- -ग्राम पंचायतों में घोटाले के बाद क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्यों में भी मिली गड़बड़
- -क्षेत्र पंचायत परसपुर से कराए गए विकास कार्यों में सत्ताईस लाख रुपए का घपला आया सामने
- -नगर पंचायत क्षेत्र में होने के बावजूद गांवों के बजट खर्च पर उठ रहे गंभीर सवाल
कर्नलगंज, गोण्डा। तहसील क्षेत्र के परसपुर विकास खण्ड के 68 ग्राम पंचायतों में हुए घोटाले के बाद अब क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्यों में भी गड़बड़ी मिली है। यहाँ ऑडिट टीम की जांच में 27 लाख रुपए का घपला सामने आया है। जांच के दौरान टीम को अभिलेख नहीं मिले। इस पर जांच टीम ने गबन की पुष्टि करते हुए खर्च किए गए धनराशि के रिकवरी की संस्तुति रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजी है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में विकास कार्यों के नाम पर सत्ताईस लाख रुपए का खर्च दिखाया गया है। यह पूरी धनराशि ब्लाक परिसर के सौंदर्यीकरण पर खर्च की गई है। परसपुर ब्लाक में प्रमुख कक्ष की मरम्मत व साज सज्जा के नाम पर पर ग्यारह लाख रूपये का बजट खर्च किया गया है। इसी तरह कर्मचारियों के आवास के मरम्मत पर सात लाख से अधिक का बजट खर्च किया गया है। सबसे चौंकाने वाला खर्च पशु चिकित्सालय के बगल मिट्टी पटाई का है। कारण अस्पताल के बगल बाउंड्री है और अंदर इंटरलाकिंग है। ऐसे में परिसर के बाहर कार्य करने का संकेत भी मिला है। इस पर दो लाख तैंतीस हजार रूपये खर्च किए गए हैं। बीडीओ आवास के बगल दो लाख बयासी हजार व कृषि कार्यालय के बगल मिट्टी पटाई के नाम पर एक लाख बयासी हजार रूपये का बजट खर्च किया गया है। इसके अलावा ब्लाक परिसर में ही अन्य कार्य पर दो लाख रुपये के करीब का बजट खर्च किया गया है। लेकिन जब आडिट टीम ने विभिन्न विकास कार्यों की पड़ताल शुरू की तो उन्हें इस संबंध में कोई भी अभिलेख नहीं मिले। इस पर जांच टीम ने 27 लाख रुपए के गबन की पुष्टि करते हुए इसके रिकवरी के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी गोंडा को संस्तुति रिपोर्ट भेजी है। बताते चलें कि इस तरह से परसपुर विकास खंड में ग्राम पंचायतों के बाद अब क्षेत्र पंचायत में भी 27 लाख रुपए का गड़बड़झाला का हैरतअंगेज मामला प्रकाश में आने से जिम्मेदार लोगों को गंभीर जांच के घेरे में खड़ा कर रहा है। मालूम हो कि वर्ष 2015 में परसपुर को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया था। नगर पंचायत बनने के बाद ब्लॉक कार्यालय भी शहरी क्षेत्र में आ गया। ऐसे में नियमानुसार गांव के विकास के लिए आवंटित किये गये बजट को इसके मरम्मत पर खर्च नहीं किया जा सकता है। बावजूद इसके ब्लॉक कार्यालय के मरम्मत एवं रख-रखाव के नाम पर 27 लाख रूपये खर्च कर दिए गए। चौंकाने वाली बात तो यह है कि भारी- भरकम धनराशि खर्च होने के बाद भी ब्लॉक कार्यालय की सूरत नहीं बदल सकी। अब यहां पर हुए खर्च पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में डीपीआरओ गोंडा लाल जी दूबे का कहना है कि उक्त सम्बन्ध में ऑडिट टीम ने जो संस्तुति रिपोर्ट भेजी है,उसमें विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख ना मिलने की बात कही गई है। अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए ब्लॉक के एडीओ पंचायत को पत्र लिखा गया है। यदि खर्च में किसी तरह की अनियमितता की बात सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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