पूरे विश्व में डायबिटीज ग्रषित लोगो की संख्या बढ़ती जा रही है। पुरे विश्व में लगभग 35 करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रषित हैं है। इनमें से करीब 6.3 करोड़ अकेले भारत में हैं। डायबिटीज से जुड़े मामलों में भारत दूसरे नंबर पर है।
डायबिटीज किस प्रकार होता है:
जब हमारे शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन कम मात्रा में पहुंचने लगता है तब हमारे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। इस स्थिति में मनुष्य डायबिटीज से ग्रषित हो जाता है। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है जोकि पाचक ग्रंथि द्वारा बनता है। इन्सुलिन हमारे द्वारा खाये गए भोजन को ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है। मधुमेह हो जाने पर शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है।
डायबिटीज बच्चों, महिलाओं और पुरुषों में पाई जाने वाली आम बीमारी होती जा रही है । डायबिटीज दो प्रकार की होती है टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़।
इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मेलिटस ( टाइप 1 डायबिटीज़ )
आमतौर पर यह बचपन या युवावस्था में होता है। सामान्यतया इस तरह के मरीज बहुत पतले होते हैं और किसी वायरल संक्रमण के बाद इस रोग से ग्रषित हो जाते हैं। कोशिकाएं विकसित करने वाले पैन्क्रिया पहले ही खराब हो चुके होते हैं और इंसुलिन की आवश्यक मात्रा उत्पन्न नहीं कर पाते। इसीलिए इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए इंसुलिन लेना आवश्यक हो जाता है। टाइप 1 डायबिटीज़ में प्रतिरक्षा प्रणाली पाचनग्रंथियां में इन्सुलिन पैदा कर बीटा कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देती है। इस स्थिति में पाचन ग्रंथिया कम मात्रा में या ना के बराबर इन्सुलिन पैदा करती हैं। टाइप 1 डायबिटीज़ के मरीज़ को जीवन के निर्वाह के लिए प्रतिदिन इन्सुलिन की आवश्यकता होती है। यह बीमारी सामान्यतया 12 से 25 साल से कम अवस्था में देखने को मिलती है।
नॉन इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज मेलिटस (टाइप 2 डायबिटीज़ )
डयबिटीज के रोगियों में लगभग 95 प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रषित होते है। इस प्रकार का रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तथा काफी लंबे समय तक इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। टाइप २ डायबिटीज के लक्षण अधिकाशतः वृद्धावस्था में दिखाई देते हैं। लगभग 50 प्रतिशत लोगों को अधिक मोटापे के कारण टाइप 2 डायबिटीज़ होने की सम्भावना रहती है। टाइप 2 डायबिटीज़ में पाचन ग्रन्थियो में अधिक मात्रा में इन्सुलिन उत्पन्न होने लगता है और बिना किसी कारण के शरीर इन्सुलिन का प्रयोग करने मे सफल नहीं होता।जिसके चलते शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जिसको नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होता है। इस स्थिति में पीडि़त व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है, बार-बार मूत्र लगना और लगातार भूख लगना जैसी समस्यायें होती हैं।


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