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जोड़ों में दर्द के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

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जोड़ों में दर्द होना आम समस्या है। यह बढ़ती उम्र, खेलकूद के दौरान लचक या मोच और सोते समय मांसपेशियों के खिंचाव आदि के कारण ऐसा हो सकता है। हालांकि, जोड़ों का दर्द अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन अन्य बीमारियों का लक्षण जरूर हो सकता है इस लेख में हम जोड़ो में दर्द से जुड़े हर सवाल का जवाब जानने का प्रयास करेंगे। इस लेख में आप जोड़ों में दर्द के कारण और लक्षण के बारे में जानेंगे। इसके अलावा, जोड़ों में दर्द का घरेलू उपचार भी आपके साथ शेयर करेंगे। हां, अगर किसी की समस्या गंभीर है, तो इन उपायों के साथ-साथ मेडिकल ट्रीटमेंट व संतुलित आहार का सेवन करना भी जरूरी है।

जोड़ों में दर्द क्या है? – 
जोड़ों में दर्द को चिकित्सकीय भाषा में अर्थ्राल्जिया कहा जाता है, जो एक साथ एक से ज्यादा जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। जोड़ों में दर्द अपने आप में किसी प्रकार की बीमारी नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों के लक्षणों में शामिल है । कई प्रकार की परिस्थितियों में किसी जोड़ों या हड्डियों पर चोट लगने, सूजन या डीजेनरेटिव रोगों की वजह से जोड़ों का दर्द हो सकता है । यह अर्थराइटिस, मांसपेशियों में समस्या या बर्साइटिस जैसी समस्याओं की वजह से भी हो सकता है 

जोड़ों में दर्द के कारण – 
जोड़ो में दर्द के एक नहीं, बल्कि कई कारण हो सकते हैं, जैसे  :
  • रुमेटाइड गठिया (हड्डियों के टिश्यू में सूजन) या ल्युपस (एक प्रकार का ऑटोइम्यून रोग)
  • बर्साइटिस (हड्डियों और मांसपेशियों के बीच मौजूद तरल पदार्थ से भरी थैली में सूजन)
  • घुटनों के टिश्यू की क्षति (एंटीरियर नी पैन)
  • गाउट (खून में यूरिक एसिड बढ़ जाने से जोड़ों में सूजन)
  • वायरल संक्रमण
  • फ्रैक्चर
  • ऑस्टियोअर्थराइटिस
  • ऑस्टियोमाइलाइटिस (हड्डियों में संक्रमण)
  • सेप्टिक अर्थराइटिस (जोड़ों में संक्रमण)
  • टेंडन में सूजन
  • असाधारण तरीके से खिंचाव या मोच
जोड़ों में दर्द के लक्षण – 
जोड़ों के दर्द के लक्षण कुछ इस तरह से हो सकते हैं 
  • सूजन
  • जोड़ों के आसपास गर्माहट महसूस होना
  • जोड़ों में नरमाहट आना
  • लालपन
  • जोड़ों के हिलाने पर दर्द होना
जोड़ों में दर्द के लिए घरेलू उपाय – 
जोड़ों का दर्द बढ़ने से पहले इसका मेडिकल ट्रीटमेंट करवाना जरूरी है। चिकित्सकीय इलाज के साथ-साथ नीचे बताए गए उपाय जोड़ों में दर्द का घरेलू उपचार करने में मदद कर सकते हैं।
1. मसाज
सामग्री :
  • लैवेंडर/ऑरेगैनो ऑयल की कुछ बूंदें
विधि  :
  • लैवेंडर/ऑरेगैनो ऑयल की कुछ बूंदों को प्रभावित जगह पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें।
कैसे काम करता है :
एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की ओर से प्रकाशित शोध के अनुसार, लैवेंडर ऑयल से की गई अरोमाथेरेपी मसाज ऑस्टियोअर्थराइटिस (घुटनों के दर्द) से आराम दिलाने में मददगार साबित हो सकती है । जोड़ों में दर्द का घरेलू उपचार करने के लिए ऑरेगैनो ऑयल का उपयोग भी किया जा सकता है। ऑरेगैनो में मौजूद कारवाक्रोल नाम के मोनोटेरेपिक फिनोल कंपाउंड में एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द के कारण होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं ।

