कर्नलगंज-गोण्डा। विकास खण्ड हलधरमऊ के ग्राम कौड़हा जगदीशपुर में अंजुमन शैदाए हुसैन व अंजुमन ग़ुलामाने हुसैन के तत्वावधान में एक मुसालमा मनक़बती मुशायरा आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ख्याति लब्ध शायर नायाब हल्लौरी रहे। वरिष्ठ शायर मुजीब सिद्दीक़ी की अध्यक्षता में संचालन युवा शायर शरफ उतरौलवी ने किया। अध्यक्षीय संबोधन में मुजीब सिद्दीकी ने कहा कर्बला पर आँखों में आँसू आना स्वाभाविक है, क्योंकि गम पर दुखी होना इंसान की फितरत है।अतिथि नायाब हल्लौरी ने कार्यक्रम के लिए दोनों अंजुमनों की सराहना की। याकूब सिद्दीकी श्अज़्म गोंडवीश् की नात से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। शायरों ने इमाम हुसैन व शहीदाने कर्बला की शान में कलाम पेश किए।
नायाब हल्लौरी का यह शेर खूब सराहा गया -
नायाब हम को हुर मिला और उन को हुरमुला, नज़रों के हेर फेर ने इमला बना दिया।
अध्यक्षता कर रहे मुजीब सिद्दीकी ने कहा -
कहा जो भाई को आका बता गए अब्बास, मकामे अज़मते औलादे फातिमा क्या है।
मेहमान शायर इरम बनारसी ने कर्बला के परिप्रेक्ष्य में कहा -
सितम का तीर थरराता है खंजर कांप जाता है, बहत्तर लोग से लाखों का लश्कर कांप जाता है।
अनीस खां आरिफी ने हज़रत इमाम हुसैन की अज़मत पर कहा-
ज़मीने कर्बला बढ़ कर लिपट जा पाए सरवर से, तुझे जन्नत बना देंगे ये अपनी एक ठोकर से।
मुन्तज़िर जौनपुरी ने समर्पित किया -
पानी मेरे होठों के करीब आता है जब भी, आती है सदा दिल से इजाज़त है सकीना।
साथ ही सगीर सिद्दीकी, याकूब श्अज़्मश् गोंडवी, कासिम गोण्डवी, साबिर अली गुड्डू, शरफ उतरौलवी और मुहम्मद इरफ़ान ने कलाम पेश किए। इस अवसर पर सऊद खां, इमाम बख़्श, सईद खां, हाफ़िज़ अब्दुल करीम, जावेद खां, मारूफ खां, अंसार खां, रुखसार खां, रहबर हुसैन, इरशाद खां, तौसीफ, आमिर, शाह हुसैन,अदीबुल हसन, मुस्तकीम, मसूद आलम सहित अन्य उपस्थित रहे।

