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अरंडी के तेल के उपयोग, फायदे, उपयोग और नुकसान

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सेहतमंद रहने के लिए घरेलू उपायों का सहारा लोग सालों से लेते आ रहे हैं। खासकर, जब बात भारत के लोगों की हो तो दादी मां के नुस्खों का उपयोग यहां खूब किया जाता है। उन्हीं में से एक है अरंडी का तेल। हो सकता है कि कई लोगों को अभी तक अरंडी के तेल के फायदे के बारे में ज्यादा जानकारी न हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम इस लेख शरीर के लिए अरंडी के तेल के फायदे बताने जा रहे हैं। यहां न सिर्फ अरंडी के तेल के फायदे बताए जाएंगे बल्कि सही तरीके से अरण्डी के तेल का उपयोग की भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, लेख में इससे जुड़ी अन्य जानकारी को भी शामिल किया गया है। पाठक ध्यान दें कि अरंडी का तेल लेख में बताई गई किसी भी समस्या का इलाज नहीं है। यह सिर्फ इन समस्या के प्रभाव और लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकता है।

अरंडी का तेल क्या है – 
यह एक वनस्पति तेल है, जिसे अरंडी के बीजों से निकाला जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम रिसिनस कम्युनिस है। इसे हिंदी में अरंडी का तेल, तेलगु में आमुदामु, बंगाली में रिरिरा टेला, मराठी में इरांदेला तेला, मलयालम में अवानक्केना और तमिल में अमानक्कु एनी कहा जाता है। अरण्डी के तेल का उपयोग साबुन के साथ-साथ चिकना करने वाले पदार्थों में भी किया जाता है। इसके अलावा, पेट दर्द, पीठ दर्द, कब्ज और सिरदर्द जैसी समस्याओं के लिए इसका इस्तेमाल पारंपरिक औषधि के रूप में भी किया जाता है  लेख में आगे इससे होने वाले स्वास्थ्य फायदों के विषय में विस्तार से बताया गया है।

अरंडी के तेल के प्रकार – 
वैसे तो इस तेल के कई प्रकार हैं, लेकिन मुख्य रूप से यह तीन प्रकार का होता है।

ऑर्गेनिक कोल्ड-प्रेस्ड कैस्टर ऑयल – इसे सीधा अरंडी के बीजों से निकाला जाता है और इसे बनाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की हीट का प्रयोग नहीं किया जाता। तेल निकालने के दौरान हीट का प्रयोग करने से बीज में मौजूद सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। आप जब भी इसे खरीदें, तो ध्यान रहे कि यह पीले रंग का होना चाहिए।

जमैकन ब्लैक कैस्टर ऑयल – इसे बनाने के लिए अरंडी के बीजों को पहले भूना जाता है और फिर इन्हें दबाकर तेल निकाला जाता है। बीजों को भूनने के दौरान जो राख निकलती है, उसे भी तेल में मिक्स किया जाता है, जिस कारण यह तेल काले रंग का नजर आता है। इसमें भी कोल्ड-प्रेस्ड कैस्टर ऑयल की तरह सभी पौष्टिक गुण मौजूद होते हैं, लेकिन खारापन काफी होता है।

हाइड्रोजनेटेड कैस्टर ऑयल – यह हाइड्रोजनेटेड कैस्टर ऑयल है, जिसमें निकल (Nickel – एक प्रकार का रासायनिक तत्व) मिला होता है। इसे कैस्टर वैक्स के नाम से भी जाना जाता है। अन्य अरंडी के तेल की तुलना में यह गंधहीन और पानी में अघुलनशील होता है। यह खासतौर पर कॉस्मेटिक में उपयोग किया जाता है।

अरंडी के तेल के फायदे – 
नीचे पढ़ें स्वास्थ्य, त्वचा और बाल से संबंधित अरण्डी के तेल के फायदे।

