गोण्डा। अभी बिना निविदा कराए भुगतान का मामला शांत भी नहीं हुआ है, इसी बीच दवा खरीद में अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। पहली अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2020 के बीच हुई दवा खरीद की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआइटी) ने खरीद संबंधी रिकॉर्ड तलब किए हैं। इसमें एक पूर्व विधायक पर अफसरों से मिलीभगत करके अनियमितता का आरोप है।
शासन को दवा खरीद में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। नियमों की अनदेखी के साथ ही कई अन्य आरोप लगाए गए थे। शासन ने 25 फरवरी 2020 को जांच के लिए एसआइटी गठन का आदेश दिया था। एसआइटी ने अब मामले की पड़ताल तेज कर दी है। जांच टीम ने डीएम को पत्र लिखकर खरीद संबंधी रिकॉर्ड मांगे हैं। जांच टीम ने पहली अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2016 के मध्य राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, पूजा श्रीवास्तव, मुकेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, सविता श्रीवास्तव के नाम से पंजीकृत फर्म को आवंटित कार्य का विवरण तलब किया है। यही नहीं, राशि इंटर प्राइजेज बलरामपुर, आरपी कांस्ट्रक्शन, लखनऊ मेडिकल एजेंसी, इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिक्लस, यूपी सर्जिकल ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिक्लस आदि कंपनियों को आवंटित कार्य का विवरण तथा फर्म के मालिक का नाम देने को कहा गया है। एसआइटी के पत्र के बाद डीएम मार्कण्डेय शाही ने संबंधित अफसरों को अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। हालांकि पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है। इन अफसरों के कार्यकाल की होगी जांच
एसआइटी के जांच के दायरे में सात पूर्व सीएमओ का कार्यकाल आ रहा है। इसमें डा. अमर सिंह कुशवाहा, डा. राकेश अग्रवाल, डा. उमेश सिंह यादव, डा. आभा आशुतोष, डा. संतोष कुमार श्रीवास्तव व डा. मधु गैरोला शामिल हैं।
क्या कहते है जिम्मेदार
- सीएमओ डॉ. आरएस केसरी का कहना है कि एसआइटी ने खरीद संबंधी विवरण मांगा है। इसे उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को कहा गया है।

