-विभाग हित में नहीं किया रमेश उपाध्याय को रिलीव- सतीश कुमार
गोण्डा। आठ वर्षों से अधिक एक ही पटल पर कार्यरत सरयू नहर खंड के उप खण्डीय लिपिक रमेश कुमार उपाध्याय के बारे में रामचरितमानस कि यह चौपाई याद आती है कि यहां वहां दी बालक देखा भगवान राम के समान का क्या रमेश उपाध्याय के भी दो रूप हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रमुख अभियंता सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के आदेशानुसार 23 मई 2025 को ही रमेश उपाध्याय का स्थानांतरण कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक के पद पर प्रोन्नति करते हुए गोंडा सरयू नहर खंड प्रथम से खलीलाबाद सरयू नहर खंड में कर दिया था। बावजूद इसके प्रमुख अभियंता के आदेश के एक वर्ष दो माह बीत जाने के बाद भी रमेश कुमार उपाध्याय सरयू नहर खंड प्रथम गोंडा में ही कार्य कर रहे हैं। यही से वेतन भी प्राप्त कर रहे हैं, जबकि खलीलाबाद में भी ज्वाइन कर चार्ज ले चुके हैं फिर उपाध्याय जी दो रूप कैसे धारण किए हैं। इससे भी आश्चर्य की बात यह है की सरयू नहर खंड गोंडा में ही इसी खण्ड में दो ऐसे लिपिक भी है जिन्हें कोई काम नहीं मिला है। प्रमुख अभियंता के आदेश में स्पष्ट है कि रमेश कुमार उपाध्याय एक माह के अंदर खलीलाबाद में कार्यभार ग्रहण करने पर समस्त प्रोन्नति लाभों के पात्र होंगे अन्यथा उनकी प्रोन्नति को अस्थाई रूप से राज्यसात माने जाने के आदेश अधीक्षण अभियंता के स्तर से जारी कर इसकी सूचना प्रमुख अभियंता कार्यालय पर भेजा जाए। जबकि उपाध्याय समस्त लाभ सरयू नहर खंड प्रथम गोंडा से ही प्राप्त कर रहे हैं। प्रकरण पर अधीक्षण अभियंता मनोज साहू से बात करने पर उन्होंने हंसते हुए कहा की क्यों उसके पीछे पड़े हो अभी तक अधिशासी अभियंता ने रिलीव नहीं किया है जल्द ही चला जाएगा। इस प्रश्न पर की खलीलाबाद ज्वाइन किया है कि नहीं साहू जी बोले कि शायद ज्वाइन नहीं किया है। जबकि सहायक अभियंता खलीलाबाद केएम लाल ने यह कहते हुए की मीडिया को बयान देने के लिए अधिशासी अभियंता ही अधिकृत है इस बात की पुष्टि किया की खलीलाबाद में ज्वाइन कर चुके हैं और वहां के अधिशासी अभियंता विश्वनाथ शुक्ला ने चार-पांच लेटर भी गोंडा अधिशाषी अभियंता को रिलीव करने के लिए लिखा है। एलपीसी अभी तक नहीं भेजे हैं इसलिए वेतन गोंडा से ही प्राप्त कर रहे हैं इसके बाद सहायक अभियंता सरयू नहर खंड प्रथम के रामायण पांडे से बात करने पर उन्होंने बताया की उपाध्याय खलीलाबाद भी जाते हैं यह पूछने पर कि जब गोंडा से खलीलाबाद जाते हैं तो क्या छुट्टी लेते हैं और छुट्टी मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज की जाती है तो पांडे जी अधिशासी अभियंता के स्तर का प्रश्न बताकर कन्नी काट गए। अंत में अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड प्रथम गोण्डा के सतीश कुमार से जब बात किया तो उनका जवाब तो हैरान करने वाला था। उन्होंने बताया की 16 खण्डो की सेलरी डीडीओ स्तर से निकलती है और अभी तक कंप्यूटर में सैलरी फीड करने का डाटा किसी को रमेश उपाध्याय के अलावा नहीं पता है। रमेश उपाध्याय को रिलीव करने से सभी की सैलरी फंस जाएगी। यह पूछने पर कि जब इसकी प्रोन्नति कनिष्ठ लिपिक से वरिष्ठ लिपिक के पद पर हुई है तो इन्हें आप वरिष्ठ लिपिक की सैलरी किस अधिकार से दे सकते हैं इस पर अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने कहा की सैलरी कनिष्ठ लिपिक की ही दे रहे हैं। अंतिम सवाल पर कि खलीलाबाद जाने पर उपाध्याय जी छुट्टी लेते हैं और वह छुट्टी मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज होती है। उन्होंने कहा अभी हमने गंभीरता से नहीं देखा है। कार्य हित में रिलीव नहीं किया है यदि ऐसा लगेगा की तूफान आ जाएगा तो रिलीव कर देंगे। जबकि खलीलाबाद के अधिशासी अभियंता वीएन शुक्ला ने तीन दिन से अनेकों फोन पूर्व की भाति नहीं उठाया। ज्ञात हो कि वीएन शुक्ला पूर्व मे अधिशासी अभियंता बाढ़ कार्य गोण्डा रह चुके हैं। अब सवाल यह है की एक वर्ष से ज्यादा बीतने के बावजूद रमेश उपाध्याय का काम (सैलरी फीड करने का डाटा) किसी को ना तो सिखाया गया और ना कोई सीख पाया और यदि ऐसे में उपाध्याय जी को रिलीव कर खलीलाबाद भेजा जाएगा तो पूरे विभाग में अव्यवस्था फैल जाएगी दूसरी बात रमेश उपाध्याय का त्याग भी सराहनीय है जो प्रोन्नति के बाद भी कनिष्ठ लिपिक की सैलरी पर नुकसान उठाकर विभाग की सेवा दे रहे हैं। प्रमुख अभियंता को इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

