फ्लू का सीजन अक्टूबर और नवंबर में शुरू होता है। जिसके लिए आपको तैयार हो जाना चाहिए। क्योंकि इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। जिसके कारण लोगों को काफी दिक्कत होती है। इसके लिए कई लोग वैक्सीन भी लगवाते हैं। आइए आपको बताते हैं की क्या हैं सीजनल फ्लू के लक्षण, किन्हें होता है ज्यादा खतरा और कैसे कर सकते हैं इससे बचाव।
किन्हें होता है सबसे ज्यादा फ्लू का खतरा
फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों और बुजुर्गों में होता है। बच्चों में फ्लू से बचाव के लिए उनका वैक्सिनेसन यानी टीकाकरण बहुत जरूरी है। ये वैक्सीन बच्चों को सितंबर के अंत में या अक्टूबर की शुरुआत में लगवाने चाहिए। दरअसल वैक्सीन लगाने के 4 सप्ताह बाद शरीर का इम्यून सिस्टम फ्लू के प्रति रक्षात्मक हो पाता है। इसलिए फ्लू का सीजन शुरू होने से कम से कम एक महीने पहले ही बच्चों को फ्लू का इंजेक्शन लगवा देना चाहिए, ताकि इसका खतरा उन्हें न रहे।
क्या है लक्षण
फ्लू होने के कारण है जुकाम और बुखार को लोग सीजन बदलने की वजह से आम परेशानी समझ लेते हैं लेकिन कई बार ये फ्लू के वायरस के कारण हो सकता है, जिसमें सामान्य दवाएं आपके शरीर में वायरस को बढ़ा सकती हैं। बुखार, कंपकपी, नाक बहना, सिरदर्द, मांसपेशियों में पीड़ा और शारीरिक दर्द, सूखी खांसी और उल्टी, असामान्य थकावट, भूख में कमी, पेट या छाती पर दबाव महसूस करना।
खानपान पर दें ध्यान
सही खानपान से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हमारे इम्यून-सिस्टम का 30-40 प्रतिशत हिस्सा खानपान और पाचन पर ही निर्भर करता है। दही जैसे प्रोबायोटिक्स की दैनिक खुराक शुगर, मीट, दवाओं और तले-भुने भोजन की वजह से शरीर में होने वाले कुदरती असंतुलन को ठीक करती है। दिन में पांच फल या सब्जी खाने का नियम बनाइये। अपनी खाने की थाली को रंगबिरंगी बनाएं, जितने ज्यादा रंग, उतना ही पौष्टिक खाना।