2. हॉट एंड कोल्ड कंप्रेस
सामग्री :
  • हॉट एंड कोल्ड कंप्रेस बैग
विधि :
  • हॉट एंड कोल्ड कंप्रेस बैग से प्रभावित हिस्सों की सिकाई करें।
कैसे काम करता है :
हॉट एंड कोल्ड कंप्रेस की इस पद्धति को थर्मोथेरेपी कहा जाता है। इसमें जोड़ों में दर्द पर ठंड और गर्म दोनों का प्रभाव एक साथ पड़ता है। कोल्ड थेरेपी का प्रभाव जोड़ों के दर्द, सूजन और मांसपेशियों की अकड़न को कम करने का काम करता है। वहीं, हीट थेरेपी टिश्यू में इलास्टिसिटी को बढ़ाकर जोड़ों का दर्द कम करने में मदद करती है। ये दोनों ही थेरेपी शरीर में रक्त के संचार को बढ़ाती है, जिससे दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है ।
3. हल्दी
सामग्री :
  • एक चम्मच हल्दी
  • एक गिलास दूध
विधि :
  • एक गिलास गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी मिला कर पिएं।
कैसे काम करता है :
हल्दी को वर्षों से मसालों के साथ एक प्रभावी दवा के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है। जोड़ों में दर्द का घरेलू इलाज करने के लिए हल्दी वाले दूध का सेवन किया जा सकता है। इसमें करक्यूमिन नामक एक तत्व पाया जाता है। यह एक एंटीइन्फ्लेमेटरी कंपाउंड होता है, जो जोड़ों में दर्द के लक्षण जैसे सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। सूजन के साथ यह दर्द को भी कम करने में मदद कर सकता है ।

4. एप्सम सॉल्ट
सामग्री :
  • दो कप एप्सम सॉल्ट
  • एक बाथटब गुनगुना पानी
विधि :
  • एक बाथटब गुनगुने पानी में दो कप एप्सम सॉल्ट मिला लें।
  • लगभग 15-20 मिनट तक इस बाथटब में बैठें।
  • बाद में साफ पानी से नहा लें।
कैसे काम करता है :
एप्सम सॉल्ट एक तरह का एनाल्जेसिक एजेंट, जो दर्द को कम करने का काम करता है। एप्सम सॉल्ट पानी में आसानी से घुल जाता है और मांसपेशियों के दर्द व अकड़न से आराम दिलाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, एप्सम सॉल्ट वाले पानी में बैठने से जोड़ों की सूजन को कम करने में भी मदद मिल सकती है ।

5. लसहुन
सामग्री  :

  • लसहुन की 10 कलियां
  • 5 चम्मच सरसों का तेल
विधि :
  • लसहुन की कलियों को सिलबट्टे की मदद से कूट लें।
  • एक छोटे पैन में सरसों का तेल डालें और उसमें कुचले हुए लसहुन को डालकर गर्म कर लें।
  • जब लसहुन का रंग भूरा हो जाए, तो गैस बंद कर दें और तेल को गुनगुना होने के लिए रख दें।
  • गुनगुना हो जाने के बाद इस लसहुन के तेल को प्रभावित जोड़ों पर लगभग 20 मिनट तक मसाज करें।
  • मसाज करने के बाद कुछ देर आराम करें।
  • आखिरी में गुनगुने पानी से नहा लें।
कैसे काम करता है :
लसहुन एलियम का हिस्सा है और शोध में पाया गया है कि इस परिवार की सब्जियां हिप्स जॉइंट के दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। लसहुन को कूटने या काटने से उसमें मौजूद एलीसिन (allicin) नाम का कंपाउंड एक्टिव हो जाता है। यह कुछ अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड के साथ मिलकर जोड़ों का दर्द कम कर सकता है, हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

