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हर्पीस के कारण, लक्षण और घरेलू टिप्स

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गंदगी और साफ-सफाई न रखने की स्थिति में त्वचा संबंधी समस्याओं का होना आम है, जो मुख्य रूप से संक्रमण (वायरल, बैक्टीरियल, फंगल और पैरासिटिक) के कारण हो सकती हैं। वहीं, त्वचा संबंधी कुछ समस्याएं ऐसी भी हैं, जिनका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं। उन्हीं में से एक हर्पीस है। इस समस्या में रोगी को असहनीय पीड़ा, दर्द और जलन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि  इस लेख में हम हर्पीस के कारण, लक्षण और इससे बचाव के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं। लेख में बताए जा रहे घरेलू उपाय हर्पीस की समस्या में कुछ हद तक राहत दिला सकते हैं। वहीं, अगर समस्या गंभीर हो, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाना चाहिए।

हर्पीस क्या है? – 
हर्पीस, वायरस के जरिए होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसमें मुख्य रूप से त्वचा प्रभावित होती है। जिस वायरस के कारण यह समस्या होती है, उसे हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) के नाम से जाना जाता है। इस समस्या के होने पर प्रभावित स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियों का समूह देखा जाता है। इन फुंसियों के कारण प्रभावित स्थान पर रोगी को खुजली, दर्द और जलन महसूस होती है, जो बाद में घाव का रूप ले लेती हैं। इस समस्या को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। एक है मौखिक हर्पीस यानी (हर्पीस टाइप-1)। वहीं, दूसरे को जननांग हर्पीस यानी (हर्पीस टाइप-2) का नाम दिया गया है। आइए, अब हम हर्पीस के दोनों भागों के बारे में भी जान लेते हैं

मौखिक हर्पीस- मौखिक हर्पीस में संक्रमण का असर मुख्य रूप से रोगी के मुंह के चारों ओर और चेहरे पर नजर आता है। वहीं, कुछ मामलों में इसके गले तक फैलने की भी आशंका रहती है।

 जननांग हर्पीस- हर्पीस के इस प्रकार में संक्रमण जननांग और उसके आसपास के क्षेत्र के साथ-साथ नितंब और गुदा क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है। 

नोट: बेशक, हर्पीस को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है, जिनके बारे में ऊपर बताया गया है, लेकिन कुछ मामलों में यह संक्रमण मुंह और जननांग के साथ-साथ आंख और शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है।

हर्पीस के कारण – 
हर्पीस होने का मुख्य कारण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस (एचएसवी) है, जिसके बारे में लेख के शुरुआत में बताया गया है। विशेषज्ञों की माने तो यह वायरस बंदरों की विभिन्न प्रजातियों से करोड़ों वर्ष पूर्व इंसानों में आया था । यह एक संक्रामक रोग है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित होता है। इसलिए, इसके स्थानांतरण की वजह को मुख्य रूप से इंसानों में हर्पीस के होने का कारण माना गया है । आइए, अब उन कारणों पर भी नजर डाल लेते हैं, जिनकी वजह से एक व्यक्ति से दूसरे में इस वायरस के फैलने की आशंका अधिक होती है।

1. मौखिक हर्पीस के कारण 
  • संक्रमित व्यक्ति का चुंबन (Kiss) लेना।
  • संक्रमित व्यक्ति का जूठा भोजन खाना।
  • संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई लिप क्रीम या बाम का इस्तेमाल करना।
  • जननांग हर्पीस से ग्रस्त व्यक्ति के साथ वैकल्पिक यौन संबंध बनाने से भी यह मौखिक हर्पीस के रूप में स्थानांतरित हो सकता है।
2. जननांग हर्पीस के कारण
संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध इसके होने का मुख्य कारण है, जिसमें असुरक्षित और वैकल्पिक यौन संबंध शामिल है।

