गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।

हर चमकती चीज सोना नहीं होती-ईसप की कहानी

Image SEO Friendly

एक बार एक बारहसिंगा तालाब के किनारे पानी पी रहा था। अभी वह दो-तीन घूंट पानी ही पी पाया था कि तभी उसे पानी में अपनी छाया दिखाई दी।
अपने सींगों को देखकर वह सोचने लगा—‘मेरे सींग कितने सुंदर हैं। किसी दूसरे जानवर के सींग इतने सुंदर नहीं हैं।’ इसके बाद उसकी नजर अपने पैरों पड़ी। अपने पतले और सूखे पैरों को देखकर उसे बेहद दुख हुआ। उसने सोचा—‘मेरे पैर कितने दुबले-पतले और भद्दे हैं।’

पानी पीकर वह कुछ कदम आगे बढ़ा था कि उसके कानों में बिगुल की आवाज सुनाई दी। वह समझ गया कि शिकारी उसकी ताक में हैं। जान बचाने की फिक्र में वह जितना तेज दौड़ सकता था, दौड़ा। उसके चपल वह फुरतीले पैर शीघ्र ही उसे शिकारियों की पहुंच से दूर ले गए।
वह तेजी से दौड़ता ही जा रहा था और अब घने जंगल में वहां पहुंच गया था जहां घने पेड़ व लम्बी-लम्बी झाड़ियां उगी हुई थीं।

तभी उसके सींग घनी झाड़ियों में उलझ गए और न चाहते हुए भी उसे रुकना पड़ा। सींग कुछ ऐसे उलझ गए थे कि वह हिल भी नहीं पा रहा था। शिकारी भी पास आते जा रहे थे और बारहसिंगा भी सींग छुड़ाने का असफल प्रयास कर रहा था। शिकारी उसके पास जा पहुंचे थे और सरलता से उसका शिकार कर सकते थे।
अब बारहसिंगा मौत के मुंह में खड़ा था, समझ गया था कि अंत अब निकट ही है।
उसने कातर दृष्टि से शिकारियों की ओर देखा, लेकिन वे उसे क्यों छोड़ने वाले थे।
तभी एक तीर आकर उसे लगा और वह जमीन पर गिर पड़ा।

वह सोच रहा था, ‘मैं अपने पैरों को देखकर खुश नहीं था, जबकि इन्होंने ही मेरी जान बचाने की कोशिश की; और मेरे यह सुन्दर सींग...इन्हीं की वजह से मुझे शिकारियों के हाथों मरना पड़ रहा है।’
यह सोचते-सोचते ही बारहसिंगे ने प्राण त्याग दिए।

निष्कर्ष: हर चमकती चीज जरूरी नहीं कि सोना ही हो।

(ईसप की कहानियाँ - अनिल कुमार)

”go"