बिगड़ी हुई दिनचर्या और अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कई तरह के रोगों की वजह बन जाती है। ऐसा ही एक रोग है, घेंघा। अपने नियमित खान-पान पर ध्यान न देने और समय-समय पर संपूर्ण शरीर का चेकअप न करवाने के कारण हम कई बार घेंघा रोग की चपेट में आ जाते हैं। वैसे तो आपने अक्सर गोइटर व घेंघा के बारे में सुना जरूर होगा, लेकिन क्या आप सच में जानते हैं कि घेंघा रोग क्या है और घेंघा के लक्षण व कारण क्या-क्या बन सकते हैं। शायद नहीं! इसलिए, हम स्टाइक्रेज के इस लेख में घेंघा रोग से संबंधित पूरी जानकारी देंगे। साथ ही घेंघा के लिए घरेलू उपाय क्या हो सकते हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे।
घेंघा क्या है? –
घेंघा गले से संबंधित रोग है। इस दौरान आपके गले में थायराइड ग्रंथि (ग्लैंड) बढ़ जाती है, जिस वजह से सूजन होने लगती है। थायराइड में हुई सूजन के कारण श्वसन नली और अन्नप्रणाली पर दबाव पड़ने लगता है। इस वजह से खांसी, गले में घरघराहट, सांस लेने में कठिनाई या खाना व पानी निगलने में कठिनाई हो होती है। दरअसल, आयोडीन की कमी होने की वजह से थायराइड हार्मोन आयोडीन की मात्रा पूरी करने के लिए बढ़ने लगता है, परिणामस्वरूप गले में सूजन हो जाती है। इसके अलावा थायराइड हार्मोन की कमी और अधिकता भी ग्रंथि में सूजन उत्पन्न कर सकती है । घेंघा को गलगंड के नाम से भी जाना जाता है। इसे इंग्लिश में गोइटर (Goiter) कहते हैं। गोइटर व घेंघा होने का सबसे आम कारण आयोडीन की कमी है।
घेंघा के प्रकार –
घेंघा या गोइटर के प्रकार कई हैं। हम नीचे आपको इसके कुछ आम प्रकार के बारे में बता रहे हैं ।
साधारण घेंघा (सिंपल गोइटर)– जैसे कि आप नाम से ही जान गए होंगे कि यह एक साधारण किस्म का गोइटर है। यह घेंघा रोग थायराइड ग्रंथि के बढ़ने और आयोडीन की कमी के कारण ही होता है। यह किसी तरह का ट्यूमर या कैंसर नहीं होता है।
डिफ्यूज टॉक्सिक गोइटर (Diffuse toxic goiter) – डिफ्यूज टॉक्सिक गोइटर थायराइड ग्रंथि की एक आम बीमारी है। बुजुर्ग व्यक्तियों में यह रोग अक्सर देखा जाता है। इस दौरान थायराइड ग्लैंड में काफी इजाफा होता है और अवसाद व हृदय संबंधी विकार जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। इसलिए, थायरोस्टैटिक (थायराइड हार्मोन उत्पादन संबंधी) उपचार इस घेंघा के प्रकार में काम नहीं करते। ऐसे में डॉक्टर सर्जरी का सुझाव दे सकते हैं। डिफ्यूज टॉक्सिक गोइटर रोगियों को जीवन भर दवा लेने के साथ ही इसको लेकर सतर्क रहना पड़ता है, क्योंकि कभी भी इसकी वजह से आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है।
नॉन टॉक्सिक गोइटर (Nontoxic goiter)- यह घेंघा आयोडीन की आपूर्ति व चयापचय की असामान्यताओं की वजह से होता है। इस घेंघा रोग का कारण सूजन या नियोप्लासिया (कोशिकाओं में वृद्धि/ट्यूमर) नहीं होता। घेंघा के इस प्रकार में भी थायराइड ग्रंथि में वृद्धि होती है, लेकिन इस वृद्धि के कारण थायराइड के कार्य में किसी तरह का असर नहीं होता।
टॉक्सिक नोड्यूलर गोइटर (Toxic nodular goiter) – इस तरह के घेंघा की शुरुआत साधारण घेंघा रोग से होती है। यह घेंघा 55 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाओं को अधिकतर होता है। इस घेंघा रोग में भी आपकी थायराइड ग्रंथि में वृद्धि होती है। इस दौरान ग्लैंड का आकार बढ़ने के बाद वहां नोड्यूल्स (गांठ) बनने लग जाती हैं। नोड्यूल्स बनने के बाद यह अधिक थायराइड हार्मोन का उत्पादन करने लगते हैं।