हर्पीस के लक्षण – 
संक्रमित व्यक्ति में प्रभावित स्थान पर हर्पीस के लक्षण निम्न प्रकार से देखने को मिल सकते हैं, जो टाइप-1 और टाइप-2 हर्पीस दोनों के लिए एक जैसे ही हैं
  • प्रभावित स्थान पर जलन का होना।
  • प्रभावित स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियों का समूह या पानी से भरे दानों का दिखाई देना।
  •  प्रभावित स्थान पर खुजली होना।
  • गंभीर स्थिति में प्रभावित स्थान पर घाव का होना।
1. मौखिक हर्पीस के सांकेतिक लक्षण 
  •  होठों पर या मुंह के चारों ओर खुजली और जलन महसूस होना।
  •  मुंह के छाले।
  • बुखार आना।
  • गले की नसों में सूजन।
  •  निगलने में तकलीफ होना।
2. जननांग हर्पीस के सांकेतिक लक्षण
  • भूख कम लगना।
  • बुखार आना।
  • कमजोरी महसूस होना।
  • घुटने, कमर, कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों में दर्द व ऐंठन होना।
  • ग्रोइन एरिया यानी कमर और जांघों के बीच के हिस्से में सूजन का दिखना।
हर्पीस के लिए घरेलू उपाय – 

1. टी ट्री ऑयल
सामग्री :
  • टी टी ऑयल की दो से चार बूंदें (आवश्यकतानुसार)एक रूई का टुकड़ा
कैसे इस्तेमाल करें :
  • रूई के टुकड़े पर टी ट्री ऑयल की दो से चार बूंदें लें।
  • अब रूई की मदद से टी ट्री ऑयल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को आप दिन में करीब तीन बार दोहरा सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
हर्पीस के उपचार के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकता है। कारण यह है कि इसमें एंटीवायरल प्रभाव पाया जाता है। जैसे कि लेख में हम पहले भी बता चुके हैं कि यह एक वायरल संक्रमण है, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के कारण होता है। इसलिए, यह माना जा सकता है कि टी ट्री ऑयल का यह गुण हर्पीस वायरस के प्रभाव को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है

2. अजवायन का तेल 
सामग्री : 
  • दो से चार बूंद अजवायन का तेल
  • रूई का एक टुकड़ा 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • रूई के टुकड़े पर अजवायन के तेल की दो से चार बूंदें ंलें।
  • अब रूई की मदद से अजवायन के तेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  •  इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो से तीन बार तक दोहराया जा सकता है। 
कैसे है फायदेमंद :
अजवायन के तेल में कार्वाक्रोल  नाम का एक खास तत्व पाया जाता है, जिसके कारण यह तेल एंटीवायरल प्रभाव प्रदर्शित करता है । साथ ही कार्वाक्रोल के कारण इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) और एनाल्जेसिक (दर्दनिवारक) प्रभाव भी पाया जाता है । ये सभी प्रभाव संयुक्त रूप से इस समस्या में होने वाली सूजन और दर्द को नियंत्रित करने के साथ हर्पीस की समस्या से छुटकारा दिलाने में भी लाभकारी साबित हो सकते हैं। इस कारण यह कहा जा सकता है कि हर्पीस के उपचार के लिए अजवायन का तेल एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।

3. बेकिंग सोडा
  • सामग्री : 
  • एक चम्मच बेकिंग सोडा
  • दो से तीन चम्मच पानी
  • रूई का एक टुकड़ा 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर इसका घोल बना लें।
  • इस घोल को रूई की मदद से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन से चार बार दोहराया जा सकता है।
  • वहीं, जननांग हर्पीस में बाथ टब के पानी में करीब एक कप बेकिंग सोडा मिलाएं और उसमें करीब 10 से 15 मिनट तक बैठें। इस प्रक्रिया को दिन में दो बार अपनाना लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
बेकिंग सोडा में एंटीप्यूरेटिक प्रभाव पाया जाता है, जो त्वचा संबंधी कई समस्याओं जैसे खुजली और जलन को दूर करने में मदद कर सकता है। वहीं, मुंह के छालों में भी इसे फायदेमंद माना गया है, जिसका एक मुख्य कारण हर्पीस सिप्लेक्स वायरस (एचएसवी) भी है । इस कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि बेकिंग सोडा के उपयोग से हर्पीस की समस्या में कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है। ध्यान रहे, बेकिंग सोडा का त्वचा पर अधिक मात्रा में प्रयोग कुछ दुष्परिणाम भी प्रदर्शित कर सकता है। इसलिए, हर्पीस के उपचार के लिए इसका उपयोग बड़ी सावधानी से और संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। वहीं, बेहतर और सकारात्मक परिणाम के लिए डॉक्टरी परामर्श भी जरूरी है।