6. बिच्छु बूटी (नेटल लीफ)
विधि :
  • थोड़ी-सी ताजी बिच्छु बूटी को दर्द से प्रभावित जोड़ पर लगाएं।
कैसे काम करता है :
जोड़ो में दर्द का घरेलू इलाज करने के लिए बिच्छु पत्ती (नेटल लीफ) का उपयोग किया जा सकता है। बिच्छु पत्ती पर सिलिकॉन से समृद्ध छोटे-छोटे बाल होते हैं, जो बहुत नाजुक होते हैं। जब बिच्छु पत्ती त्वचा को छूती है, तो ये बाल टूट जाते हैं और बहुत छोटे होने के कारण इनके सिरे त्वचा के अंदर आसानी से चले जाते हैं। इनके कारण त्वचा में कुछ रसायन बनने लगते हैं, जैसे हिस्टामाइन (Histamine) और सेरोटोनिन (Serotonin)। शोध में पाया गया है कि ये रसायन दर्द बढ़ाने वाले न्यूरॉन को शांत करते हैं और अर्थराइटिस का दर्द कम करने में सहायता कर सकते हैं । इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, जिनके कारण यह जोड़ों में दर्द के लक्षण जैसे सूजन को कम करने में भी मदद कर सकती है। इन गुणों के कारण बिच्छु पत्ती इंफ्लेमेटरी रोग जैसे ऑस्टियोअर्थराइटिस से राहत पाने में मदद कर सकती है ।

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि बिच्छु पत्ती को छूने से शरीर में झनझनाहट हो सकती है। साथ ही, इसे छूने से त्वचा पर इरिटेशन या एलर्जी भी हो सकती है। इससे किसी भी प्रकार की एलर्जी या खुजली होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

7. एक्सरसाइज
कई लोगों का यह मानना है कि जोड़ों में दर्द के दौरान एक्सरसाइज करने से समस्या बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। मिनियापोलिस मेडिकल स्कूल विश्वविद्यालय के एक शोध में यह पाया गया है कि जोड़ों में दर्द के दौरान एक्सरसाइज करने से फायदा मिल सकता है। एक्सरसाइज करने से दर्द में राहत और शारीरिक गतिविधि में सहजता मिल सकती है। साथ ही एक्सरसाइज मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी मदद कर सकती है । एक्सरसाइज की मदद से जोड़ों के दर्द का इलाज करने के लिए पहले डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। मरीज की अवस्था को देखकर ही डॉक्टर बताएंगे कि क्या एक्सरसाइज करनी चाहिए।

जोड़ों में दर्द का इलाज – 
जोड़ों के दर्द का घरेलू इलाज करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर इसका चिकित्सकीय इलाज करवाना भी बहुत जरूरी है। नीचे जानिए कि इसे किस प्रकार की दवाइयों की मदद करवाया जा सकता है ।

ट्रेमेडोल : यह दवा अर्थराइटिस के दौरान जोड़ों के दर्द को कम करने में लाभकारी साबित हो सकती है। इस दवा के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जैसे – अधिक नींद आना, मलती व कब्ज।

नॉन स्टेरिओडल एंटीइंफ्लेमेटरी ड्रग्स : ये दवाइयां जोड़ों और मांसपेशियों की सूजन को कम करने में मदद कर सकती हैं । इस दवा का अधिक और लंबे समय तक सेवन करने से हृदयरोग और उससे जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

ओपिओइड : ये एनाल्जेसिक एजेंट की तरह काम करती हैं, जो दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं। ओपिओइड का अधिक सेवन करने से कब्ज, मलती और ज्यादा नींद आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एंटीडिप्रेसेंट : एंटीडिप्रेसेंट दवाइयों में एंटीकोसिसेप्टिव गुण होते हैं, जो दर्द को सुन्न करके, उससे कुछ देर के लिए राहत पाने में मदद कर सकते हैं।

