-स्वयं सहायता समूह के रोजगार व जीवकोपार्जन हेतु बनाई गई दुकानों पर अवैध कब्जा1
गोण्डा। स्वयं सहायता समूह के रोजगार व जीवकोपार्जन हेतु बनाई गई दुकानें स्वयं सहायता समूह को न देकर अपने-अपने चहेतों सहित अन्य लोगों को देकर 40 से 50000 रुपए प्रत्येक दुकान लिए जाने का मामला प्रकाश मे आने पर पूर्व प्रकाशित खबर को जिलाधिकारी मार्कडेय शाही व मुख्य विकास अधिकारी ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन बीडीओ को आदेशित किया कि अवैध कब्जा हटवाते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाय परंतु संबन्धित कर्मियों द्वारा करीब 05 माह से एक दूसरे के पास पत्रावली होना बताकर टाल-मटोल करते हुए अवैध कब्जे धारकों को बचाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। विकास खण्ड झंझरी कार्यालय से सटे करीब एक से डेढ़ दर्जन दुकानें स्वयं सहायता समूह के जीवकोपार्जन व रोजगार हेतु निर्माण कराया गया था परंतु उस पर ब्लाक कर्मियों के सह पर अन्य लोगों द्वारा अपना-अपना स्वामित्व स्थपित कर कब्जा जमाया गया है। आस पास के लोगों में की जा रही चर्चाओं की पुष्टि करने पर दुकानदार ने स्वीकार किया कि हमने दुकान के बदले 40 से 50000 रुपए दिए हैं जबकि हमें कोई रसीद नही मिला है। जब पूंछा गया कि रुपए आपने किसको दिया तब दुकानदारों ने रुपए लेने वाले का नाम उजागर करते हुए कहा कि यदि आप लोग उनका नाम उजागर कर देंगे तो हम दुकान भी नही करने पाएंगे और दिया हुआ रुपया भी डूब जाएगा। मामले की जानकारी लेने पर एडीओ आईएसबी आनन्द श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबन्ध में जिलाधिकारी द्वारा बीडीओ के पास दो दिन पहले पत्र भेजा गया है एक-दो दिन में कार्यवाही की जाएगी। तत्पश्चात जानकारी लेने पर प्रभारी बी.डी.ओ. बीर बहादुर यादव ने कहा कि कार्यवाही की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी द्वारा करीब 05 महीने पहले दिए गए आदेश के बावजूद ब्लाॅक कर्मियों द्वारा किस लगाव व दबाव के चलते सरकारी दुकानों पर हुए अवैध कब्जा को हटवाने में आना-कानी की जा रही है जो जांच का विषय है।