4. लेमन बाम 
सामग्री :
  • लेमन बाम ऑयल (एसेंशियल ऑयल) दो से तीन बूंद
  • एक रूई का टुकड़ा 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • रूई के टुकड़े पर लेमन बाम ऑयल की दो से तीन बूंदें ंलें।
  • रूई की मदद से तेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • जल्द प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो से तीन बार तक दोहराया जा सकता है। 
कैसे है फायदेमंद :
हर्पीस का इलाज करने के लिए लेमन बाम ऑयल को भी उपयोग में ला सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें एंटीवायरल गुण मौजूद होता है, जो हर्पीस के वायरस को नष्ट करने के साथ ही उसके प्रभाव को दूर करने में असरदार हो सकता है। इस कारण लेमन बाम से तैयार किए गए एसेंशियल ऑयल को हर्पीस की समस्या से निजात पाने का एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

5. एकीनेसिया 
सामग्री : 
  • एकीनेसिया टी बैग या इसका एक से दो सूखे फूल और तने का छोटा टुकड़ा।
  • एक कप गर्म पानी 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • सबसे पहले एक कप गर्म पानी लें।
  • बाद में इसमें एकीनेसिया टी बैग या इसके सूखे फूलों को 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • समय पूरा होने के बाद आप एकीनेसिया के टी बैग या फूलों को अलग कर लें।
  • अब आप तैयार हुई चाय को सिप करके पी सकते हैं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार दोहराया जा सकता है। 
नोट- ध्यान रहे, चाय बनाने के बाद एकीनेसिया टी बैग या इसके बचे फूलों को फेंके नहीं। इसके अर्क को अलग करके रूई की मदद से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। यह प्रक्रिया बाहरी रूप से हर्पीस के प्रभाव को दूर करने में सहायक साबित हो सकती है।

कैसे है फायदेमंद :
हर्पीस के घरेलू उपचार में एकीनेसिया को दोहरे तरीके से लाभदायक माना जाता है। दरअसल, अगर इसका चाय के रूप में सेवन करते हैं, तो यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार कर शरीर को हर्पीस के वायरल इफेक्ट से बचाने में मदद कर सकता है। वहीं, इसके अर्क में मौजूद एंटीवायरल गुण बाहरी तौर पर हर्पीस के प्रभाव को दूर कर इस समस्या से राहत दिलाने में सहयोग प्रदान कर सकता है  ऐसे में हर्पीस का इलाज करने के लिए एकीनेसिया को एक उत्तम उपाय के तौर पर देखा जा सकता है।

6. एप्सम साल्ट 
सामग्री : 
एक से आधा कप एप्सम साल्ट
गर्म पानी (आवश्यकतानुसार) 
कैसे है फायदेमंद ::
  • सबसे पहले आप बाथ टब में नहाने योग्य गर्म पानी भर लें और उसमें एक कप एप्सम साल्ट मिला दें।
  • अब इस पानी में करीब 10 से 15 मिनट तक बैठें।
  • बाद में सामान्य पानी से नहा लें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
नोट- अगर बाथ टब नहीं है, तो एक बाल्टी पानी में करीब आधा कप एप्सम साल्ट को मिलाकर इस पानी को नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे है फायदेमंद : 
विशेषज्ञों के मुताबिक, नमी की स्थिति में त्वचा पर बने घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में एप्सम साल्ट हर्पीस से प्रभावित त्वचा को सूखा रखने में मदद कर सकता है, जिससे घाव भरने की प्रक्रिया तेज हो जाती है । वहीं, इसमें एंटीकोवस्कुलेंट (नसों में दर्द को कम करने वाला), एंटीएनेस्थेटिक (सुन्न करने वाला) और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) प्रभाव भी पाए जाते हैं, जो संयुक्त रूप से हर्पीस की समस्या से पैदा होने वाली पीड़ा को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं । इस कारण यह माना जा सकता है कि हर्पीस के घरेलू उपचार में एप्सम साल्ट सहायक साबित हो सकता है।