1. कब्ज के लिए कैस्टर ऑयल के फायदे
कब्ज की समस्या किसी को भी सता सकती है। ऐसे में एनसीबीआई  की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार कैस्टर ऑयल का उपयोग कब्ज के लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकता है  फिलहाल, इस बारे में अभी और शोध की आवश्यकता है। वहीं, इसका अत्यधिक उपयोग ऐंठन की समस्या का कारण बन सकता है। इसमें मौजूद रिसिनोलिक एसिड (Ricinoleic Acid) इसका कारण हो सकता है। ऐसे में जिनको पेट संबंधी समस्याएं हैं वो इसका उपयोग डॉक्टरी परामर्श पर ही करें ।

2. गठिया के लिए अरंडी का तेल
ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis – गठिया का सबसे सामान्य प्रकार) के लिए भी अरंडी का तेल लाभकारी हो सकता है। दरअसल, एक शोध में कुछ ऑस्टियोआर्थराइटिस मरीजों को अरंडी के तेल युक्त दवा का सेवन कराया गया और कुछ को एंटी-इन्फ्लमेटरी दवा का सेवन कराया गया। 4 सप्ताह के उपचार के पूरा होने पर यह देखा गया कि घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में दोनों दवाएं प्रभावी थीं। वहीं, इसी बीच देखा गया कि डिक्लोफेनाक सोडियम (एक प्रकार की एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवा) का प्रतिकूल प्रभाव अधिक था, जबकि अरंडी के तेल के साथ कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। ऐसे में इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अरंडी का तेल ऑस्टियोआर्थराइटिस की स्थिति में प्रभावी साबित हो सकता है ।

3. प्रसव बढ़ाने के लिए कैस्टर ऑयल 
कैस्टर ऑयल का उपयोग प्रसव बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। इस विषय पर किए गए शोध के अनुसार अरंडी के तेल का उपयोग गर्भावस्था के दौरान 24 घंटे के भीतर लेबर पेन बढ़ाने का काम कर सकता है। इसे गर्भावस्था के दौरान प्रसव बढ़ाने के लिए उपयोगी माना जा सकता है। हालांकि, गर्भावस्था बहुत ही संवेदनशील स्थिति है, ऐसे में इसके उपयोग से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूरी है ।

4. हील स्पर या एड़ी के दर्द के लिए
हील स्पर, एक ऐसी समस्या है, जिसमें हील बोन के नीचे हड्डी बढ़ जाती है । इससे सूजन या दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में अरंडी के तेल का उपयोग लाभकारी हो सकता है। इससे जुड़े एक शोध के अनुसार अरंडी के तेल का उपयोग करने से हील स्पर के दर्द से राहत मिल सकती है हालांकि, यह हल्के दर्द के लिए या कुछ वक्त के लिए आरामदायक हो सकता है। अगर दर्द पुराना या अधिक है, तो डॉक्टरी परामर्श लेना भी आवश्यक है।

5. बवासीर के लिए अरंडी का तेल
बवासीर या हेमोर्रोइड्स (Hemorrhoids) न सिर्फ एक कष्टदायी समस्या है, बल्कि इस बारे में लोग खुलकर किसी को बता भी नहीं पाते हैं। ऐसे में इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति कई तरह के उपाय अपनाते हैं। उन्हीं में से एक उपाय है अरण्डी का तेल। कैस्टर ऑयल के कुछ शोध से यह बात पता चली है कि अरंडी के तेल का उपयोग बवासीर की समस्या के लिए किया जा सकता है । हालांकि, यह किस प्रकार सहायक होता है, इस बारे में अभी कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है। वहीं दूसरी ओर, बवासीर का एक कारण कब्ज भी है और ऐसे में अरंडी के तेल में मौजूद लैक्सटिव (पेट को साफ करने की दवा) गुण कब्ज से आराम दिलाकर, बवासीर का जोखिम कुछ हद कम करने में मदद कर सकते हैं ।

6. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
अरंडी का तेल सूजन की समस्या से राहत दिलाने में भी लाभकारी हो सकता है। दरअसल, इस विषय पर किए गए एक शोध के अनुसार, अरंडी के तेल में रिकिनोलेइक एसिड मौजूद होता है, जो कैप्साइसिन ( एक प्रकार का घटक) की तरह ही एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट की तरह काम कर सकता है। जानवरों पर किये गए शोध से यह बात सामने आई कि इसी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के कारण यह सूजन की परेशानी में उपयोगी हो सकता है ।

