पैलेडियम-एक ऐसा मेटल है जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले एक साल में इस दुर्लभ मेटल की कीमत में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और ये अब प्लैटिनम से भी ज़्यादा महंगा हो गया है. 2001 के बाद ये पहली बार हुआ है।
पैलेडियम का नाम क्षुद्रग्रह पलास के लिए रखा गया था, जिसे लगभग उसी समय (1803) खोजा गया था। पैलास एथेना ज्ञान की यूनानी देवी थी।
पैलेडियम की खोज की कहानी बहुत रोचक है चलिए अब आपको बताता हूँ पैलेडियम कि खोज कि एक रोचक कहानी -
सुबह आंख खुलते ही रिचर्ड चेन्विक्स हमेशा की तरह अखबार पढ़ने बैठ गए। अचानक उनकी नजर फरस्टर द्वारा दिए गए एक विज्ञापन पर टिक गई। फरस्टर प्रसिद्ध खनिज संग्रहकर्ता और व्यापारी थे। विज्ञापन में लिखा था — बिकाऊ है एक अनोखी धातु पैलेडियम। एक ऐसी धातु जिसके बारे में दुनिया के रसायन शास्त्रियों ने आज तक नहीं सुना।
सन 1803 की सुबह मूसलाधार वर्षा होने के कारण लंदन की सड़कों पर पानी भर गया था। इसके बावजूद भी विज्ञापन को पढ़कर रिचर्ड चेन्विक्स से रहा नहीं गया और वह फरास्टर की दुकान पर पहुंच गए।
विज्ञापन के विषय में पूछने पर फरास्टर ने उनके सामने एक चमकदार धातु का टुकड़ा पेश किया। चेन्विक्स को पहली नजर में लगा कि वह प्लैटिनम है। उठाकर देखा तो वह काफी हल्का था फरस्टर ने बताया कि उन्हें यह टुकड़ा एक गुमनाम चिट्ठी के साथ पार्सल से प्राप्त हुआ है। चिट्ठी में किस धातु को बेचने का आग्रह है। रिचर्ड चेनविक्स ने उस चिट्ठी को उलट-पुलट कर देखा। सुंदर अक्षरों में लिखी इस चिट्ठी में भेजने वाले का नाम पता नादान था। चेनविक्स को लगा यह जरूर किसी की शरारत है उन्होंने जांच पड़ताल कर पोल खोलने का निश्चय किया। धातु के टुकड़े को खरीद कर वह इसे अपनी प्रयोगशाला में ले आए।
रिचर्ड चेनविक्स ने अपने साथियों से इस विषय पर चर्चा की। सब ने उन्हें इस धातु का भंडाफोड़ करने की सलाह दी। तदनुसार जैविक अनुसंधान में जुट गए बड़ी मेहनत के बाद उन्होंने पाया कि यह पैलेडियम धातु प्लैटिनम और पारे से मिलकर बनी है। इस आधार पर एक शोध पत्र भी प्रकाशित किया, किंतु बात यहीं खत्म नहीं हुई।
अन्य वैज्ञानिकों ने भी इस पर प्रयोग किए। वह रिचर्ड चेन्विक्स से सहमत नहीं हुए। उन्हें पैलेडियम में प्लैटिनम और पारे के दर्शन तक नहीं हुए। अब चेन्विक्स संकट में पड़ गए। उन्हें स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि प्लैटिनम में पारे के अत्यधिक घुल जाने से इन्हें अलग करना मुश्किल है। यहां तक कि एक विशेष तकनीकी द्वारा प्लैटिनम और पारे को मिलाकर पैलेडियम का निर्माण करने का दावा भी उन्होंने किया वैज्ञानिकों ने इस विधि को अपनाया किंतु पैलेडियम नहीं बना। हमारे बस में नहीं यह सोचकर वैज्ञानिकों ने भी चुप्पी साधली।
कुछ समय पश्चात अखबार में फिर एक विज्ञापन छपा। इसमें लिखा था जो भी चेन्विक्स के नुक्से को अपनाकर प्लैटिनम में पारा मिलाकर पैलेडियम धातु बना लेगा उसे 20 पाउंड का इनाम मिलेंगे। लोग तो पहले ही हार मान बैठे थे अंततः इनाम किसी को नहीं मिला।
एक दिन रॉयल सोसाइटी लंदन की विशेष बैठक में अचानक हंगामा मच गया। विज्ञान अकादमी के सचिव और जाने-माने रसायन शास्त्री विलियम वोलास्टन ने सदस्यों को सूचित किया है कि उन्हें प्लैटिनम का विश्लेषण करते समय दो नई धातु मिली है पैलेडियम और रेडियम। उन्होंने यह भी बताया कि फारस्टर को उन्होंने ही पैलेडियम का नमूना बेचने को भेजा था। इनाम की घोषणा भी उन्होंने ही की थी। इस घोषणा के बाद रिचर्ड चेन्विक्स ने शर्म के मारे रसायनविद का पेशा ही छोड़ दिया।
वोलास्टन ने इस बैठक में यह भी बताया कि उन्होंने नए धातु का नाम पैलेडियम क्यों रखा? सभी सदस्यों को यह याद दिलाया कि सन 1802 में खगोल शास्त्री एच. ऑलबस द्वारा एक नए तारे की खोज की गई थी। ग्रीस की भाग्य देवी पैलास एथेना के नाम पर उस तारे का नाम 'पैलास' रखा गया था और इसी ने तारे के सम्मान में वोलास्टन ने इस नई धातु का नाम पैलेडियम रख दिया।
पैलेडियम की कई विशेषताएं हैं। अगर इसे सोने में मिला दिया दें तो सोना सफेद हो जाता है। आभूषणों और घड़ियों को सुरक्षित रखने वाले केसों को बनाने में भी इसका प्रयोग होता है। दूसरी धातुओं में मिलाने से यह इन्हें मजबूती प्रदान करता है।
पैलेडियम में हाइड्रोजन सोखने की शक्ति बहुत होती है। अगर पैलेडियम के डिब्बे में हाइड्रोजन गैस को सील बंद कर दें तो थोड़ी देर बाद उसके पृष्ठों से पूरी हाइड्रोजन पानी की तरह रिस्ते हुआ बह जाएगी अगर डिब्बा गर्म करें तो यह काम और भी तेज होगा। पैलेडियम के इसी गुण का उपयोग हाइड्रोजन छानने की झिल्ली के रूप में होता है। कच्चे तेल से अति शुद्ध हाइड्रोजन इसी तरह प्राप्त की जाती है। पैलेडियम के और भी कई उपयोग हैं, यही कारण है कि पैलेडियम की खोज को एक चमत्कार माना जाता है।

