बुध ग्रह सूर्य के सबसे करीब ग्रह है। बुध देवता जी की आरती एंवं स्तुति का अपना ही एक महत्व है। ऐसा माना जाता है की बुध देवता अपने भगतों पर ज्ञान और धन की वर्षा करते हैं। बुधवार के दिन की गई एक प्रार्थना सभी बाधाओं से निजात दिलवाती है, जिससे कई गुना लाभ मिलता है। मुख्यतः रूप से संतान प्राप्ति तथा भूमि के लाभ मे इनकी खासकर पूजा की जाती है।
बुधवार व्रत की आरती
आरती युगलकिशोर की कीजै । तन मन धन न्योछावर कीजै।। टेक।।
गौरश्याम मुख निरखत रीजे । हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै।।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा। ताहि निरखि मेरो मन लोभा।।
ओडे नील पीत पट सारी। कुंजबिहारी गिरिवरधारी।।
फूलन की सेज फूलन की माला। रतन सिहांसन बैठे नंदलाला।।
कंचनथार कपूर की बाती। हरि आये निर्मल भई छाती।।
श्री पुरषोतम गिरिवरधारी। आरती करें सकल ब्रज नारी।।
नंदनंदन ब्रजभान, किशोरी। परमानंद स्वामी अविचल जोरी।।
बुधवार व्रत की विधि इस प्रकार है।
01-ग्रह शांति तथा सर्व - सुखो की इच्छा रखने वालो को बुधवार का व्रत करना चाहिए।
02-रात दिन में एक ही बार भोजन करे।
03-व्रत में हरी वस्तुओ का प्रयोग करना उत्तम है।
04-व्रत के अंत में शंकर जी की पूजा, धूप, बेल- पत्र आदि से करनी चाहिए।
05-कथा के बीच में नहीं उठना चाहिए।
बुधवार व्रत की आरती
आरती युगलकिशोर की कीजै । तन मन धन न्योछावर कीजै।। टेक।।
गौरश्याम मुख निरखत रीजे । हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै।।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा। ताहि निरखि मेरो मन लोभा।।
ओडे नील पीत पट सारी। कुंजबिहारी गिरिवरधारी।।
फूलन की सेज फूलन की माला। रतन सिहांसन बैठे नंदलाला।।
कंचनथार कपूर की बाती। हरि आये निर्मल भई छाती।।
श्री पुरषोतम गिरिवरधारी। आरती करें सकल ब्रज नारी।।
नंदनंदन ब्रजभान, किशोरी। परमानंद स्वामी अविचल जोरी।।
बुधवार व्रत की विधि इस प्रकार है।
01-ग्रह शांति तथा सर्व - सुखो की इच्छा रखने वालो को बुधवार का व्रत करना चाहिए।
02-रात दिन में एक ही बार भोजन करे।
03-व्रत में हरी वस्तुओ का प्रयोग करना उत्तम है।
04-व्रत के अंत में शंकर जी की पूजा, धूप, बेल- पत्र आदि से करनी चाहिए।
05-कथा के बीच में नहीं उठना चाहिए।