7. कैंडिडा के लिए अरंडी का तेल
कैंडिडा एक फंगस होता है। यह हर जगह रहता है, यहां तक कि इंसान के शरीर में भी। शरीर में इन्हें इम्यून सिस्टम नियंत्रित करने का काम करता है। वहीं, जब व्यक्ति बीमार होता है या वो एंटीबायोटिक ले रहा होता है, तो इनकी संख्या बढ़ सकती है, जिससे ये संक्रमण का कारण बन सकते हैं ऐसे में अरंडी के तेल का मिश्रण लाभकारी हो सकता है। हालांकि, इस बारे में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसका प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर किसी को संक्रमण ज्यादा है तो हमारी राय है कि इस स्थिति में डॉक्टरी इलाज को ही पहली प्राथमिकता दी जाए।

8. झुर्रियों के लिए अरंडी का तेल
अरंडी का तेल झुर्रियों से बचाव के लिए भी लाभकारी हो सकता है। फिलहाल, इस पर कोई सटीक शोध उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान के तौर पर यह माना जा सकता है कि अरंडी के तेल में मौजूद फैटी एसिड त्वचा की गहराई में जाकर कोलेजन और इलास्टिन (त्वचा में पाया जाने वाला प्रोटीन) के उत्पादन में सुधार कर न सिर्फ झुर्रियों को कम करने में मदद कर सकता है बल्कि त्वचा को स्वस्थ भी बना सकता है। फिलहाल, इस बारे में अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है। वहीं, अगर कोई त्वचा के लिए अरंडी तेल का उपयोग करना चाहता है तो चेहरा धोने के बाद अरंडी के तेल का उपयोग त्वचा को सेहतमंद बनाने में मददगार हो सकता है ।

9. मुंहासे या दाग-धब्बों के लिए
अरंडी का तेल मुंहासों के लिए भी लाभकारी हो सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद रिसिनोलिक एसिड मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को रोकने में मदद कर सकता है, जिससे मुंहासों का जोखिम कम हो सकता है। वहीं, इसके उपयोग से दाग-धब्बे भी कम हो सकते हैं । फिलहाल, इस बारे में अभी कोई सटीक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

10. पलकों के लिए अरंडी का तेल
अरंडी का तेल पलकों को खूबसूरत और घना बनाने के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, इस विषय पर अभी कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि आईलैशज के लिए अरंडी का तेल किस प्रकार पलकों को घना बना सकता है।

11. बालों के लिए अरंडी के तेल का उपयोग
अरंडी के तेल को बालों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। बाजार में यह आसानी से उपलब्ध होता है और इसका उपयोग न सिर्फ बालों बढ़ने में सहायक हो सकता है, बल्कि डैंड्रफ दूर करने में भी मदद कर सकता है । हालांकि, इस बारे में एक बार डॉक्टरी परामर्श भी जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में यह बालों के रूखे और बेजान बनने का कारण भी बन सकता है।

नोट : अगर किसी को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है या किसी को एलर्जी की परेशानी है तो वो अरण्डी के तेल का उपयोग हमेशा डॉक्टर या विशेषज्ञ की राय के बाद ही करें।

अरंडी के तेल का उपयोग –
नीचे जानते हैं अरंडी के तेल का उपयोग।
जिन्हें कब्ज की शिकायत है, वो एक कप संतरे के रस में एक बूंद अरंडी का तेल मिलाकर सेवन कर सकते हैं। हमने ऊपर जानकारी दी है कि अरंडी के तेल में लैक्सेटिव गुण (पेट साफ करने के गुण) मौजूद होते हैं। हालांकि, जिनको कब्ज की गंभीर समस्या है वो अरंडी के तेल के सेवन से बचें और डॉक्टरी सलाह लें 

