-एसीएमओ के निजी गुर्गे पर डा0 के पुत्र ने लगाया बीस हजार रुपए मांगने का आरोप
गोण्डा। अवैध तरीके से संचालित हो रहे नर्सिंग होम सहित अन्य अवैध क्लीनिक व पैथालोजी की खबर पूर्व में प्रकाशित होने पर जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही द्वारा दिनांक 19.02.2021 को शिकायत संख्या 20018321003127 पर दर्ज करके सीएमओ को कार्यवाही करने हेतु आदेश दिया गया परंतु खाऊ कमाऊ नीति कहें या रहमदिली के चलते सीएमओ द्वारा नियमानुसार कार्यवाही नही की गई। कार्यवाही न होने से मनबढ़ हुए कटरा बाजार क्षेत्र के न्यू लाइफ हॉस्पिटल व नेशनल क्लीनिक के कर्मियों में इस कदर खूनी संघर्ष हुआ कि लोग मरणासन्न अवस्था में हो गए जिनका उपचार चल रहा है। मुन्ना ने बताया कि दिनांक 15 सितम्बर 2021 को एसीएमओ डा0 टीपी जायसवाल द्वारा अपने विभागीय कर्मी व अपने पालतू गुर्गे के साथ कटरा बाजार स्थित डॉ0 कयूम के क्लीनिक पर धावा बोलकर वहां मौजूद औषधियों की जांच कर डुप्लीकेट दवाइयां रखने का आरोप लगाया गया। तत्पश्चात निजी गुर्गे विजय द्वारा संचालक से 20 हजार रुपए की मांग किया गया परंतु संचालक द्वारा रुपए देने से मना करने पर एसीएमओ के पालतू गुर्गे द्वारा क्लीनिक में मौजूद दवाइयों में से एक-एक पत्ता दवाइयां व गल्ले में रखा करीब 15-20 हजार रुपए निकाल लिया गया और उसके बाद एसीएमओ द्वारा स्थानीय थाने में तहरीर भी दिया गया। जिससे आहत डा0 कयूम के पुत्र मुन्ना ने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में कटरा बाजार क्षेत्रांन्तर्गत तमाम झोलाछाप व बंगाली लोग अवैध क्लीनिक चला रहे हैं जिन पर कार्यवाही करना तो दूर देखने की भी हिमाकत नही की जाती। वहीं लोगों में चर्चा है कि निजी गुर्गे का प्रयोग अवैध वसूली हेतु इसलिए किया जा रहा है कि यदि कोई शिकायत हो तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाय कि वह बाहरी व्यक्ति है उससे हमारा कुछ लेना देना नही है। मामले की जानकारी लेने पर थाना प्रभारी सतानंद पाण्डेय ने 19 सितम्बर को बताया कि एसीएमओ द्वारा 04 दिन पहले तहरीर तो दी गई है परंतु एफआईआर अभी इसलिए दर्ज नही हुआ है क्योंकि एसीएमओ द्वारा कहा गया था कि उच्चाधिकारी से वार्ता कर बताएंगें तब लिखना। अब सवाल यह उठता है कि कयूम के क्लीनिक में डुप्लीकेट दवाइयां पाए जाने के बावजूद थाने में तहरीर दिए जाने के बाद थाना प्रभारी से एसीएमओ द्वारा यह कहा जाना कि उच्चाधिकारी से वार्ता करने के बाद बताऊंगा तब एफआईआर लिखना किसी और बात की तरफ इशारा कर रहा है। आम जनमानस चर्चा है कि जब एसीएमओ द्वारा किसी के विरुद्ध आरोप लगाकर तहरीर दिया जा सकता है तो एफआईआर भी लिखने देना चाहिए। आखिर किस लगाव व दबाव के चलते एसीएमओ ने थाना प्रभारी से कहा अभी एफआईआर मत लिखना हम उच्चाधिकारी से वार्ता करके बताएंगे तब लिखना। बुद्धिजीवियों के अनुसार यदि डॉ0 कयूम का क्लीनिक व अन्य हॉस्पिटल अवैध है तो सभी पर एफआईआर होना ही चाहिए यदि किसी को दबाव व लगाव वश छोड़ा जाता है तो उससे आरोपों की पुष्टि होने के साथ साथ विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगता है। संवाददाता द्वारा आरोपों की जानकारी दूरभाष द्वारा लेने पर डा0 टीपी जायसवाल ने बेखौफ होकर गैरजिम्मेदाराना अंदाज में कहा कि 20 हजार नही उससे कह दीजिए कि 02 लाख मांग रहे थे 20 हजार तो डा0 जायसवाल के लिए बहुत कम है।