घेंघा के कारण –
घेंघा क्या है यह तो आप जान चुके हैं। अब आपको इसकी रोकथाम के लिए घेंघा के कारण जानना भी जरूरी है। नीचे हम आपको घेंघा के कारण बता रहे हैं ।
- आयोडीन की कमी।
- दवाओं का उपयोग जैसे-लिथियम, एमियोडेरोन।
- संक्रमण।
- धूम्रपान।
- पर्याप्त थायराइड हार्मोन का न बनना।
- कुछ खाद्य पदार्थ का सेवन, जैसे सोया, मूंगफली, ब्रोकली और गोभी परिवार की सब्जियां।
- ऑटोइम्यून प्रॉब्लम (जब इम्यूनिटी खुद ही थायराइड ग्रंथि को नष्ट करने लगे)। इसमें थायराइड कैंसर, ग्रेव डिजीज (Graves’ disease), हाशिमोटो (Hashimoto), थायराइड नोड्यूल जैसी बीमारियां शामिल हैं।
घेंघा के लक्षण –
घेंघा की बात जैसे ही आती है, तो हर कोई यही सोचता है कि गले के आकार का बढ़ना ही इसका एकमात्र लक्षण होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। घेंघा होने के कई अन्य लक्षण भी होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं
- आयोडीन की कमी।
- दवाओं का उपयोग जैसे-लिथियम, एमियोडेरोन।
- संक्रमण।
- धूम्रपान।
- पर्याप्त थायराइड हार्मोन का न बनना।
- कुछ खाद्य पदार्थ का सेवन, जैसे सोया, मूंगफली, ब्रोकली और गोभी परिवार की सब्जियां।
- ऑटोइम्यून प्रॉब्लम (जब इम्यूनिटी खुद ही थायराइड ग्रंथि को नष्ट करने लगे)। इसमें थायराइड कैंसर, ग्रेव डिजीज (Graves’ disease), हाशिमोटो (Hashimoto), थायराइड नोड्यूल जैसी बीमारियां शामिल हैं।
घेंघा के लक्षण –
घेंघा की बात जैसे ही आती है, तो हर कोई यही सोचता है कि गले के आकार का बढ़ना ही इसका एकमात्र लक्षण होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। घेंघा होने के कई अन्य लक्षण भी होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं
- सांस लेने में कठिनाई
- खांसी
- गला बैठना
- खाद्य व पेय पदार्थ निगलने में कठिनाई
- थायराइड के क्षेत्र (गले के अगले हिस्से) में दर्द होना
- थकान महसूस होना
- गर्मी बर्दाश्त न होना
- अधिक भूख लगना
- पसीना अधिक आना
- महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म
- स्टूल (मल) का बार-बार आना
- मासपेशियों में ऐंठन
- घबराहट होना
- वजन कम होना
घेंघा के लिए घरेलू उपाय –
1. सेब का सिरका
सामग्री:
- एक चम्मच सेब का सिरका
- आधा चम्मच शहद
- एक गिलास पानी
उपयोग का तरीका:
- पानी को गुनगुना कर लें।
- अब इसमें शहद और सेब का सिरका मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें।
- मिश्रण तैयार होने के बाद इसे पी लें।
- खाली पेट रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:
सेब के सिरके का इस्तेमाल आप घेंघा की समस्या से निजात पाने के लिए कर सकते हैं। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि संक्रमण के कारण घेंघा की समस्या होती है। ऐसे में सेब के सिरके में मौजूद एंटी माइक्रोबियल गुण, संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने के साथ ही उन्हें पनपने से भी रोक सकता है। इसलिए, कहा जा सकता है कि सेब के सिरके का उपयोग घर में घेंघा रोग का इलाज करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा माना जाता है कि सिरके के इस्तेमाल से घेंघा की वजह से होने वाली सूजन को भी दूर किया जा सकता है ।
2. अरंडी का तेल
सामग्री:
- अरंडी के तेल की कुछ बूंदें
