गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।

गोण्डा-डीएम,सीडीओ का आदेश ब्लाॅक कर्मियों के सामने बौना

command-block-personnel


-स्वयं सहायता समूह के रोजगार व जीवकोपार्जन हेतु बनाई गई दुकानों पर अवैध कब्जा1
गोण्डा।  स्वयं सहायता समूह के रोजगार व जीवकोपार्जन हेतु बनाई गई दुकानें स्वयं सहायता समूह को न देकर अपने-अपने चहेतों सहित अन्य लोगों को देकर 40 से 50000 रुपए प्रत्येक दुकान लिए जाने का मामला प्रकाश मे आने पर पूर्व प्रकाशित खबर को जिलाधिकारी मार्कडेय शाही व मुख्य विकास अधिकारी ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन बीडीओ को आदेशित किया कि अवैध कब्जा हटवाते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाय परंतु संबन्धित कर्मियों द्वारा करीब 05 माह से एक दूसरे के पास पत्रावली होना बताकर टाल-मटोल करते हुए अवैध कब्जे धारकों को बचाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। विकास खण्ड झंझरी कार्यालय से सटे करीब एक से डेढ़ दर्जन दुकानें स्वयं सहायता समूह के जीवकोपार्जन व रोजगार हेतु निर्माण कराया गया था परंतु उस पर ब्लाक कर्मियों के सह पर अन्य लोगों द्वारा अपना-अपना स्वामित्व स्थपित कर कब्जा जमाया गया है। आस पास के लोगों में की जा रही चर्चाओं की पुष्टि करने पर दुकानदार ने स्वीकार किया कि हमने दुकान के बदले 40 से 50000 रुपए दिए हैं जबकि हमें कोई रसीद नही मिला है। जब पूंछा गया कि रुपए आपने किसको दिया तब दुकानदारों ने रुपए लेने वाले का नाम उजागर करते हुए कहा कि यदि आप लोग उनका नाम उजागर कर देंगे तो हम दुकान भी नही करने पाएंगे और दिया हुआ रुपया भी डूब जाएगा। मामले की जानकारी लेने पर एडीओ आईएसबी आनन्द श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबन्ध में जिलाधिकारी द्वारा बीडीओ के पास दो दिन पहले पत्र भेजा गया है एक-दो दिन में कार्यवाही की जाएगी। तत्पश्चात जानकारी लेने पर प्रभारी बी.डी.ओ. बीर बहादुर यादव ने कहा कि कार्यवाही की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी द्वारा करीब 05 महीने पहले दिए गए आदेश के बावजूद ब्लाॅक कर्मियों द्वारा किस लगाव व दबाव के चलते सरकारी दुकानों पर हुए अवैध कब्जा को हटवाने में आना-कानी की जा रही है जो जांच का विषय है।


”go"