हृदय रोग आज के समय की सबसे बड़ी बीमारियों में से एक बनती जा रही है। हृदय रोगों से आज के समय में बच्चे, बूढ़े युवा सभी परेशान है। हृदय रोग एक जानलेवा बीमारी भी है अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाये तो इससे जान का खतरा भी हो सकता है। इसमें से हार्ट अटैक जैसी बीमारी के बारे में तो अचानक ही पता पड़ता है। और हार्ट अटैक और हार्ट फ़ैल में व्यक्ति के बचने की सम्भावना बहुत ही कम होती है।
हृदय रोगों को पूर्ण रूप से ख़त्म करना तो मुश्किल है लेकिन इन पर नियंत्रण पाना संभव है। हृदय रोगों से बचने के कई उपाय हैं जिनसे आप स्वस्थ रह सकते हैं। हृदय रोग से सभी बचना चाहते हैं एवं कोई नहीं चाहता कि वह हृदय रोग का शिकार हो। अगर आप पहले से ही हृदय रोग का शिकार हो चुके हैं तो इसको भी नियंत्रित करना संभव है। लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि पूर्ण रूप से इन बीमारियों से निजात मिल जाये तो मुश्किल है तो यह मुश्किल है। हृदय रोग में भी कई बीमारियाँ जटिल होती है जिनको सर्जरी के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है लेकिन इसमें भी कई बार जान का खतरा होता है।
हृदय रोग से बचने के उपाय-
हृदय रोगों से बचने का कई उपाय हैं जैसे:
पानी अधिक पिएं-
जैसा कि हम जानते हैं हृदय रोगों का बहुत बड़ा कारण मोटापा होता है। और किडनी में विकार के कारण भी हृदय रोग होना संभव है। लेकिन अगर आप पानी अधिक पिएं तो यह परेशानी दूर हो सकती है। वैसे भी व्यक्ति को कम से कम 3-4 लीटर पानी दिन में पीना चाहिए। ज्यादा नहीं तो कम से कम इतना पानी आप जरूर पिएं। पानी पीने से हृदय रोग तो नष्ट और नियंत्रित होते ही हैं साथ ही कई रोगों से मुक्ति मिलती है।
रोज टहलना-
हृदय रोग से बचने के लिए रोजाना व्यायाम की सलाह सभी डॉक्टर देते हैं लेकिन अगर आप व्यायाम करने में सक्षम नहीं हैं तो आप रोज टहलें जरूर।तात्पर्य है कि कम से कम 30 मिनिट के लिए आप टहलें। सुबह उठने के बाद एवं शाम को खाना खाने के बाद टहलें। इस प्रकार आप आसानी से अपनी कई बीमारियों को नियंत्रित कर पाएंगे। हृदय रोगों को दूर करने का यह आसान और अच्छा उपाय है।
जूस पिएं-
रोजाना फलों का जूस जरूर पिएं। क्योंकि हृदय रोगों से बचने के लिए शरीर में पर्याप्त रक्त होना आवश्यक है जो धमनियों तक पहुँच सके। इसलिए रोज किसी नहीं किसी फल का जूस जरूर पिएं। आप फलों के जूस की जगह फलों का सेवन भी कर सकते हैं। लेकिन शाम के बाद फल नहीं खायें नहीं ही जूस पिएं। इसका सेवन आप व्यायाम के बाद या व्यायाम के 30 मिनिट पहले ही करें।
हरी सब्जियों का सेवन-
किसी भी रोग से बचने के लिये हरी सब्जियों का सेवन सबसे अच्छा उपाय होता है। अगर हृदय रोगों से भी बचना है तो ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियाँ खायें या इनका सूप या सूप बनाकर पिएं। हरी सब्जियों में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं| हरी सब्जियों में लौकी, गिलकी, पत्तेदार हरी सब्जियाँ इत्यादि खायें। यह हृदय रोगों के साथ ही साथ कई प्रकार के रोगों से मुक्ति दिलाते हैं।
व्यायाम करें-