7. एलोवेरा जेल 
सामग्री : 
  • ताजा एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार) 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • एलोवेरा की पत्ती से एलोवेरा जेल (पत्ती के बीच मौजूद गूदा) अलग कर लें।
  • अब पत्ती से अलग किए गए जेल (गूदे) को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और उसे ऐसे ही छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन बार दोहराया जा सकता है।
  • नोट- बाजार में उपलब्ध प्राकृतिक एलोवेरा जेल को भी उपयोग में लाया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
कई औषधीय गुणों की मौजूदगी के कारण एलोवेरा को सेहत और त्वचा से संबंधित कई समस्याओं के उपचार के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है, जिसमें हर्पीस का इलाज भी शामिल है। इसमें मौजूद हीलिंग (घाव भरने वाला), एंटीवायरल (वायरल इन्फेक्शन को कम करने वाला), मॉइस्चराइजिंग (त्वचा की नमी बनाए रखने वाला) प्रभाव पाया जाता है। ये सभी प्रभाव संयुक्त रूप से हर्पीस की समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं

8. जैतून का तेल 
सामग्री : 
  • एक कप जैतून का तेल
  • करीब 10 बूंद लैवेंडर ऑयल
  •  दो चम्मच बीजवैक्स (मधुमक्खियों द्वारा तैयार किया गया मोम)
  •  रूई का एक टुकड़ा
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • जैतून के तेल को गर्म करके इसमें करीब 10 बूंद लैवेंडर ऑयल और दो चम्मच बीजवैक्स मिला लें।
  • अब इस मिक्सचर को पांच से दस मिनट तक गर्म कर लें।
  • इसके बाद मिक्सचर को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें।
  • जब मिक्सचर सामान्य तापमान पर आ जाए, तो इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  •  इस मिक्सचर को दिन में करीब दो से तीन बार तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
हर्पीस की समस्या में जैतून के तेल का उपयोग फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, जैतून के तेल में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल दोनों ही गुण मौजूद होते हैं। वहीं, हम लेख में ऊपर बता चुके हैं कि हर्पीस एक प्रकार का वायरस इन्फेक्शन है। इस कारण यह माना जा सकता है कि जैतून के तेल में मौजूद एंटीवायरल गुण हर्पीस वायरस के प्रभाव को दूर करने में सहायक साबित हो सकते हैं। वहीं, इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण इस समस्या के कारण पैदा होने वाले प्रभावों जैसे जलन और चुभन को दूर करने में मदद कर सकता है । इसके अलावा, लैवेंडर ऑयल में दर्द और बीजवैक्स में खुजली से राहत दिलाने की क्षमता मौजूद होती है। यही कारण है कि जैतून के तेल का यह घरेलू उपाय हर्पीस की समस्या में रोगी को काफी हद तक राहत पहुंचाने का काम कर सकता है।

9. कॉर्नस्टार्च 
सामग्री : 
  • आधा चम्मच कॉर्नस्टार्च
  • करीब एक चम्मच पानी
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • कॉर्नस्टार्च में पानी मिलाकर उसका पेस्ट बना लें।
  • इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं और ऐसे ही छोड़ दें।
  • बेहतर प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया का दो से तीन घंटे के अंतराल पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
जानकारी के मुताबिक, कॉर्नस्टार्च का उपयोग हर्पीस के कारण बने घावों को सुखाने में मदद कर सकता है। साथ ही यह इस समस्या के कारण पैदा होने वाली खुजली से भी राहत दिलाता है इस कारण यह कहा जा सकता है कि हर्पीस का इलाज करने के लिए कॉर्नस्टार्च का उपयोग सकारात्मक परिणाम प्रदर्शित कर सकता है।

10. गोल्डनसील 
सामग्री : 
  • दो से तीन बूंद गोल्डन सील का अर्क
  • एक रूई का टुकड़ा
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • रूई के एक टुकड़े पर गोल्डन सील के अर्क की तीन बूंद डालें।
  • अब रूई की सहायता से गोल्डनसील के अर्क को प्रभावित क्षेत्र पर लगाकर छोड़ दें।
  •  इस प्रक्रिया को दिन में करीब तीन बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
एस्ट्रिंजेंट (त्वचा में तनाव पैदा करने वाला), एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला) जैसे प्रभावों के कारण गोल्डनसील को त्वचा और सेहत संबंधी कई समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इनमें हर्पीस की समस्या को भी शामिल किया गया है। हालांकि, यह औषधि इस समस्या में कितनी कारगर है, इस बारे में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह जरूर माना जाता है कि गोल्डनसील हर्पीस की समस्या के लक्षणों और प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित कर सकती हैं

