मदार या आक औषधीय पौधा है जो पूरे भारत में बंजर जमीन, खुले तथा शुष्क क्षेत्र में अपने-आप उगता है। आक दुनिया भर में गर्म जलवायु, शुष्क, क्षारीय और रेतीले मिट्टी वाले हिस्सों में भी पाया जाता है। मुख्य रूप से इसकी दो किस्में हैं - कैलोट्रोपिस प्रोसेरा (बैंगनी-फुल) और कैलोट्रोपिस जिगांटे (सफेद-फूल)।
आक के पत्ते के फायदे जोड़ों के दर्द में -
यदि आप जोड़ों की समस्याओं से परेशान रहते हैं तो प्रभावित जगह पर आक की पत्तियों को बांधें।
इसमें प्रदाह (जलन-सूजन) कम करने वाले गुण होते हैं जो गठिया और संधिशोथ (Rheumatism) जैसी प्रदाह सम्बन्धी बीमारियों के इलाज में उपयोगी हैं। तुरंत राहत पाने के लिए इसकी पत्तियों को गर्म कर जोड़ों पर लगाएं।
आक का पेड़ के फायदे त्वचा के लिए -
चेहरे के दाग धब्बों का इलाज करने के लिए, 3 ग्राम हल्दी को आक के पौधे के दूध के साथ मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। इसके इससे खुजली से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। विभिन्न प्रकार के त्वचा रोगों का इलाज इससे हो सकता है।
आक के दूध के फायदे पाइल्स में -
यदि आप बवासीर की समस्या से पीड़ित हैं तो आपको आक का उपयोग करना चाहिए। बवासीर का इलाज करने के लिए, इस जड़ी बूटी का उपयोग बहुत ही लाभकारी होता है। इलाज के तौर पर बाहरी रूप से आक के दूध को बवासीर के ऊपर लगाएं।
आक के औषधीय गुण घाव भरने में -
इस पौधे के दूध को निकालें। अब इस दूध में हल्दी को मिक्स करें और त्वचा के प्रभावित क्षेत्र पर इस पेस्ट को लगाएं। इसके अलावा आप घावों पर मदार की पत्तियों को गरम करके लगाएं।
आक के पौधे के गुण दे दांत दर्द से छुटकारा -
यदि आप दांतों की किसी भी प्रकार की समस्या से परेशान हैं तो आपको आक उपयोग करना चाहिए। दांत दर्द से राहत पाने के लिए, आक के दूध को मसूड़ों पर लगाएं।
मदार के पत्ते के फायदे करे पांव के छाले दूर
यदि पैर में छाले हों तो आक के पौधे के रस का उपयोग करें। पैर के छालों को ठीक करने के करने लिए छालों के ऊपर आक का दूध लगाएं। इससे तुरंत राहत मिलेगी।
मदार के पत्ते के गुण हैजा में लाभदायक -
हैजा के इलाज के लिए इस पौधे की जड़ की छाल को अच्छे से साफ करें। इन्हें सुखाकर इसका चूर्ण तैयार करें। अब इसमें अदरक का रस और काली मिर्च का चूर्ण मिला करें। इस मिश्रण से मटर के आकार की गोलियों बनाएं। और हर दो घंटे बाद एक गोली, एक चम्मच पुदीने के रस के साथ लें। इससे बुखार भी ठीक होगा।
मदार के पत्ते के लाभ करे बांझपन दूर -
महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने में आक उपयोगी हो सकता है। इसके लिए सफेद फूल वाले आक की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। एक गिलास गाय के दूध के साथ 1-2 ग्राम आक के पाउडर का सेवन करना लाभदायक हो सकता है।
आक के गुण कान की बीमारियों के लिए -
पीले रंग की आक की पत्तियों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें और इसका चौथाई कप रस निकाल लें। अब इसमें एक चौथाई कप तिल का तेल मिलाएं। इसमें चौथाई चम्मच लहसुन, कैलामस, दालचीनी और हिंग भी मिलाएं। कम आंच पर अच्छे से पका लें। अब ठंडा होने के बाद एक बोतल में रख लें। अब इस मिश्रण की कुछ बूंदें कान में डालें। इससे कान की तकलीफ कम होने लगेगी।
इसके अलावा आक की पत्तियों पर घी लगाकर गरम करें। अब इसका रस निकालकर कान में डाल सकते हैं।
मदार आक के नुकसान -
आक का अधिक मात्रा में सेवन हानिकारक है।
- इसमें कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो हृदय को प्रभावित कर सकते हैं। (और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज)
- इससे उल्टी आ सकती है या दस्त लग सकते हैं।
- हृदय की धड़कन धीमी हो सकती है, चक्कर आ सकता है और विशेष परिस्थितियों में मृत्यु तक हो सकती है।
- गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान भी इसके सेवन से बचें।