व्यायाम शरीर के लिये बहुत ही जरूरी होता है। अगर रोजाना व्यायाम किया जाये तो शरीर कम बीमार होगा| हृदय रोग जैसी बीमारियाँ शरीर को नहीं लगेंगी। लेकिन अगर आपको हृदय रोग हो चुका है तो उसके लिये आप कम भागदौड़ वाले व्यायाम करें जैसे योग इत्यादि। व्यायाम सेहत के लिये बहुत ही जरूरी होता है। अगर स्वास्थ्य सही रहेगा तो आप सभी कार्य करने में सक्षम हो जायेंगे। इसलिए व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
क्या हृदय रोग अनुवांशिक होते हैं-
यह सबाल कई लोगों के मन में उठता है कि क्या हृदय रोग अनुवांशिक हो सकते हैं। हाँ ऐसा होता है। कई हृदय रोग जन्मजात और अनुवांशिक हो सकते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि किसी के पिता को हृदय रोग है तो उसके बेटे को भी वही हृदय रोग हो, हो सकता है उस परिवार के किसी अन्य सदस्यमें वह हृदय रोग पाया जाये।एक परिवार के लोगों में अगली पीढ़ी में किसी को वह हृदय रोग होने की सम्भावना होती है।
तो ऐसा बिल्कुल संभव है कि हृदय रोग अनुवांशिक हो| ऐसा सिर्फ हृदय रोगों के साथ ही नहीं कई रोगों के साथ होता है कि रोग अनुवांशिक हो जैसे मोटापा, बबासीर, अस्थमा, मधुमेह, कैंसर, लकुआ इत्यादि। ये सभी और कई और रोग अनुवांशिक होते हैं लेकिन इन्हें रोकना संभव है। जो उपाय बताये गए हैं इन रोगों को रोकने कर लिये उन उपाय का सहारा लें।
क्या अस्थमा हृदय रोगों का कारण होता है-
ऐसा नहीं है कि अगर किसी को अस्थमा है तो उसे हृदय रोग होगा ही होगा| हृदय रोग के लक्षण में एक लक्षण यह भी होता है कि अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। हो सकता है उसे अस्थमा का रोग भी हो और उसे हृदय रोग होना भी संभव है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा है तो उसे हृदय रोग भी होगा।
अस्थमा और हृदय रोगों कर लक्षण कुछ हद तक समान होते हैं लेकिन इसकी जाँच करवाकर ही पता चलना संभव है कि आखिर यह रोग क्या है। अस्थमा या हृदय रोग।
हृदय रोगों की मुख्य वजह क्या हैं-
हृदय रोगों की कई वजह होती हैं जैसे हमने देखा कि हृदय रोग अनुवांशिक भी हो सकता है। ऐसे ही कई और भी वजह है जो हृदय रोग का कारण हैं:
मधुमेह-
मधुमेह भी हृदय रोग का एक कारण होता है। अगर किसी व्यक्ति को मधुमेह है तो उसमें हृदय रोग होने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है। हृदय रोग मधुमेह का कारण भी होते हैं। इसलिए मधुमेह के मरीजों को स्वयं का बहुत ध्यान रखना चाहिए जिससे उन्हें मधुमेह से भी राहत मिले और हृदय रोगों पर भी नियंत्रण हो सके।
मोटापा-
मोटापा जहाँ कई बिमारियों की वजह है वहीं मोटापा हृदय रोगों का कारण भी है| शरीर में अत्यधिक वसा होने के कारण हृदय की धमनियों में अवरोध उत्पन्न होता है। इसी अवरोध के कारण हृदय में ठीक प्रकार से ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और ब्लॉकेज सम्बंदित रोग हो जाते हैं। मोटापा हृदय रोग के साथ ही साथ कई रोगों की वजह है।
एलर्जी-
