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अकरकरा के फायदे लाभ औषधीय गुण और नुकसान

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अकरकरा औषधीय गुणों से भरपूर भारतीय पौधा है जिसका उपयोग आयुर्वेदिक, यूनानी और अन्य जड़ी-बूटी आधारित चिकित्सा पद्धतियों में पुरुषों के रोग, सर्दी-जुकाम, दांतों के दर्द और पायरिया के इलाज में होता है। इसका वैज्ञानिक नाम एनेसाइक्लस पायरेथ्रम है।

अकरकरा में कामेच्छा को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इससे शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है। औषधि के तौर पर मुख्य रूप से इस पौधे की जड़ का इस्तेमाल होता है।

अकरकरा है कामेच्छा बढ़ाने में उपयोगी - 

अकरकरा (Anacyclus pyrethrum) में कामेच्छा को बढ़ाने वाले और शुक्राणु बढ़ाने वाले गुण होते हैं। यह एंड्रोजन के स्राव को प्रभावित करने के साथ-साथ एंड्रोजन अधिक बनाने में भी मदद करता है। अकरकरा की जड़ में अल्काइल-अमाइड (यह एक क्षारीय तत्व है) की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो टेस्टोस्टेरोन की मात्र बढ़ाने में सहायक होती है। अकरकरा प्रजनन क्षमता, शुक्राणु की मात्रा और पुरुषों में कामेच्छा बढ़ाता है।

अकरकरा दूर करे स्तम्भन दोष - 

नपुंसकता और स्तंभन दोष के इलाज के लिए अकरकरा अच्छा उपाय है। इसमें सिल्डेनाफिल के (स्तंभन दोष के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवा) जैसे ही गुण होते हैं, लेकिन यह ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ाता है। सिल्डेनाफिल की तुलना में अकरकरा में दुष्प्रभाव कम होते हैं।

यदि इलाज के लिए सिर्फ अकरकरा का ही उपयोग किया जाए तो कुछ सप्ताह बाद इसका असर कम होने लगता है। इसलिए अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इसका उपयोग अश्वगंधा और कौंच के बीज के चूर्ण के साथ किया जाना चाहिए।

अकरकरा से करे गले की खराश ठीक - 

अकरकरा के पानी के साथ गरारा करने से गले की खराश ठीक होती है। गरारे का पानी तैयार करने के लिए 250 मिलीलीटर पानी में 10 ग्राम अकरकरा की जड़ को उबालें। इस पानी से गरारे करने से फैरिन्जाइटिस (गले में दर्द और सूजन होना) की समस्या से भी राहत मिल सकती है। यह दांत दर्द और मसूड़ों की समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है।

अकरकरा है दांतों के लिए लाभकारी - 

इसका उपयोग दांतों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। कपूर के साथ अकरकरा की जड़ का चूर्ण मिलकर दांतों की मालिश करने से दांत का दर्द दूर होता है। दांत के दर्द से आराम पाने के लिए इसका इस्तेमाल काली मिर्च,  खुरासानी अजवाइन (हाइसीसिमस नाइजर) और इम्बेलिया राइबेस (Embelia Ribes) को मिलाकर भी किया जा सकता है।

अकरकरा दिलाए पायरिया से छुटकारा - 

यह जड़ी-बूटी पायरिया के इलाज में भी उपयोगी है। अकरकरा की जड़ का चूर्ण सरसों के तेल के साथ मिलाकर मसूढ़ों पर लगाने से पायरिया ठीक होता है।

अकरकरा है सर्दी-जुकाम का दुसमन -

सर्दी-जुकाम में अकरकरा की जड़ का चूर्ण काली मिर्च और पिप्पली के साथ लेने से आराम मिलता है  अकरकरा में एंटीवायरल गुण होते हैं इसलिए यह फ्लू के लक्षणों को कम करने के साथ साथ बंद नाक को खोलने में भी सहायक होता है।

अकरकरा दूर करे वाक् विकार - 
बच्चों में वाक् विकार (Speech Disorder) दूर करने के लिए 125 ग्राम अकरकरा की जड़ लें और इसे शहद के साथ मिलाकर जीभ पर लगाएं। बच्चे को बोलने में ज्यादा परेशानी हो या उपाय को और कारगर बनाने के लिए इस मिश्रण में 125 मिलीग्राम वच (Acorus Calamus) भी मिला सकते हैं।

अकरकरा है मिर्गी में उपयोगी - 
आयुर्वेद में अकरकरा की जड़ का उपयोग मिर्गी और दौरे पड़ने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। कुछ अध्ययनों के मुताबिक इसकी जड़ के अर्क में सुरक्षात्मक गुण होते हैं, इसलिए यह दौरे पड़ने की समस्या को रोकने में मदद कर सकता है।

अकरकरा के नुकसान - 
वेसे तो इसके नुकसान के बारे में कोई जायदा जानकारी नहीं है पर अकरकरा का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह नुकसानदायक को सकता है जैसे
  • अकरकरा का अधिक मात्रा में सेवन करने से लार की मात्रा बढ़ जाती है। 
  • इसके अधिक सेवन से मुंह में छाले (जब अकेले रूप से इसका उपयोग किया जाता है) हो सकते हैं। इससे छाती में जलन हो सकती है। 


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