- उपयोग का तरीका:
- हथेली में अरंडी तेल की बूंदें लें।
- अब इससे गर्दन के पूरे हिस्से की हल्की मालिश करें।
- रोजाना रात को आप इस प्रतिक्रिया को दोहरा सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
घेंघा की वजह से गले में सूजन होने लगती है। ऐसे में अरंडी के तेल का उपयोग करके आप सूजन को कम कर सकते हैं। दरअसल, अरंडी के तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो घेंघे के कारण होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं ।
3. नारियल का तेल
सामग्री:
- नारियल तेल की कुछ बूंदें
उपयोग का तरीका:
- नारियल तेल की आवश्यक बूंदों को हथेली में डालें।
- अब इससे घेंघा प्रभावित हिस्से की मसाज कर लें।
- आप रोजाना रात को सोने से पहले इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
गोइटर के इलाज के लिए नारियल तेल का भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, नारियल के तेल में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह दोनों गुण थाइराइड हार्मोन के लिए आवश्यक होते हैं। घेंघा होने का कारण थाइराइण हार्मोन का न बनना भी होता है, इसलिए नारियल के तेल को इसमें फायदेमंद माना जाता है। वहीं, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में भी मदद करता है ।
4. वॉटरक्रेस (Watercress)
सामग्री:
- मुट्ठी भर वॉटरक्रेस
उपयोग का तरीका:
- वॉटरक्रेस को आप काटकर बतौर सलाद खा सकते हैं।
- इसे आप अन्य सलाद या किसी व्यंजन को गार्निश करने के लिए भी उपयोग में ला सकते हैं।
- वॉटरक्रेस का सेवन आप प्रतिदिन एक बार कर सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
वॉटरक्रेस को आम भाषा में जलकुंभी कहा जाता है। गोइटर के इलाज में वॉटरक्रेस भी लाभदायक साबित हो सकता है। दरअसल, गोइटर होने की सबसे आम वजह आयोडीन की कमी होती है और वॉटरक्रेस आयोडिन से समृद्ध होता है। इसलिए, इसका सेवन करने से घेंघा ठीक हो सकता है वॉटरक्रेस को आप पेस्ट के रूप में गले पर लगा भी सकते हैं।
5. जूस रेसिपी
(क) नींबू का रस
सामग्री:
- एक चम्मच नींबू का रस
- लहसुन की एक कली
- एक चम्मच शहद
उपयोग का तरीका:
- सबसे पहले लहसुन को छिलकर पेस्ट तैयार कर लें।
- अब इसमें नींबू का रस और शहद डालकर अच्छे से मिला लें।
- जरूरत पड़ने पर इसमें पानी की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं।
- अब इस मिश्रण को पी लें।
- आप रोजाना सुबह इसे खाली पेट पी सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
नींबू का रस आपको घेंघा से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। दरअसल, नींबू के रस में विटामिन-सी पाया जाता है, जो एंटी इंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। यह गुण सूजन को कम करने में सहायता कर सकता है। इसके अलावा, नींबू में एंटी माइक्रोबियल गुण भी पाए जाते हैं, जो संक्रमण को फैलाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करते हैं । इसलिए, माना जाता है कि घेंघा की वजह से होने वाले सूजन को कम करने और इंफेक्शन की वजह से होने वाले इस रोग में राहत देने में नींबू मदद कर सकता है।
(ख) अनानास का रस
सामग्री:
- एक चौथाई अनानास
- एक गाजर
- दो टमाटर
उपयोग का तरीका:
- जूस बनाने के लिए अनानास, गाजर और टमाटर को ब्लेंड करें।
- आवश्यकता पड़ने पर आप इसमें थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं।