कई बार जब व्यक्ति को धूल या धुएँ से एलर्जी होती है तो उसे सर्दी, जुखाम बहुत जल्दी होता है। सर्दी जुकाम की वजह से व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। कई बार व्यक्ति को सर्दी जुकाम के बिना भी सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कई बार हृदय रोग की वजह यह भी होती है।
असंतुलित खाना-
व्यक्ति को हमेशा पौष्टिक आहार लेना चाहिए| कई बार थोड़े से स्वाद के लालच में हम अपनी सेहत ख़राब कर लेते हैं। संतुलित आहार में व्यक्ति को सलाद, हरी सब्जियाँ, दूध, दही, जूस, सूप और फल सभी कुछ खाना चाहिए। इनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है साथ ही कई रोगों से मुक्ति भी मिलती है। संतुलित आहार सेहत के लिये बहुत जरूरी है।
दिनचर्या-
आज कर समय में लोगों के पास समय की बहुत कमी है। न ही लोगों के पास सोने का समय है न ही ठीक से खाने का। इस प्रकार की दिनचर्या से व्यक्ति के जीवन पर बहुत गलत प्रभाव पड़ रहा है| जब समय पर सोना, उठना और खाना नहीं होगा तो कैसे व्यक्ति स्वस्थ रह पायेगा। इसलिए यह भी हृदय रोगों और कई रोगों का बहुत बड़ा कारण है इसलिए हमेशा अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें।
हृदय रोगों की ये मुख्य वजह हो सकती हैं। इन वजहों को समझ कर हृदय रोगों से स्वयं को बचाया जा सकता है। इसलिए इन वजहों पर विशेष ध्यान दें और अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें।
आयुर्वेद से हृदय रोगों का इलाज संभव है-
आयुर्वेद से हृदय रोगों पर नियंत्रण संभव है लेकिन दिल में छेद होने और ब्लॉकेज की स्थिति में आयुर्वेदिक इलाज थोड़ा कठिन है। आयुर्वेदिक में इसका लम्बा इलाज होता है लेकिन जटिल परिस्थितियों में इनके लिये सर्जरी ही आखिरी विकल्प होता है। आयुर्वेदिक इलाज से अन्य हृदय रोगों को रोकना संभव है और इसके परिणाम भी बहुत उम्दा है।
जब किसी भी रोग की आयुर्वेदिक दवा करवाते हैं तो उसके कुछ नियम होते हैं। आयुर्वेदिक में दवाओं के साथ परहेज करना पड़ता है तब ही आयुर्वेद दवाएँ अपना असर दिखाती हैं| लेकिन आयुर्वेदिक से किसी भी रोग को जड़ से मिटाना संभव है फिर वह हृदय रोग ही क्यों नहीं हो।
हृदय रोगों का पता कितने समय पहले चल जाता है-
हृदय रोग भी अलग- अलग प्रकार के होते हैं। कुछ जन्मजात हृदय रोग होते हैं जिनका पता बचपन में ही चल जाता है। कुछ का पता युवावस्था में चलता है और कुछ का पता तुरंत ही चलता है, और कुछ ह्रदय रोग बुढ़ापे के साथ आते हैं। तुरंत पता चलने वाले ह्रदय रोग हैं हार्ट अटैक, हार्ट फ़ैल। इन रोगों के होने के दौरान व्यक्ति को कुछ भी समझने का समय नहीं मिलता इसलिए अधिकतर मृत्यु हृदय रोगों में हार्ट अटैक या हार्ट फ़ैल के कारण ही होती हैं। और अन्य हृदय रोगों में तो व्यक्ति को सम्हालने का समय मिलता है लेकिन कुछ हृदय रोगों में व्यक्ति को सोचने और समझने का मौका ही नहीं मिलता।
किसी भी रोग से बचने के लिये स्वयं को ही सचेत रहना होता है इसलिए स्वयं में परिवर्तन लायें और हृदय रोग जैसी बिमारियों से बचने का प्रयास करें। कुछ बीमारियाँ रोकना हमारे बस में नहीं है जैसे अटैक उसके लिये आप डॉक्टर और इलाज का सहारा लें।





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