सरसों के तेल के बारे में लगभग हर कोई जानता है। कई लोग इसे खाना बनाने में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह तेल सिर्फ भोजन बनाने तक ही सीमित नहीं है। यह तेल शरीर की कई छोटी-बड़ी समस्याओं से निजात दिला सकता है। इस खास लेख में हमारे साथ जानिए सरसों तेल के शारीरिक फायदों और इस्तेमाल करने के विभिन्न तरीकों के बारे में। आइए जानते हैं कि भोजन बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला यह तेल आपको किस प्रकार फायदा पहुंचा सकता है।
क्या है सरसों का तेल? –
सरसों के तेल को सरसों (पौधा) के बीजों से निकाला जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्रेसिका जुनसा है, जिसे विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे मस्टर्ड, तेलुगु में अवन्यून, मलायम में कदुगेना और मराठी में मोहरीच कहा जाता है। सरसों के बीज भूरे, लाल और पीले रंग के होते है। मशीनों की मदद से इनमें से तेल निकाला जाता है। भारत में इसका प्रचलन ज्यादा है और प्रतिदिन बनने वाले भोजन में इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह तेल जायका बढ़ाने के साथ-साथ भोजन को पौष्टिक भी बनाता है।
सरसों के तेल के प्रकार –
रिफाइंड सरसों का तेल-
सरसों के बीजों से यह तेल मशीनों के जरिए निकाला जाता है। इसका स्वाद कड़वा होता है। इस प्रकार के तेल का इस्तेमाल भारत में खाना बनाने के लिए किया जाता है। रिफाइंड सरसों का तेल काले, भूरे या सफेद सरसों के बीजों से निकाला जाता है।
ग्रेड-1 (कच्ची घानी)
इसे आमतौर पर कच्ची घानी के नाम से जाना जाता है। यह सरसों के तेल का शुद्ध रूप है और यही वजह है कि अधिकतर भारतीय गृहणी भोजन बनाने के लिए इसी तेल का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। इस प्रकार का सरसों का तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
ग्रेड-2
इस तेल का इस्तेमाल भोजन बनाने के लिए नहीं, बल्कि थेरेपी के लिए किया जाता है।
1. जोड़ों का दर्द/ गठिया/ मांसपेशियों का दर्द
आज से नहीं, बल्कि वर्षों से सरलों का तेल जोड़ों और मांसपेशियों में होने वाले दर्द के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। नियमित रूप से इस तेल की मालिश करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बना रहता है और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द की समस्या नहीं रहती।
गठिया से होने वाले दर्द के लिए यह तेल फायदेमंद है। सरसों के तेल में बड़ी मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो जोड़ों और गठिया के दर्द के लिए एक कारगर एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है ।
2. हृदय स्वास्थ्य
यह तथ्य शायद आपको अजीब लगे कि तेल का सेवन किस प्रकार ह्रदय के लिए फायदेमंद है, लेकिन सरसों का तेल इस मामले में गुणकारी है। दरअसल, सरसों का तेल मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड के साथ-साथ ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड से समृद्ध होता है। ये दोनों फैट मिलकर इस्केमिक हृदय रोग (रक्त प्रवाह की कमी के कारण) की आशंका को 50 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।
सरसों के तेल को हाइपोकोलेस्टेरोलेमिक (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला) और हाइपोलिपिडेमिक (लिपिड-लोअरिंग) प्रभाव के लिए भी जाना जाता है । यह खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है।
