यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
रविवार (इतवार) व्रत की आरती
कहूँ लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकि जोति विराजे ।। टेक
सात समुन्द्र जाके चरणनि बसे,कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम ।।
कोटि भानु जाके नख की शोभा,कहा भयो मंदिर दीप धरे हो राम ।।
भार उठारह रोमावलि जाके,कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम ।।
छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे,कहा भयो नैवेध धरे हो राम ।।
अमित कोटि जाके बाजा बाजे,कहा भयो झंकार करे हो राम ।।
चार वेद जाके मुख की शोभा,कहा भयो ब्रहमा वेद पड़े हो राम ।।
शिव सनकादिक आदि ब्रह्मादिक,नारद मुनि जाको धयान धरें हो राम ।।
हिम मंदार जाको पवन झंकोरे,कहा भयो शिर चवर ढुरे हो राम ।।
लख चौरासी बन्दे छुडाये,केवल हरियश नामदेव गाये हो राम।।
सर्व मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु रविवार का वर्त श्रेस्ठ है।
इस वर्त की विधि इस प्रकार है
01-प्रातः काल सनानादी से निवृत हो स्वछ वस्त्र धारण करे ।
02-शांतचित होकर परमात्मा का स्मरण करे ।
03-भोजन इक समय से ज्यादा नहीं करना चहिये ।
04-भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते कर लेना चहिये ।
05-यदि निराहार रहने पर सूर्ये छिप जये तो दूसरे दिन सूर्ये उदय हो जाने पर अर्ध्ये देने के बाद भोजन करना चहिये ।
06-व्रत के अंत में व्रत कथा सुननी चाहिये ।
07-व्रत के दोरान नमकीन व तेलयुक्त भोजन कदापि ग्रहण न करें ।
08-इस व्रत के करने से मान दृ सम्मान बढता है तथा शत्रुओं का सये होता है ।
09-आँखों को पीड़ा के अतिरिक्त अन्य सब पीड़ाए दूर होती हैं ।
रविवार (इतवार) व्रत की आरती
कहूँ लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकि जोति विराजे ।। टेक
सात समुन्द्र जाके चरणनि बसे,कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम ।।
कोटि भानु जाके नख की शोभा,कहा भयो मंदिर दीप धरे हो राम ।।
भार उठारह रोमावलि जाके,कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम ।।
छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे,कहा भयो नैवेध धरे हो राम ।।
अमित कोटि जाके बाजा बाजे,कहा भयो झंकार करे हो राम ।।
चार वेद जाके मुख की शोभा,कहा भयो ब्रहमा वेद पड़े हो राम ।।
शिव सनकादिक आदि ब्रह्मादिक,नारद मुनि जाको धयान धरें हो राम ।।
हिम मंदार जाको पवन झंकोरे,कहा भयो शिर चवर ढुरे हो राम ।।
लख चौरासी बन्दे छुडाये,केवल हरियश नामदेव गाये हो राम।।
सर्व मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु रविवार का वर्त श्रेस्ठ है।
इस वर्त की विधि इस प्रकार है
01-प्रातः काल सनानादी से निवृत हो स्वछ वस्त्र धारण करे ।
02-शांतचित होकर परमात्मा का स्मरण करे ।
03-भोजन इक समय से ज्यादा नहीं करना चहिये ।
04-भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते कर लेना चहिये ।
05-यदि निराहार रहने पर सूर्ये छिप जये तो दूसरे दिन सूर्ये उदय हो जाने पर अर्ध्ये देने के बाद भोजन करना चहिये ।
06-व्रत के अंत में व्रत कथा सुननी चाहिये ।
07-व्रत के दोरान नमकीन व तेलयुक्त भोजन कदापि ग्रहण न करें ।
08-इस व्रत के करने से मान दृ सम्मान बढता है तथा शत्रुओं का सये होता है ।
09-आँखों को पीड़ा के अतिरिक्त अन्य सब पीड़ाए दूर होती हैं ।