11. हर्बल टी 
सामग्री : 
  • पांच से छह सेज पौधे की पत्तियां
  • पांच से छह थाइम पौधे की पत्तियां
  • एक कप गर्म पानी
कैसे इस्तेमाल करें : 

  • सेज और थाइम पौधे की पत्तियों को एक कप गर्म पानी में डालकर पांच से 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • अब तैयार हर्बल टी को छान लें और सिप करके पिएं।
  • इस चाय को दिन में करीब दो से तीन बार इस्तेमाल में ला सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :

सेज और थाइम दो ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनमें एंटीवायरल गुण मौजूद होता है। वहीं, हम लेख में पहले भी बता चुके हैं कि हर्पीस ऐसी समस्या है, जो हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के कारण होती है। ऐसे में सेज और थाइम में मौजूद एंटीवायरल गुण इस वायरस के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से इनकी पत्तियों से तैयार की गई चाय को हर्पीस वायरस के प्रभाव से राहत पाने में सहायक माना जा सकता है

12. ग्रीन टी 
सामग्री : 
  • ग्रीन टी बैग
  • एक कप गर्म पानी
  • आधा चम्मच शहद (वैकल्पिक)
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी बैग को डालकर पांच से 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
  •  समय पूरा होने के बाद आप इसमें स्वाद के लिए आधा चम्मच शहद मिलाकर सिप करके पी लें।
  •  एक दिन में करीब तीन से चार कप तक ग्रीन टी पी जा सकती है।
कैसे है फायदेमंद : 
ग्रीन टी के औषधीय गुणों पर किए गए एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि इसमें एंटीवायरल (वायरस के प्रभाव को नष्ट करने वाला) प्रभाव मौजूद होता है, जो हर्पीस की समस्या के मुख्य कारण हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, इसमें इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण भी पाया जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, जो हर्पीस वायरस के दिखने वाले प्रभावों को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है इस कारण यह माना जा सकता है कि हर्पीस की समस्या से राहत पाने में ग्रीन टी फायदेमंद साबित हो सकती है।

13. मुलेठी की जड़ 
सामग्री : 
  • आधा चम्मच मुलेठी की जड़ का चूर्ण
  • पानी (आवश्यकतानुसार) 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • मुलेठी की जड़ के चूर्ण में पानी मिलाकर इसका पेस्ट बना लें।
  • इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाकर 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें।
  •  समय पूरा होने पर इसे पानी से धो लें।
  •  इस प्रक्रिया को दिन में करीब दो बार तक दोहराया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
हर्पीस की समस्या में राहत पाने के लिए मुलेठी की जड़ को उपयोग में लाया जा सकता है। बताया जाता है कि इसमें एंटीमाइक्रोबियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला), एंटी इन्फ्लामेटरी (सूजन कम करने वाला) और एंटीवायरल (वायरस को नष्ट करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। ये सभी प्रभाव संयुक्त रूप से हर्पीस वायरस को नष्ट कर उसके प्रभावों, जैसे – त्वचा पर जलन, चुभन और घावों से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं
14. डेमेबोरो पाउडर 
सामग्री : 
  • डेमेबोरो पाउडर का एक छोटा पैकेट
  • पानी आवश्यकतानुसार
  • एक साफ सूती कपड़ा
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • डेमेबोरो पाउडर के पैकेट पर दिए गए तरीके के अनुसार इसे पानी में मिलाकर इसका घोल बना लें।
  •  इस घोल में सूती कपड़े को भिगोएं और प्रभावित क्षेत्र पर 10 से 15 मिनट तक रखें।
  •   बेहतर प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया को दो से तीन घंटे में दोहराया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
डेमेबोरो पाउडर को एक अच्छा एस्ट्रिंजेंट (त्वचा में कसाव पैदा करने वाला) प्रभाव पाया जाता है, जो आमतौर पर त्वचा पर खुजली और जलन जैसी समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डेमेबोरो पाउडर के इसी प्रभाव के कारण इसे हर्पीस की समस्या में भी लाभकारी माना जा सकता है (27)। यह त्वचा पर तेल की अधिकता को नियंत्रित कर प्रभावित क्षेत्र को सूखा रखने में मदद करता है, जिससे हर्पीस के कारण बने घाव जल्दी ठीक हो सकते हैं। साथ ही यह त्वचा पर हर्पीस के कारण होने वाली जलन और दर्द से राहत दिलाने में भी मदद कर सकता है।