3. कैंसर
सरसों तेल को जोड़ों जैसी आम समस्या से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि सरसों के तेल में कैंसर से लड़ने वाले गुण मौजूद होते हैं। साउथ डकोटा यूनिवर्सिटी का एक अध्ययन भी यही साबित करता है। उन्होंने कोलन कैंसर से प्रभावित चूहों पर सरसों, मकई और मछली के तेल के असर का परीक्षण किया। कोलन कैंसर को रोकने में मछली के तेल की तुलना में सरसों का तेल अधिक प्रभावी पाया गया।
4. सर्दी और खांसी
सर्दी और खांसी के लिए सरसों का तेल लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका हीटिंग गुण बंद नाक को खोलने का काम करता है। सर्दी और खांसी के इलाज के लिए आप चार-पांच चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की दो कलियां डालकर गर्म कर लें। फिर इससे छाती और पीठ पर अच्छी तरह मालिश करें। इसके अलावा, आप सर्दी-खांसी के लिए रात में सोने से पहले हल्के गर्म सरसों तेल की एक-दो बूंद नाक में डाल सकते हैं ।
5. दांत संबंधी समस्या
सरसों तेल के फायदे यहीं खत्म नहीं होते, आप दांत संबंधी समस्याओं के लिए भी इसका बेहिचक इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए मसूड़ों की सूजन और पेरियोडोंटाइटिस (मसूड़ों से जुड़ा संक्रमण) से निजात पाया जा सकता है । इस्तेमाल करने के लिए आप आधा चम्मच सरसों का तेल, एक चम्मच हल्दी और आधा चम्मच नमक मिलाकर पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट से दांतों और मसूड़ों पर कुछ मिनट तक मालिश करें। हफ्ते में तीन-चार बार यह प्रक्रिया आप दोहरा सकते हैं।
6. अस्थमा
सरसों के तेल का उपयोग करके अस्थमा के लक्षणों और प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। सरसों के तेल में मौजूद सेलेनियम अस्थमा के प्रभावों को रोकने का काम करता है । अस्थमा के दौरे के दौरान फेफड़ों में वायु प्रवाह को बढ़ाने के लिए आप छाती पर भूरे सरसों के तेल की मालिश कर सकते हैं या एक चम्मच सरसों के तेल के साथ एक चम्मच कपूर मिलाकर छाती पर रगड़ सकते हैं।
7. ब्रेन फंक्शन को करता है बूस्ट
सरसों का तेल फैटी एसिड से समृद्ध होता है , जो ब्रेन फंक्शन को बूस्ट करने और तनाव से मुक्त करने के लिए जाना जाता है। सरसों का तेल याददाश्त को बढ़ाने के लिए कारगर माना जाता है। सरसों तेल की यह खासियत बच्चों के लिए काफी लाभदायक है।
8. एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी
सरसों का तेल एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से समृद्ध होता है। इसमें मौजूद सेलेनियम एक कारगर एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट की तरह काम करता है, जो गठिया और जोड़ों के दर्द से निजात दिलाने का काम करता है। सरसों के तेल में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी गुण डिक्लोफेनाक के निर्माण में भी सहयोग करता है, जो एक एंटीइंफ्लेमेटरी दवा है ।
सरसों के तेल में मौजूद ग्लुकोसिनोलेट अनावश्यक बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं के पनपने से रोकता है। इसके अलावा, सरसों के तेल में शक्तिशाली एंटीफंगल गुण होता है , जो फंगल के कारण त्वचा पर होने वाले रैशेज और संक्रमण का इलाज करने का काम करता है।
9. कीट निवारक
सरसों तेल का कीट निवारक के रूप में भी काम करता है। त्वचा पर सरसों का तेल लगाने से मच्छर आपसे दूर रहेंगे। एक अध्ययन के अनुसार यह गुणकारी तेल एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के प्रभाव को भी बेअसर कर सकता है ।
