माइक्रोवेव ओवेन को हिन्दी में सूक्ष्म तरंग चूल्हा कहते हैं। नये जमाने के दिनों-दिन बढ़ते फैशन, सुख-सुविधा को ध्यान में रखकर संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक पर्सी स्पेन्सर ने सन् 1947 ई० में माइक्रोवेव ओवेन का आविष्कार किया। इसके मार्केट में आते ही जबरदस्त मांग बढ़ी और इसका चलन दुनिया के हर देश में अब हो चुका है।
सूक्ष्मतरंग चूल्हा या माइक्रोवेव ओवन एक रसोईघर उपकरण है जोकि खाना पकाने और खाने को गर्म करने के काम आता है। इस कार्य के लिए चूल्हा द्विविद्युतीय (dielectric) उष्मा का प्रयोग करता है। यह खाने के भीतर उपस्थित पानी और अन्य ध्रुवीय अणुओं को सूक्ष्मतरंग विकिरण का उपयोग करके गर्म करता है। यह गर्मी पूरे भोजन में काफी हद तक समान रूप से फैलती है (मोटी वस्तुओं को छोड़कर)। यह सुविधा किसी भी अन्य उष्मीय तकनीक में उपलब्ध नहीं होती है। मैग्नेटॉन इसका मुख्य अवयव है जो सूक्ष्म तरंगे पैदा करता है।
सूक्ष्म तरंग चूल्हा खाने को जल्दी, कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से गर्म करता है लेकिन एक पारंपरिक तंदूर की तरह भोजन को भूनता या सेंकता नहीं है। इस कारण यह कुछ खाद्य पदार्थों को पकाने या कुछ प्रभावों को प्राप्त करने के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। सूक्ष्म तरंग चूल्हे में खाना पकाना कई सुरक्षा मुद्दों से जुड़ा है, जैसे चूल्हे के बाहर सूक्ष्म तरंग विकिरण का रिसाव और आग का खतरा क्योंकि यह उच्च तापमान का प्रयोग करता है। एक प्रमुख दृष्टिकोण है कि यह भोजन की गुणवत्ता को घटाता है। शायद इसका प्रमुख कारण इसके साथ जुड़ा शब्द विकिरण है लेकिन वास्तव में इसमें पका खाना उतना ही सुरक्षित होता है जितना किसी अन्य स्रोत से पका हुआ।
सूक्ष्म तरंग चूल्हे ने भोजन तैयार करने में क्रान्तिकारी परिवर्तन किया है और आज यह हर घर की आवश्यकता बन गये हैं।

