिस्से और गर्दन के पीछे की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- ये हिप्स के जोड़ और मांसपेशियों को अच्छा स्ट्रेच देता है।
- इसके नियमित अभ्यास से गर्दन के सामने और निचले पेट की मांसपेशियां एक्टिव हो जाती हैं।
- इससे गले और पाचन अंगों को अच्छी मसाज मिलती है।
- ये आसन पोश्चर सुधारने में भी मदद करता है।
- कब्ज
- सांस संबंधी बीमारियां
- हल्का पीठदर्द
- थकान
- एंग्जाइटी/बेचैनी
मत्स्यासन के पीछे का विज्ञान
यह आसन उस वक्त आपको ध्यान केंद्रित करने और मुश्किलों से लड़ने में मदद करता है जब आप खुद को अस्थिर और बेचैन पाते हैं। इस आसन में आपके पैर जमीन पर दबाव बनाते हुए छूते रहते हैं जबकि सीना उठा हुआ रहता है और आप गहरी सांसें लेते हैं।
मत्स्यासन से पीठ और कमर मजबूत होती हैं। जबकि आसन के दौरान गर्दन में बनने वाले मोड़ से थायरॉयड में फायदा पहुंचता है। सभी पीठ मोड़कर किए जाने वाले आसनों में ये आसन आपके मूड को अच्छा करने में सबसे बेस्ट है।
प्राचीन भारत के योगियों में मान्यता थी कि ये आसन शरीर में वैसी ही चेतना विकसित करता है जो हमें सोकर उठने के बाद मिलती है। इसका नियमित अभ्यास करने पर हमें दिन भर ऊर्जा मिलती रहती है।
इस आसन का अभ्यास कभी भी किया जा सकता है। अगर आप डेस्क जॉब करते हैं और दिन भर ऑफिस में काम करते-करते आपकी कमर दोहरी हो जाती है। तब भी आप इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं।
सारांश
अगर आप दिन में भी काम करते-करते थक जाते हैं और आपको कॉफी की तलब महसूस होती है, तो आप मत्स्यासन को अपने रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बना सकते हैं। मत्स्यासन के नियमित अभ्यास से शरीर दिन भर ऊर्जावान बना रहता है। आप जिंदगी के हर पल ऊर्जावान और जिंदादिल बने रहते हैं।


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