10. फटे होंठ का इलाज
सरसों के तेल को फटे होठों का इलाज करने में भी कारगर माना गया है। बस आपको सोने से पहले तेल की दो-तीन बूंद होठों पर लगानी होंगी। नियमित रूप से इस प्रक्रिया को करने से आप फटे होठों की समस्या से बचे रहेंगे ।
11. संपूर्ण स्वास्थ्य
सरसों का तेल एक गुणकारी खाद्य सामग्री है, जो हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि यह खास तेल सर्दी-खांसी जैसी सामान्य समस्या से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी हमारी सुरक्षा करता है। सरसों का तेल कोलेस्ट्रोल स्तर को नियंत्रित कर शरीर के सबसे अहम भाग ह्रदय को भी स्वस्थ्य रखने का काम करता है। आंतरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सरसों त्वचा को भी संक्रमण से दूर रखता है। फटे होंठ व त्वचा पर रैशेज के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है ।
त्वचा के लिए सरसों के तेल के फायदे –
शरीर को अंदर से मजबूत करने के साथ-साथ सरसों का तेल त्वचा को संक्रमण से दूर रखता है। नीचे जानिए यह खास गुणकारी तेल किस प्रकार आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद है।
1. सन टैन और दाग-धब्बे
सन टैन और चेहरे के दाग-धब्बों के लिए भी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमित रूप से चेहरे की तेल से मसाज करने से टैन और दाग-धब्बे कम हो जाते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल :
- एक छोटा चम्मच सरसों का तेल, तीन चम्मच काबुली चने का आटा, एक चम्मच दही और तीन-चार बूंद नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
- अब इस पेस्ट को चेहर और गले पर अच्छी तरह लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
- अब साफ पानी से चहरे को धो लें।
- यह प्रक्रिया आप हफ्ते में दो से तीन बार दोहरा सकते हैं।
2. नैचुरल सनस्क्रीम
धूप में बाहर निकलने से अक्सर त्वचा झुलस जाती है। सूरज की तेज किरणें त्वचा पर नकारात्मक असर डालती हैं। खासकर, महिलाएं इस समस्या को लेकर चिंतित रहती हैं। इस स्थिति में सरसों का तेल आपकी मदद कर सकता है। सरसों का तेल विटामिन-ई से समृद्ध होता है (। जब आप इसे त्वचा पर लगाते हैं, तो यह सूरज की पराबैंगनी किरणों से त्वचा को सुरक्षित रखता है। इसके अलावा, विटामिन-ई त्वचा को हाइड्रेट करने का काम भी करता है।
कैसे करें इस्तेमाल :
जब भी आप घर से बाहर निकलें, सरसों के तेल की कुछ मात्रा अपनी त्वचा पर लगाएं। ध्यान रहें कि त्वचा पर ज्यादा तेल न लगाएं, क्योंकि ऐसा करने से बाहरी धूल-कण त्वचा पर चिपक सकते हैं। इसका इस्तेमाल आप एक नैचुरल सनस्क्रीम की तरह कर सकते हैं।
3. एंटी-एजिंग
सरसों का तेल त्वचा के लिए एंटी एजिंग प्रभाव के लिए भी जाना जाता है। इसमें विटामिन-ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो झुर्रियों से छुटकारा दिलाने का काम करता है।
कैसे करें इस्तेमाल :
रोज रात को सोने से पहले एक चम्मच सरसों के तेल में नारियल का तेल मिलाकर चेहरे और गले पर लगाएं और सुबह साफ पानी से धो लें।
4. चकत्ते और संक्रमण
इस लेख में पहले भी बताया गया है कि सरसों के तेल में शक्तिशाली एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। ये सभी गुण त्वचा से चकत्ते और संक्रमण को दूर करने का काम करते हैं । एलर्जी और त्वचा के सूखेपन के लिए भी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे करें इस्तेमाल :