इन दवाइयों के दुष्प्रभावों के चलते इनका सेवन डॉक्टर से परामर्श कर के किया जाना ही सुरक्षित है। दवाइयों के अलावा, थेरेपी की मदद से भी जोड़ों का दर्द कम किया जा सकता है। नीचे जानिए जोड़ों का दर्द कम करने की थेरेपी के बारे में।

एंटी-साइटोकाइन थेरेपी : यह थेरेपी इंफ्लेमेशन को कम करने के लिए उपयोग की जाती है। इस थेरेपी में एनाल्जेसिक दवाइयों का उपयोग किया जाता है, जो दर्द को कम करने का काम कर सकती हैं।

कॉम्बिनेशन एनाल्जेसिक : इस थेरेपी में पेरासिटामोल और कोडीन नामक दवाइयों को मिला कर दिया जाता है, जिससे जोड़ों के दर्द में राहत मिल सकती है।

टॉपिकल थेरेपी : इस थेरेपी में कैप्सैसिन जैसी दवाइयों को प्रभावित जगह पर लगाकर इलाज किया जाता है।

इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन : इस थेरेपी में प्रभावित जोड़ में ग्लूकोसामाइन और क्रोनड्रोइटिन सल्फेट जैसी दवाओं के इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द के लक्षण को कम करने में मदद कर सकते हैं।

एक्यूपंक्चर : किसी भी दर्द से राहत पाने के लिए एक्यूपंक्चर फायदेमंद और भरोसेमंद थेरेपी है। यह जोड़ों के दर्द को कम करने में लाभकारी साबित हो सकती है।

ट्रांसकुटनेऔस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिम्युलेशन : इस थेरेपी में शरीर में हल्का करंट दिया जाता है, जिसे दर्द का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।

नोट: ऊपर बताई गई किसी भी दवा का डॉक्टर से परामर्श किए बिना सेवन करना हानिकारक हो सकता है। जोड़ों को दर्द कम करने के लिए बताई गई थेरेपी को भी डॉक्टर की सलाह पर किसी विशेषज्ञ से ही करवाएं।

जोड़ों में दर्द से बचाव  –
  • नीचे बताई गई बातों को ध्यान में रखकर, जोड़ों के दर्द से बचा जा सकता है :
  • अपने आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • अपने आहार में नमक, शक्कर और फैट वाले आहार की मात्रा संतुलित रखें।
  • अधिक वजन वाले लोगों को वजन कम करने पर काम करना चाहिए।
  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहना चाहिए।
  • दैनिक जीवन में एक्सरसाइज और अन्य शारीरिक गतिविधियों को करते रहना चाहिए।
  • बार-बार जोड़ों को मोड़ने से बचना चाहिए।
  • खेलते समय कोशिश करें कि चोट न लगे। साथ ही कुछ ऐसी चीजें पहनकर खेल सकते हैं, जो चोट लगने से बचा सकें।
जोड़ों में दर्द ऐसी समस्या है, जो सावधानी न बरतने पर किसी को भी हो सकती है। साथ ही अब आप यह समझ चुके होंगे कि जोड़ों में दर्द का घरेलू उपचार कैसे किया जा सकता है। ध्यान रखिए कि लेख में बताए उपाय जोड़ों में दर्द के लक्षण कम करने में तो मदद कर सकते हैं, लेकिन मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है। सही समय पर ट्रीटमेंट न लेने पर यह समस्या बढ़ भी सकती है। ऐसे में सही इलाज, आहार और लेख में बताए गए घरेलू नुस्खों की मदद से इससे आराम पाया जा सकता है। साथ ही रोज एक्सरसाइज करें और स्वस्थ रखें।

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