- जूस बनने के बाद इसे ताजा पी लें।
- प्रतिदिन आप एक गिलास जूस का सेवन कर सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
अनानास जूस पीने से भी आपको घेंघा से राहत मिल सकती है। अनानास में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने का काम करते हैं। साथ ही यह ग्रंथियों को नियंत्रण करने में भी मदद करते हैं, जिससे घेंघा ठीक करने में मदद मिल सकती है ।
6. हल्दी
सामग्री:
- आधा कप हल्दी पाउडर
- एक कप पानी
- आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर
- 70 मिली जैतून या नारियल का तेल
उपयोग का तरीका:
- सबसे पहले एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें हल्दी पाउडर डालें।
- 5 से10 मिनट तक यानी गाढ़ा पेस्ट बनने तक इसे पकाएं।
- पेस्ट बनने के बाद इसमे काली मिर्च पाउडर और तेल डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
- इस पेस्ट को थोड़ा-थोड़ा कर घेंघा प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
- आप दिन में दो बार इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं।
- तैयार पेस्ट को आप एयरटाइट कंटेनर में डालकर दो हफ्ते तक फ्रिज में रख सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
घेंघा के लिए उपचार करते समय आप हल्दी को भी इसमें शामिल कर सकते हैं। दरअसल, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो थायराइड ग्रंथि में होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। हल्दी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके थायराइड स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है ।
7. अलसी का बीज
सामग्री:
- दो चम्मच अलसी
- आवश्यकतानुसार पानी
- अलसी को महीन पीस लें।
- अब अलसी पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
- इस पेस्ट को प्रभावित हिस्से में हल्के हाथों से लगाएं।
- 20 से 25 मिनट के बाद इसे धो लें।
- सूजन कम न होने तक आप इस प्रक्रिया को प्रतिदिन एक बार दोहरा सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
घेंघा को दूर करने में अलसी के बीज का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, अलसी में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं । एक ओर एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण घेंघा रोग की वजह से होने वाली सूजन को कम करने में मदद करता है। वहीं, एंटीऑक्सीडेंट गुण थायराइड स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है ।
8. गर्दन के व्यायाम
(क) अपवर्ड नेक स्ट्रेच (Upward Neck Stretch)
व्यायाम की विधि:
- किसी समतल स्थान पर कमर-पीठ और गर्दन सीधी करके बैठ जाएं।
- अब ठुड्डी (Chin) या गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं।
- करीब 30 से 40 सेकंड बाद गर्दन को नीचे कर लें।
- इस व्यायाम को 5 मिनट तक कर सकते है।
(ख) साइड वेज नेक स्ट्रेच (Sideways Neck Stretch)
व्यायाम की विधि:
- सबसे पहले समतल जगह पर कमर-पीठ और गर्दन को सीधा करके बैठ जाएं।
- अब गर्दन को धीरे-धीरे कंधे की ओर झुकाएं।
- जब आपका कान कंधे को छू ले, तो गर्दन को वापस पहले की स्थिति में ले आएं।
- कुछ देर बाद गर्दन को दूसरे कंधे पर झुकाएं।
- आप इस प्रक्रिया को एक से दो बार दोहरा सकते हैं।
- नोट: इस एक्सरसाइज को करते समय गर्दन में दर्द महसूस हो, तो इसे करना रोक दें।
