-पोषण अभियान अन्तर्गत छः माह की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को खीर खिलाकर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मना अन्नप्राशन दिवस
गोण्डा। छ माह की आयु पूरी कर चुके बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी अर्द्ध ठोस आहार देना भी जरूरी हो जाता है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए मंगलवार को सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। जिले में छह माह से ऊपर के करीब 28 सौ बच्चों को खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) धर्मेन्द्र गौतम ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान अन्तर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता छ माह से ऊपर के बच्चों का अन्नप्राशन करा रही हैं और माताओं को पूरक आहार के बारे में नं केवल जानकारी दे रही हैं बल्कि इसे तैयार करने का तरीका भी सिखा रही हैं। उन्होने बताया कि बच्चों के सर्वांगीर्ण विकास के लिए छह माह तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद अर्द्ध ठोस आहार आवश्यकतानुसार शुरू करना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में फल, सब्जी आदि खिलाना चाहिए। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है।
सीडीपीओ नवाबगंज रमा सिंह ने बताया कि बालापुर, लौवा वीरपुर, खेमपुर, जफरापुर, लीदेहनग्रान्ट, विश्नोहरपुर, हरदवा उमरिया इत्यादि 158 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पंचायत समिति के सदस्यों की उपस्थिति में अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। इस दौरान छह माह पूर्ण करने वाले लगभग 320 बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया । साथ ही बच्चों का वजन एवं लम्बाई माप कर उनके शारीरिक विकास की जाँच की गयी।
वहीं शहर परियोजना के मकार्थीगंज की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रंजीता व रजनी ने अन्नप्राशन दिवस मनाकर क्षेत्र के चार बच्चों का अन्नप्राशन करवाया । बच्चों को ऊपरी आहार खिलाने के महत्व एवं उनकी आवश्यकता के बारे में अभिभावकों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चे को आयु के अनुसार पहले मसला हुआ खिचड़ी, दलिया आदि खिलाएं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो उसके आहार को बढ़ाएं और एक छोटी चम्मच घी या सरसों का तेल भी डालें। साथ में दो वर्ष तक स्तनपान भी कराएं। शुरुआत में ऊपरी आहार दो से तीन छोटे चम्मच नरम भोजन, जैसे दलिया, ठीक से मसली हुई सब्जी या दाल, रोजाना दिन में दो से तीन बार दें और धीरे-धीरे आहार की मात्रा और गरिष्ठता बढ़ाते रहें। साफ सफाई का ध्यान रखें।
-स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूरी
शहर परियोजना की मुख्य सेविका ममता सिंह ने बताया कि 6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल-चावल, दाल में रोटी मसलकर दूध के साथ दे सकते हैं। फल प्रतिदिन दो बार देना चाहिए । ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना एवं धुले एवं कटे फल प्रतिदिन भोजन एवं नाश्ते में देना चाहिए। इस मौके पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उर्मिला मिश्रा समेत क्षेत्र की धात्री माताएं, बच्चे और अभिभावक मौजूद रहे।


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