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गोण्डा-जिगर डे के अवसर पर हुआ मुशायरे का आयोजन

 
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गोण्डा। एक शाम जिगर के नाम...... बज्म ए असगर व जिगर गोंडा की ओर से जिगर डे के अवसर पर एक मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे की सदारत जमील आजमी तथा संचालन अज्म गोंडवी ने किया। मुख्य अतिथि उस्ताद शायर मुजीब सिद्दीकी तथा विशिष्ट अतिथि कत आफताब आलम थे। प्रोग्राम जिगर साहब की नात- एक रिन्द है और मिद हते सुल्तान ए मदीना रु से शुरू हुआ। बज्म के सदर कमरुद्दीन पूर्व नपा चेयरमैन ने अगुंतकों का स्वागत किया तथा उर्दू पत्रकार शमसुल हक ने जिगर साहब के जीवन पर प्रकाश डाला........ मुशायरे मे लगभग स्थानीय व बाहर के 30 शायरों ने अपनी रचनाएँ पढ़ीं। सबसे अधिक पसंद किये गए शेर इस प्रकार थे... 1- सजा के बज्म ए सुखन तेरी याद मे अय जिगर, तमाम रात सितारे मुझे बुलाते हैं।(जमील आजमी) 2- गजल मे हुस्ने हकीकी का तज्किरा हो अगर, जनाबे असगर हजरत जिगर की बात करे(मुजीब सिद्दीकी) 3- जज्बय इश्को वतन फिर से जगाया जाय, प्यार के फूलों से गुलशन को सजाया जाय (डॉक्टर आफताब आलम) 4 कहाँ वह बात किसी और शायरी मे कमर, जिगर मे रंगे तगज्जुल जो पा रहे हैं हम ( नियाज अहमद कमर) 5 गुनाह गारों को जो बख्शे ना आमिल, उमर जैसी अदालत चाहता हूँ(आमिल गोंडवी) 6- आँसुओं का इक समुंदर है मेरे चुल्लू मे, मैंने हाथों मे उठा रखा है दीवान ए जिगर (ईमान गोंडवी) 7- उजाले की जरा सी पाके आहट, अंधेरे खुद सिमटते जा रहे हैं (नजमी गोंडवी) 8- हम तेरे जिक्र से दिल शाद किया करते हैं, भूलने वाले तुझे याद किया करते है(आतिफ गोंडवी) 9- वो थक के चूर हुआ जुस्तउजुये मंजिल मे , मै साया देता उसे काश इक शजर होता(गुमनाम गोंडवी) 10- क्या मुकाम रखते थे आप अय जिगर साहब, ये दयारे असगर की सिसकियां समझती हैं(हैदर गोंडवी) 11 गोंडा की सरजमींन वह है जिससे अय सगीर, तुलसी, जिगर, व असगर व बेकल अदम मिले(सगीर सिद्दीकी) 12 मौत आने से जिस्म मिटता है, खत्म पर सिलसिला नही होता(अफजल अदीब).... इसके अतिरिक्त अन्य शायरों व कवियों की रचनाओं को भी सराहा गया। मुशायरे मे सूरज सिंह, मनीष अग्रवाल, राजेश कपÛपज, जमशेद वारसी, फहीम सिद्दीकी, मुशफीक जमीर, नदीम सिद्दीकी, शेख अफसर हसन, इरफान मोइन, बाबू इसराइल, वली मुहम्मद, खान युसुफ, मतीन, फैज बारी, वासिफ, लुत्फी कमाल, सज्जु, फहीम ताज, आदि काफी तादाद मे लोगों ने शिरकत की। मुशायरे के संयोजक नजमी कमाल ने अंत मे धन्यवाद ज्ञापित किया।


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