कैसे लाभदायक है:
ऐसा माना जाता है कि घेंघा से राहत दिलाने में गर्दन की एक्सरसाइज सहायक हो सकती है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि, थायराइड की सर्जरी के बाद नेक स्ट्रेच एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है, जिससे दर्द में राहत मिलती है ।
9. चुकंदर
सामग्री:
- एक सामान्य आकार का चुकंदर।
उपयोग का तरीका:
- चुकंदर को पीसकर इसका जूस निकाल लें।
- जूस तैयार होते ही इसका सेवन कर लें।
- इसका इस्तेमाल सलाद की तरह भी किया जा सकता है।
- आप रोजाना जूस के रूप में एक बार या सलाद के रूप में दो बार इसका सेवन कर सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
चुकंदर में एंटी माइक्रोबियल गुण पाए जाते है। ऐसे में चुकंदर संक्रमण के कारण होने वाले घेंघा से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है संक्रमण घेंघा उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, संक्रमण से छुटकारा पाने से इस समस्या से भी निजात पाया जा सकता है ।
10. लहसुन
सामग्री:
- एक से दो लहसुन की कलियां
उपयोग का तरीका:
- लहसुन को छीलकर सुबह खाली पेट ऐसे ही चबा लें।
- आप स्वाद के लिए लहसुन को कुचलकर इसमें शहद मिलाकर भी खा सकते हैं।
- प्रतिदिन सुबह इस प्रक्रिया को दोहराया जा सकता है।
कैसे लाभदायक है:
लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी प्रभाव पाए जाते हैं। जैसे कि हम आपको लेख में पहले ही बता चुके हैं कि ये दोनों गुण घेंघा रोग में लाभदायक साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही लहसुन के अर्क में मौजूद एलिसिन (Allicin) और फ्लेवोनोइड्स (Flavonoids) थायराइड बढ़ने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करते हैं ।
11. ग्रीन टी
सामग्री:
- एक चम्मच ग्रीन टी पाउडर
- एक कप पानी
- शहद स्वादानुसार
उपयोग का तरीका:
- पानी को गर्म कर लें और फिर उसमें टी पाउडर को मिला लें।
- जब यह घुल जाएं तो इसे कप में निकल कर इसमे स्वाद के लिए शहद मिक्स कर दें।
- इसे ताजा ही पिएं।
- आप इसे दिन में एक बार पीने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
एक शोध के अनुसार, ग्रीन टी में एंटी माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करने के साथ ही इन्हें पनपने से रोकते हैं। इसलिए, माना जाता है कि ग्रीन टी का सेवन करने से संक्रमण की वजह से होने वाले घेंघा रोग में राहत मिल सकती है ।
12. लेमन बाम चाय
सामग्री:
- एक चम्मच सूखे लेमन बाम
- एक कप पानी
- शहद
उपयोग का तरीका:
- एक बर्तन में पानी गर्म करके लेमन बाम को डालें।
- फिर कुछ मिनट के लिए इसे उबालें।
- अब इसे चाय की तरह पी लें।
- स्वाद के लिए आप इसमें शहद भी मिला सकते हैं।
- आप रोजाना एक से दो लेमन बाम टी का सेवन कर सकते हैं।
कैसे लाभदायक है:
लेमन बाम टी के सेवन से भी घेंघा रोग से राहत मिल सकती है। लेमन बाम में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने के साथ ही पनपने से रोकते हैं। साथ ही यह ट्यूमर के सेल्स को भी बनने से रोकते हैं । इसलिए, माना जाता है कि लेमन बाम टी गोइटर के इलाज में मदद कर सकती है।
घेंघा के जोखिम कारक –
घेंघा के जोखिम कारक कुछ इस प्रकार हैं
- तंबाकू का सेवन और धूम्रपान करना।
- महिलाओं को घेंघा होने का ज्यादा खतरा होता है।
- गर्भवतियों को भी घेंघा होने की आशंका ज्यादा होती है।
