आज एम्बुलेंस शहर, कस्बों में रोगियों के तत्काल उपचार में सहायक होती है। सन् 1930 में अमेरिका में अन्तिम संस्कार का बंदोबस्त करने वाले एम्बुलेंस सेवा चलाया करते थे। फिर एम्बुलेंस का उपयोग घायल सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से बाहर लाने के लिए किया गया।
यह बात सन् 1792 की है। युद्ध में घायल हुए सैनिक एम्बुलेंस के आविष्कार पहले वहीं पड़े कराहते रहते थे। कइयों की जान भी निकल जाती थी। कुछ को साथी सैनिक घसीट कर युद्ध क्षेत्र से बाहर पहुँचा आते थे। घायलों को घोड़ा गाड़ी में लिटाकर युद्ध क्षेत्र से बाहर लाने का विचार सबसे पहले नेपोलियन के व्यक्तिगत चिकित्सक बैरन डॉ. मिनिक जीन लैरी के दिमाग में उपजा। उन्होंने फ्रांसीसी सेना के प्रमुख सर्जन पियरे फ्रेंकोइस पर्सी के साथ मिलकर एम्बुलेंस कोर की स्थापना की। इसमें मोर्चे पर ही घायलों की देख-रेख के लिए सर्जन थे, स्ट्रेचर पर घायलों को लाने के लिए लड़के थे और एक घोड़े वाली एम्बुलेंस थी। सेना के हर डिवीजन में ऐसी 12 एम्बुलेंस थी।
नेपोलियन ने इस कोर का इस्तेमाल सन् 1796-97 के दौरान इटली के साथ युद्ध में किया। दुनिया भर में यह चर्चा का विषय बन गया। कई देशों की सेनाओं में एम्बुलेंस कोर बनायी गयी पर एम्बुलेंस कोर को मान्यता मिलने में लगभग 75 साल लग गये।
सन् 1864 में युद्ध के नियमों को बनाने के लिए हुए अन्तर्राष्ट्रीय जेनेवा समझौते में सेना की एम्बुलेंसों को मान्यता दी गयी और यह भी कहा गया कि युद्ध क्षेत्र में कार्यरत एम्बुलेंसों पर कोई भी पक्ष हमला नहीं करेगा। सन् 1870-71 के दौरान फ्रांस में कुछ अजीबो-गरीब एम्बुलेंसें दिखाई दीं। ये एम्बुलेंस हवाई रास्ते से घायलों को ले जाती थी। दरअसल ये गर्म हवा वाले गुब्बारे थे, जिनमें घायलों को लिटाकर उड़ा दिया जाता था। यह सोचकर कि ये युद्ध क्षेत्र के बाहर घायलों को किसी सुरक्षित स्थान पर पहुँचा देंगे। पर इनका भरोसा सही नहीं था। हवा के बहाव के साथ घायलों की किस्मत की बागडोर बंधी रहती। कई बार गड़बड़ी होने पर इनका उपयोग बंद कर दिया गया। मोटरकारों का प्रचलन होने पर घोड़े वाली एम्बुलेंस की जगह कार को एम्बुलेंस बनाया गया।
सेना ने पहली बार एम्बुलेंस का इस्तेमाल जुलाई 1900 ईस्वी में किया। आम नागरिकों के लिए भी फ्रांस में इसी साल मोटरकार वाली एम्बुलेंस का उपयोग शुरू हुआ। जैसे-जैसे चिकित्सा विज्ञान में प्रगति होती गयी एम्बुलेंस का रूप भी बदलता गया। आज की एम्बुलेंस आदमी की जान बचाने के पूरे साजों-सामान से लैस रहती है।
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