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एल्युमिनियम का आविष्कार किसने और कब किया

 
aluminum

एल्युमिनियम एक भौतिक तत्व है, जो धातु रूप में पाया जाता है। यह धातु विद्युत तथा उष्मा का चालक तथा काफी हल्की होती है। इसका उपयोग किचन के काम आने वाले बर्तनों के अलावा हवाई जहाज के पुर्जे बनाने में भी किया जाता है। भारत में जम्मू-कश्मीर, मुम्बई, कोल्हापुर, जबलपुर, रांची, सोनभद्र, बालाघाट तथा कटनी में इसका अयस्क पाया जाता है। 

लैटिन भाषा के शब्द ‘एल्यूमेन' और अंग्रेजी के शब्द ‘ऐलम' का अर्थ फिटकरी है। इस फिटकरी से जो धातु अलग की जा सकी उसका नाम एल्युमिनियम पड़ा। फिटकरी वस्तुतः पोटैशियम सल्फेट और एल्युमिनियम सल्फेट, इन दोनों का द्विगुण यौगिक है।

सन् 1754 ई० में मारग्राफ नामक ब्रिटिश भौतिकविज्ञानी ने यह प्रदर्शित किया कि जिस मिट्टी को एल्यूमिनियम कहा जाता है, यह चूने से भिन्न है।

सर हफ्री डेबी नामक वैज्ञानिक ने सन् 1807 ई० में एल्यूमिनियम मिट्टी से धातु पृथक करने का प्रयत्न किया। पर आंशिक सफलता ही मिल पायी। सन् 1825 ई० में अटेंड ने एल्युमिनियम क्लोराइड को पोटैशियम के साथ गरम किया और फिर उसमें से अन्य तत्व को जलाकर उड़ा दिया। ऐसा करने पर जो चूर्ण बचा उसमें धातु की श्वेत चमक थी। यही धातु एल्युमिनियम कहलायी।

सन् 1845 ई० में फ्रेडरिह वोहलर नामक वैज्ञानिक ने इसमें नये प्रयोग करके यह पाया कि यह धातु बहुत हल्की और मुलायम है; इतनी कि इसके तार खींचे जा सकते हैं। पर उस समय भी इस धातु को अधिक मात्रा में प्राप्त करने की विधि सामने न आ सकी थी। अतः तब इसे काफी महंगी धातु के रूप में गहने के रूप में धारण किया गया। 

सन् 1886 ई० में ओहायो नगर (अमेरिका) के चार्ल्स मार्टिन हॉल नामक वैज्ञानिकन क्रायोलाइट में ऐल्युमिना घोला और उसमें से एल्युमिनियम धातु सहजता से पृथक कर ली। यह विधि अत्यंत सरल थी। अधिक मात्रा में एल्युमिनियम पाने का स्रोत थी। हल्की होने के साथ यह धातु सस्ते रूप में सबकी पहुंच में आ गयी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया देखे

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