बैसाखी का पर्व कृषि से जुड़ा पर्व माना जाता है, इस दिन से ही किसान अपनी फसल काटना शुुरु करते हैं व पहली फसल को भगवान जी के चरणों में चढाते हैं। बैसाखी का पर्व उत्तर भारत का प्रमुख पर्व है, इसे पूरे उत्तर भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। इस पर्व के जरुरी प्रकृति का भी आभार व्यक्त किया जाता है।
बैसाखी के पर्व को अलग-अलग जगहों पर अलग अलग नामो से पुकारने के साथ ही इसे मनाने का तरीका भी अलग अलग है।बैसाखी को असम में बीहू, बंगाल में नब बर्षा, तमिल नाडू में पुथांडू, केरल में पूरन विशु और बिहार में वैसाख के नाम से जाना जाता है।
सिख समुदाय के लिए तो बैसाखी बहुत ही बड़ा पर्व है। इस दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। 13 अप्रैल 1699 के दिन गुरु गोबिंद सिंह ने सबसे पहले 5 प्यारों को अमृत पान करवाया था। इसके साथ ही पांच प्यारों के हाथ से स्वयं भी अमृत पान किया था। जिसके बाद सिखों को दुनियाभर में एक अलग पहचान मिली।
गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1666 में पौष सुदी सप्तमी के दिन पटना शहर में हुआ। इनका बचपन का नाम गोविन्द राय था। इनके जन्म के समय गुरु तेग बहादुर असम में थे। कुछ समय बाद ये पंजाब आ गये थे। जिस समय गुरु तेग बहादुर जी शहीद हुए थे, उस समय गोबिंद सिंह केवल पंद्रह वर्ष के थे। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया। जिसके बाद इन्होंने लोगों को अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के बारे में सोचा।