  • पेट में दर्द या गैस के लिए अरंडी के तेल को गुनगुना कर पेट की मालिश की जा सकती है।
  • त्वचा के लिए, रात को सोने से पहले अच्छे से चेहरा साफ कर गुनगुने अरंडी के तेल को चेहरे पर लगाएं और अगले दिन ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
  • डार्क सर्कल कम करने के लिए एक चम्मच नारियल तेल में एक बूंद अरंडी का तेल मिलाकर सोने से पहले आंखों के नीचे लगाएं। फिर अगली सुबह धो लें।
  • बालों के लिए जरूरत अनुसार नारियल के तेल में एक से डेढ़ चम्मच कैस्टर ऑयल मिलाकर रात को सोने से पहले बालों की जड़ों में लगाएं और अगले दिन शैम्पू कर लें।
नोट : अगर किसी को एलर्जी की समस्या है तो वो इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें।


अरंडी के तेल की खुराक – 
अगर बात करें अरंडी के तेल के मात्रा की तो फिलहाल इसकी खुराक से संबंधित जानकारी के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। इसके उपयोग की मात्रा व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। देखा जाए तो अरंडी का तेल अन्य तेलों की तुलना में अधिक गाढ़ा होता है, ऐसे में इसका उपयोग बहुत ही कम मात्रा में किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अगर किसी को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो इसके सेवन से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। इसका अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

अरंडी के तेल के पौष्टिक तत्व – 
नीचे जानिए अरंडी के तेल में मौजूद पौष्टिक तत्वों के बारे में (
अरंडी के तेल में सबसे ज्यादा रिसिनोलिक एसिड पाया जाता है। इसमें लगभग 90% रिसिनोलिक एसिड मौजूद होता है।
  • 4% लिनोलिक एसिड
  • 3% ओलिक एसिड
  • 1% स्टीयरिक एसिड
  • 1% से ज्यादा अन्य लिनोलेनिक फैटी एसिड

गर्भावस्था के दौरान अरंडी के तेल का इस्तेमाल – 
स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो गर्भावस्था के दौरान अरंडी के तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हमने लेख में ऊपर जानकारी दी है कि गर्भावस्था में अरंडी के तेल का उपयोग लेबर पेन को बढ़ा सकता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान इसका उपयोग गर्भपात के खतरे को भी बढ़ा सकता है । ऐसे में अगर कोई गर्भवती महिला अरंडी तेल का उपयोग या सेवन करना चाह रही है तो इसके पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। इस तेल में प्राकृतिक लैक्सटिव होता है। अगर कोई गर्भवती महिला इसका एक चम्मच भी सेवन करती है तो बार-बार शौचालाय जाने की नौबत आ सकती है। साथ ही पेट खराब होने की आंशका भी हो सकती है।

बच्चो के लिए अरंडी का तेल – 
बच्चे के लिए नीचे बताए गए तरीके से अरंडी के तेल का उपयोग किया जा सकता है।

प्राकृतिक मॉइश्चराइजर – बच्चों की त्वचा कोमल व मुलायम होती है। ऐसे में अरंडी के तेल से उनकी मालिश की जा सकती है। इससे बच्चों की त्वचा को पर्याप्त नमी मिलेगी और चमक भी बनी रहेगी। साथ ही उनकी मांसपेशियां को भी मजबूती मिल सकती है।

डाइपर रैशेज से राहत – आजकल हर कोई अपने बच्चे को डाइपर पहनाता है। अब इसे बच्चे की सुरक्षा कहें या फिर खुद के काम को आसान बनाने कास्ता, लेकिन इसके परिणाम मासूम को भुगतने पड़ते हैं। अक्सर डाइपर की वजह से बच्चों को रैशेज हो जाते हैं। ऐसे में प्रभावित जगह पर अरंडी का तेल लगाया जा सकता है।

अच्छे बालों के लिए – बच्चों के सिर की इस तेल से मालिश करने पर बालों में प्राकृतिक चमक आ सकती है और साथ ही बाल तेजी से बढ़ सकते हैं।

गैस से राहत के लिए – अक्सर छोटे बच्चों को गैस बन जाती है, जिसे वह सहन नहीं कर पाते और रोना शुरू कर देते हैं। इस स्थिति में अरंडी के तेल को गुनगुना कर पेट पर लगाया जा सकता है, जिससे उन्हें राहत मिल सकती है।