हफ्ते में तीन-चार बार सरसों के तेल से पूरे शरीर पर मालिश करें। इस प्रकार आप त्वचा के संक्रमण से दूर रहेंगे। यह तेल आपकी संक्रमित त्वचा को हाइड्रेट करने का काम करेगा।
बालों के लिए सरसों के तेल के फायदे
सेहत और त्वचा के अलावा सरसों का तेल बालों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। नीचे जानिए बालों के लिए सरसों तेल के विभिन्न फायदों के बारे में –
1. बढ़ाता है बालों को
अगर आप बालों की समस्या से परेशान हैं, तो सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। ये दोनों मिलकर बालों को पोषित करते हैं और बढ़ने में मदद करते हैं (16)। सरसों तेल में मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण बालों को झड़ने से रोकते हैं (11)।
कैसे करें इस्तेमाल :
रोज रात को सोने से पहले सरसों तेल से अच्छी तरह सिर की मसाज करें। खासकर स्कैल्प पर तेल ठीक से लगाएं।
2. रूसी और स्कैल्प में खुजली के लिए
रूसी और स्कैल्प में खुजली के लिए भी सरसों तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरसों के तेल में मौजूद एंटीफंगल गुण रूसी को दूर कर स्कैल्प को स्वस्थ रखने का काम करता है।
कैसे करें इस्तेमाल :
- बराबर मात्रा में सरसों और नारियल का तेल मिलाएं और 10 से 15 मिनट तक सिर की मसाज करें।
- मालिश के बाद दो घंटे तक तौलिये से बालों को ढक कर रखें।
- अब बालों को शैंपू से धो लें।
- यह प्रक्रिया आप हफ्ते में तीन बार कर सकते हैं।
3. सफेद बालों की समस्या
रूसी और बाल झड़ने के अलावा सरसों का तेल सफेद बालों की समस्या से भी निजात दिलाता है। अगर आप असमय सफेद बालों से परेशान हैं, तो इस खास तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल :
- रात को सोने से पहले सरसों के तेल से सिर की मसाज करें।
सरसों के तेल में मौजूद पौष्टिक तत्व –
सरसों के तेल का उपयोग –
शाकाहारी और मांसाहारी जायकेदार व्यंजन बनाने के लिए आप सरसों तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर मसालेदार भोजन में इसकी अहम भूमिका होती है। आप इसे नींबू और शहद के साथ सलाद में डालकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नीचे हम कुछ लजीज व्यंजन आपको बता रहे हैं, जिसे आप इच्छानुसार बना सकते हैं –
1. आम का अचार
सामग्री :
- 500 ग्राम कच्चे आम के टुकड़े
- 100 ग्राम सरसों का तेल
- एक चम्मच हींग
- 50 ग्राम सरसों के बीज
- आधा चम्मच सूखा अदरक पाउडर
- आधा चम्मच हल्दी पाउडर
- 100 ग्राम लहसुन लौंग
- 50 ग्राम लाल मिर्च पाउडर
- स्वादानुसार नमक
प्रक्रिया :
- आम के टुकड़ों को नमक और हल्दी से मेरिनेट करें और रातभर के लिए छोड़ दें।
- अगले दिन बचा पानी निकालें और धूप में आम के टूकड़ों को सुखाएं।
- लहसुन की कलियों को भूनें।
- सरसों के तेल को गर्म करें और ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
- जब आम के टुकड़े पूरी तरह से सूख जाएं, तो उन्हें लहसुन, लौंग, तेल और सभी मसालों के साथ मिलाएं और अचार को जार में स्टोर करें।
2. तंदूरी पनीर टिक्का
सामग्री :
250 ग्राम पनीर
एक शिमला मिर्च (हरा, लाल या पीला)
एक प्याज
मैरिनेशन के लिए सामग्री :
- 200 ग्राम गाढ़ा दही
- एक बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
- एक चम्मच अजवाइन
- एक-दो चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- आधा चम्मच हल्दी पाउडर
- एक चम्मच जीरा पाउडर
