गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।

यह वह 10 म‌ंद‌िर जिनका पांडवों से है विशेष संबंध

आज हम आपको उन 10 प्राचीन मंदिरों के बारे में बता रहे है जिनका पांडवो से खास संबंध रहा है।

1. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में खनियारा स्थित प्राचीन ऐतिहासिक अघंजर महादेव मंदिर। पांडु पुत्र अर्जुन ने महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन पर इस स्थान पर बाबा भोले की तपस्या कर उनसे एक अस्त्र प्राप्त किया था।
Image SEO Friendly

2. भद्रकाली मंदिर में अर्जुन ने महाभारत के युद्ध से पहले पूजा-अर्चना की थी। ये मंदिर भी कुरुक्षेत्र के शक्तिपीठों में गिना जाता है।
Image SEO Friendly

3. बाराबंकी में रामनगर तहसील में स्थित पांडव कालीन लोधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान की थी। पूरे देश से लाखो श्रद्धालू यहाँ कावर लेकर शिवरात्रि से पूर्व पहुंचकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं।
Image SEO Friendly

4. ममलेश्वर महादेव मंदिर जो की हिमाचल प्रदेश की करसोग घाटी के ममेल गांव में स्थित है। ये मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस मंदिर का संबंध पांडवो से भी है क्योंकि पांडवो ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इसी गांव में बिताया था।
Image SEO Friendly

5. मुक्तेश्वर मंद‌िर यहां भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान और नंदी जी भी विराजमान हैं। भगवान शिव के इस मंदिर में ऐसा विश्वास है कि यहां देवी और राक्षस के बीच युद्ध हुआ था।
Image SEO Friendly

6. इसके अलावा स्‍थानेश्वर मंद‌िर भगवान शिव का मंदिर है। कुरुक्षेत्र में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में पाण्डवों और भगवान कृष्ण नें युद्ध से पहले पूजा-अर्चना की थी। ऐसी मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव यहाँ वास करते हैं और ‘महाशिवरात्रि’ की रात को तांडव करते हैं।
Image SEO Friendly

7. ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पाँण्डवों ने किया था। यहां राजा पांडु को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसके अलावा ऐसी मान्यता भी है कि इस स्थान पर नकुल और सहदेव दोनों का जन्म हुआ था।
Image SEO Friendly

8. कटासराज, पाक‌िस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। ये प्राचीन मंदिर शिव जी को समर्पित है। माँ पार्वती सती हुई तो भगवान शिव की आँखों से दो आंसू टपके जिसमें से एक कटास पर गिरा था। महाभारत काल में पांडवों ने इन्हीं पहाड़ियों में अज्ञातवास किया। यहां स्‍थ‌ित कुण्ड में पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे।
Image SEO Friendly

9. बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में स्‍थ‌ित है। यहां महाभारत के युद्ध के बाद पांडव रुठे महादेव को मनाने पहुंचे थे। भैस बने महादेव को जब भीम ने पकड़ ल‌िया तो भैंस के पीठ के आकार में यहां श‌िवल‌िंग प्रकट हो गया। बाद में शंकराचार्य ने केदारनाथ को प्रत‌िष्ठ‌ित क‌िया।
Image SEO Friendly

10. ऐसी मान्यता है क‌ि जब पांडवों ने अपना राजपाट राजा परीक्ष‌ित को सौंप द‌िया तीर्थयात्रा पर न‌िकले तो उस दौरान वह केरल आए थे। केरल के पंच पांडव मंद‌िर के बारे में कथा है क‌ि तीर्थयात्रा के दौरान पांडवों ने इन मंद‌िरों का मिर्माण क‌िया था।
Image SEO Friendly

”go"