15. लाइसिन 
सामग्री : 
  • लाइसिन कैप्सूल 
कैसे इस्तेमाल करें : 
  • दिन में करीब तीन बार 500 एमजी लाइसिन कैप्सूल का सेवन करें।
  • समस्या के पूरी तरह से खत्म होने तक आप इसका सेवन जारी रख सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्पीस की समस्या में लाइसिन कैप्सूल एक उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस के प्रभाव को कम करने की क्षमता के साथ यह उसे पूरी तरह से नष्ट करने में भी कारगर साबित हो सकता है । ध्यान रहे कि इसके नियमित इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी है, ताकि आपको इसके बेहतर लाभ हासिल हो सकें।

हर्पीस से बचाव – 
बचाव संबंधी मुख्य बातों को ध्यान में रखकर हर्पीस की समस्या से खुद को दूर रखा जा सकता है, जो निम्न प्रकार से हैं
  • घर से बाहर जाने से पहले जिंक ऑक्साइड से युक्त लिप बाम का प्रयोग करें।
  • होठों की नमी बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  • संक्रमित व्यक्ति से सीधे संपर्क में आने से बचें।
  • हर्पीस के घावों को सीधे छूने से बचें।
  • तौलिया या रूमाल उपयोग करने के बाद गर्म पानी में साफ करें।
  • मौखिक संक्रमण से ग्रस्त व्यक्ति के साथ कुछ भी खाने से बचें। साथ ही बर्तन, गिलास व स्ट्रा जैसी वस्तुओं को साथ में उपयोग न करें।
  • वहीं, जननांग संक्रमण से ग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से बचें।
शारीरिक संबंध के दौरान हमेशा लेटेक्स कंडोम का इस्तेमाल करें। अब तो आप हर्पीस की समस्या से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बातें जान चुके होंगे। साथ ही आपको हर्पीस के कारण क्या-क्या हो सकते हैं, इस बारे में भी पूरी जानकारी मिल गई होगी। वहीं, लेख में आपको इस समस्या से बचाव संबंधी कुछ सुझाव और इससे निजात दिलाने वाले घरेलू उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। ध्यान रहे, इन घरेलू उपायों के उपयोग से समस्या में राहत जरूर मिल सकती हैं, लेकिन ये उपाय हर्पीस का पूर्ण इलाज नहीं हैं। इसलिए, समस्या के पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टरी परामर्श जरूर लें। वहीं, इस विषय से जुड़ा कोई सवाल अगर आपके मन में हो, तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स के माध्यम से उसे हम तक पहुंचाएं। वैज्ञानिक प्रमाण के साथ हम आपके हर सवाल का मुमकिन जवाब देने का प्रयास करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोल्ड सोर और हर्पीस एक ही हैं?
हां, कोल्ड सोर की समस्या हर्पीस संक्रमण के कारण ही होती है, जिसे मौखिक हर्पीस के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, जननांग हर्पीस, हर्पीस संक्रमण का एक अन्य प्रकार है। इन दोनों ही स्थितियों के बारे में लेख में ऊपर विस्तार से बताया गया है 

हर्पीस के लक्षण क्या हैं?
संक्रमित व्यक्ति में प्रभावित स्थान पर मुख्य रूप से निम्न हर्पीस के लक्षण देखने को मिल सकते हैं, जो टाइप-1 और टाइप-2 हर्पीस दोनों के लिए एक जैसे ही है
  • प्रभावित स्थान पर जलन का होना।
  • प्रभावित स्थान पर छोटी-छोटी फुंसियों का समूह या पानी से भरे दानों का दिखाई देना।
  • प्रभावित स्थान पर खुजली होना।
  • गंभीर स्थिति में प्रभावित स्थान पर घाव का होना।
  • मौखिक संक्रमण में गले की नसों में सूजन।
  • मौखिक संक्रमण के कारण निगलने में तकलीफ का महसूस होना।
जननांग हर्पीस कैसा दिखता है?
संक्रमण के शुरुआती दौर में जननांग के हिस्सों में लाल ददोरे या चकत्ते दिखाई दे सकते हैं, जिन पर समय के साथ समूह में पानी से भरे दाने दिखाई देने लगते हैं। वहीं, कपड़ों की रगड़ और खुजली करने के कारण ये घाव में बदल जाते हैं, जिसमें अधिक दर्द और जलन होती है

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