- एक चम्मच धनिया पाउडर
- आधा चम्मच गरम मसाला पाउडर
- एक चम्मच आमचूर
- एक चम्मच चाट मसाला
- आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर (वैकल्पिक)
- आधा चम्मच नींबू का रस
- एक बड़ा चम्मच सरसों का तेल
- आधा चम्मच काला नमक (वैकल्पिक)
- नमक (आवश्यकतानुसार)
प्रक्रिया :
- पनीर और सब्जियों को चौकोर टुकड़ों में काट लें और एक तरफ रख दें।
- एक कटोरे में दही को अच्छी तरह फैंट लें।
- दही में अदरक-लहसुन का पेस्ट, अजवाइन, नमक और अन्य मसाले डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
- कटी सब्जी और पनीर को दही वाले मैरिनेड में डालें और उन्हें अच्छी तरह से कोट करें।
- अब रेफ्रिजरेटर में दो या अधिक घंटे के लिए इस मैरिनेशन के लिए छोड़ दें।
- रेफ्रिजरेटर से निकालें और पनीर व सब्जी को सीख में लगाएं।
पनीर टिक्का बनाएं :
- 240 डिग्री तापमान पर 15 मिनट के लिए ओवन को गर्म कर लें।
- फिर सीक में लगे पनीर व सब्जियों को ओवन के अंदर रख दें और ब्रश की मदद से उन पर सरसों तेल लगाते रहें।
- टिक्कों को 15 से 20 मिनट तक सेंक लें, ताकि उनका रंग सुनहरा हो जाए।
- दोबारा 10 से 15 मिनट के लिए टिक्कों को बेक करें।
- अब टिक्कों को निकाल लें।
- नींबू का रस निचोड़ें और चाट मसाले का छिड़काव करें।
- लीजिए आपका गर्मा-गर्म पनीर टिक्का तैयार है।
अन्य इस्तेमाल :
- टैन, बढ़ती उम्र के निशान, खुजली और त्वचा की लालिमा का इलाज करने के लिए आप आवश्यकतानुसार तेल 10 मिनट के लिए प्रभावित जगह पर लगाएं।
सरसों के तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से त्वचा को पोषण मिलता है और शरीर को आराम मिलता है।
बालों की बढ़त और रोम को मजबूत करने के लिए आप आवश्यकतानुसार सरसों तेल को मेंहदी की पत्तियां के साथ गर्म करें और ठंडा होने पर बालों व स्कैल्प पर लगाएं।
सरसों के तेल को लम्बे समय तक सुरक्षित कैसे रखें? –
सरसों का तेल आवश्यकतानुसार मात्रा में ही खरीदें। अगर तेल को अच्छी तरह स्टोर किया जाए, तो इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल को हमेशा एयरटाइट कंटेनर और घर के सामान्य तापमान में ही रखें।
सरसों के तेल के नुकसान –
तेल की अधिक मात्रा का सेवन निम्नलिखित बीमारियों का कारण बन सकता है :
- सरसों तेल का अधिक सेवन लंग्स कैंसर का कारण बन सकता है
- सरसों के तेल में इरुसिक नाम का एसिड मौजूद होता है, जो ह्दय को नुकसान पहुंचा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार इरुसिक एसिड ह्रदय की मांसपेशियों में लिपिडोसिस (ट्राइग्लिसराइड्स का जमाव) का कारण बन सकता है और ह्रदय के टिशू को क्षतिग्रस्त कर सकता है। ट्राइग्लिसराइड्स फैटी एसिड और ग्लिसरॉल से बनने वाले केमिकल कंपाउंड होते हैं ।
दोस्तों, अगर आप लेख में बताई गई किसी भी समस्या से पीड़ित हैं, तो आप सीमित मात्रा में सरसों तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक सुरक्षित प्राकृतिक उपाय है, जो आपकी पूरी तरह से मदद करेगा। वहीं, अगर आपकी शारीरिक समस्या जटिल रूप ले चुकी है, तो आप डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। सरसों तेल पर लिखा हमारा यह लेख आपको कैसा लगा, हमें नीचे कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें। साथ ही इस विषय से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए आप हमसे सवाल भी पूछ सकते हैं, जिसका हम तथ्याें सहित जवाब देने का प्रयास करेंगे।