नोट : बच्चे के लिए अरंडी के तेल के ये नुस्खे लगाने के लिए है, किसी भी बच्चे को अरंडी के तेल का सेवन न कराएं, ये हानिकारक हो सकता है । साथ ही ये नुस्खे 6 महीने से बड़े बच्चे के लिए है, किसी भी नवजात शिशु को अरंडी के तेल का उपयोग कराने से बचें।

अरंडी के तेल के नुकसान – 
कुछ मामलों में अरंडी का तेल हानिकारक साबित हो सकता है। अरंडी के बीजों में रिसिन नामक विषैला पदार्थ पाया जाता है। यह अगर शरीर के अंदर चला जाए, तो जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा, तेल निकालने के दौरान, अरंडी के बीजों को कीटनाशक दवाइयों या फिर केमिकल के जरिए पीसा जाता है। इस तरह से तेल की गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है और उसके नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। आइए, एक नजर डालते हैं कि इस तेल के किस-किस प्रकार से दुष्परिणाम हो सकते हैं 

उल्टी होना – तेल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी हो सकती है। अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। साथ ही ह्रदय संबंधी समस्या भी हो सकती है।

दस्त लगना – इस तेल में प्राकृतिक लैक्सटिव गुण होता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करने को लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर इसका ज्यादा सेवन कर लिया जाए, तो दस्त लग सकते हैं।

पेट में मरोड़ – अरंडी का तेल किस कदर जानलेवा साबित हो सकता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि 58 वर्षीय व्यक्ति ने कैस्टर बीन का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। इंजेक्शन का ओवरडोज लेते ही उसे उल्टियां शुरू हो गईं और पेट में मरोड़ पड़ने लगे। ऐसा इन बीजों में पाए जाने वाले रिसिन नामक विषैले तत्व के कारण हुआ ।

गर्भपात – गर्भावस्था के दौरान अरंडी के तेल का सेवन गर्भपात का जोखिम बढ़ा सकता है ।

अरंडी का तेल लेने से पहले सावधानियां
नीचे जानिए कुछ सावधानियां।
  • गर्भवती महिलाएं अरंडी के तेल के सेवन से बचें।
  • बच्चे के मुंह और गुप्तांगों में अरंडी का तेल न लगाएं।
  • बच्चे को हाथ-पैर में अरंडी का तेल लगाने के बाद ध्यान रखें कि वो हाथ मुंह में न लें।
  • अरंडी का तेल लगाने से पहले पैच टेस्ट करें।
  • जिनको कब्ज की गंभीर समस्या है वो इसका सेवन न करें।
  • जिनको किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या है या जो व्यक्ति दवा का सेवन कर रहे हैं, वो अरंडी के तेल का उपयोग डॉक्टरी परामर्श के बाद ही करें।
  • अगर किसी की सर्जरी होने वाली है तो वो अरंडी के तेल का उपयोग डॉक्टरी परामर्श के बाद ही करें।
  • एपेंडिसाइटिस (पेट में मौजूद अपेंडिक्स में सूजन या पस हो जाना) के मरीज अरंडी के तेल का उपयोग न करें।

अरंडी का तेल कहां से खरीदें?
नीचे जानिए अरंडी का तेल कहां-कहां से खरीदा जा सकता है।
  • अरंडी का तेल ऑनलाइन उपलब्ध है। आप चाहें तो यहां से खरीद सकते हैं।
  • बाजार में कॉस्मेटिक की दुकानों में भी अरंडी का तेल आसानी से मिल सकता है।
  • इसके अलावा, मेडिकल स्टोर में भी अरंडी का तेल आसानी से मिल सकता है।

आशा करते हैं कि इस लेख के जरिए अरंडी के तेल के फायदे जानने के बाद कई लोग इसे अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाह रहे होंगे। ऊपर बताए गए अरंडी के तेल के लाभ लेने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। ऐसे तो कैस्टर ऑयल का उपयोग करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसका उपयोग इसके नुकसानों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। वहीं, इसके उपयोग के दौरान किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव सामने आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

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