गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।

बिल्ली के गले में घंटी- ईसप की कहानी

Image SEO Friendly

एक बहुत बड़े घर में सैकड़ों चूहे रहते थे। वे चारों ओर उछल-कूद करते हुए अपना पेट आराम से भर लेते थे और फिर जब उन्हें खतरा दिखाई देता तो बिल में जाकर छिप जाते थे। एक दिन उस घर में न जाने कहाँ से एक बिल्ली आ गई। बिल्ली की नज़र जैसे ही चूहों पर पड़ी तो उसके मुँह में पानी आ गया। बिल्ली ने उन चूहों को खाने के विचार से उसी घर में अपना डेरा डाल दिया। बिल्ली को जब कभी भूख लगती तो वह अँधेरे स्थान में छिप जाती और जैसे ही चूहा बिल से बाहर आता तो उसे मारकर खा जाती। अब तो बिल्ली रोज चूहों का भोजन करने लगी। इस प्रकार वह कुछ ही दिनों में मोटी-ताजी हो गई।

बिल्ली के आ जाने से चूहे दुःखी हो गए। धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होती देख वे भयभीत हो गए। चूहों के मन में बिल्ली का डर बैठ गया। बिल्ली से बचने का कोई उपाय खोजने के लिए सभी चूहों ने मिलकर एक सभा का आयोजन किया। सभा में सभी चूहों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए, लेकिन कोई भी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास नहीं हो सका। सभी चूहों में निराशा फैल गई।

तब एक बूढ़ा चूहा अपने स्थान पर खड़ा होकर बोला―' भाइयो सुनो, मैं तुम्हें एक सुझाव देता हूँ, जिस पर अमल करके हमारी समस्या का हल निकल सकता है। यदि हमें कहीं से एक घंटी और धागा मिल जाए तो हम घंटी को बिल्ली के गले में बाँध देंगे। जब बिल्ली चलेगी तो उसके गले में बँधी हुई घंटी भी बजने लगेगी। घंटी की आवाज़ हमारे लिए खतरे का संकेत होगी। हम घंटी की आवाज़ सुनते ही सावधान हो जाएँगे और अपने-अपने बिल में जाकर छिप जाएंगे।'

बूढ़े चूहे का यह सुझाव सुनकर सभी चूहे ख़ुशी से झूम उठे और अपनी ख़ुशी प्रकट करने के लिए वे नाचने-गाने लगे। चूहों का विचार था कि अब उन्हें बिल्ली से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और वे फिर से निडर होकर घूम सकेंगे।

तभी एक अनुभवी चूहे ने कहा―'चुप रहो, तुम सब मुर्ख हो। तुम इस तरह तरह खुशियाँ मना रहे हो, जैसे तुमने कोई युद्ध जीत लिया हो। क्या तुमने सोचा है कि बिल्ली के गले में जब तक घंटी नहीं बंधेगी तब तक हमें बिल्ली से मुक्ति नहीं मिल सकती।'

अनुभवी चूहे की बात सुनकर सारे चूहे मुँह लटकाकर बैठ गए। उनके पास अनुभवी चूहे के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था। तभी उन्हें बिल्ली के आने की आहट सुनाई दी और सारे चूहे डरकर अपने-अपने बिलों में घुस गए।

शिक्षा:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि योजनाएँ बनाने से किसी भी समस्या का हल नहीं होता। समस्या का समाधान करने के लिए उन योजनाओं पर अमल करना आवश्यक है।

”go"