- जिनके परिवार में किसी को गोइटर की समस्या रही हो।
- 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग।
घेंघा का इलाज –
कई बार ऐसा होता है कि घेंघा रोग के कोई लक्षण नजर नहीं आते। इसलिए, डॉक्टर हमेशा यही सलाह देते हैं कि इस रोग का इलाज तभी किया जाना चाहिए, जब गले में सूजन या अन्य परेशानी व लक्षण नजर आएं। नीचे हम आपको थायराइड ग्रंथि की असामान्य वृद्धि के बाद किए जाने वाले इलाज के बारे में बता रहे हैं
- इलाज के तौर पर डॉक्टर आपको थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट की गोलियां खाने को कह सकते हैं। डॉक्टर दवा की सलाह तभी देते हैं, जब आपको घेंघा अंडरएक्टिव थायराइड (Hypothyroidism) की वजह से हुआ हो। हाइपोथायराइडिज्म वह स्थिति होती है, जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है।
- अगर आयोडीन की कमी के कारण घेंघा हुआ है, तो डॉक्टर लुगोल (Lugol) आयोडीन या पोटैशियम आयोडीन घोल के सेवन की सलाह दे सकते हैं।
- अगर थायराइड ग्रंथि अधिक थायराइड हार्मोन का उत्पादन कर रही है, तो डॉक्टर रेडियोएक्टिव आयोडीन से ग्रंथि को सिकोड़ने की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं।
- अगर घेंघा ठीक नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर सर्जरी का भी सुझाव दे सकते हैं। इसमें थायराइड ग्रंथि को पूरी तरह या इसके कुछ हिस्से को हटाया जाता है।
- अब हम बताएंगे कि घेंघा होने पर या इससे बचने पर कौन-कौन से आहार का सेवन करना लाभदायक हो सकता है।
घेंघा के लिए आहार –
घेंघा होने पर कुछ खाद्य पदार्थों इसके इलाज में मदद कर सकते हैं। आयोडीन की कमी की वजह से होने वाले घेंघा के दौरान व इससे बचने के लिए आप इन आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं ।
- सी फूड
- दही (कम वसा वाला)
- दूध (कम वसा वाला)
- आयोडीनयुक्त नमक
- मछली (बेक्ड कॉड)
- सफेद ब्रेड
- चॉकलेट आइसक्रीम
- उबली हुई मैकरोनी
- कॉर्न (मकई) क्रीम
- सूखे आलूबुखारा
- सेब का जूस
- मटर
- अंडा
- केला
- सेब
- चीज़
घेंघा से बचने के उपाय –
अपनी दिनचर्या में कुछ आदतों पर बदलाव करके और कुछ बातों पर ध्यान देकर घेंघा से खुद को बचा सकते हैं। घेंघा से बचने के उपाय कुछ इस प्रकार हैं ।
- आयोडीन युक्त आहार को अपने आहार में शामिल कर घेंघा से बचा जा सकता है।
- धूम्रपान की वजह से भी घेंघा होता है, इसलिए गोइटर से बचने के लिए आपको स्मोकिंग से बचना चाहिए।
- आप साफ-सफाई का ध्यान रखकर संक्रमण के साथ ही घेंघा से भी खुद को बचा सकते हैं।
- लिथियम (lithium) व एमियोडैरोन (Amiodarone) जैसी दवाओं का सेवन करने से बचें।
घेंघा क्या होता है और घेंघा के लिए घरेलू उपाय क्या हो सकते हैं, यह तो हम आपको इस लेख में विस्तार से बता ही चुके हैं। अब आपको अपनी दिनचर्या में बदलाव कर और लेख में दी गई बातों पर ध्यान देते हुए अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना होगा। ध्यान रखें कि छोटी-छोटी सावधानियां ही आपको हर किसी तरह के रोग से बचाने में मदद कर सकती हैं। आप घेंघा से संबंधित जानकारी अपने दोस्तों और परिचितों तक पहुंचाने के लिए इस लेख को जरूर साझा करें। आपका यह कदम किसी अन्य को घेंघा से बचाने में मदद कर सकता है। अगर आपके जहन में घेंघा रोग से संबंधित कोई सवाल लेख पढ़ने के बाद भी हैं, तो उन्हें आप नीचे दिए कमेंट बॉक्स के माध्यम से हम तक पहुंचा सकते हैं।

