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भारत में रह रहे सभी मुसलमान वैधानिक भारतीय नागरिक नहीं हैं

 

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यह काल्पनिक अवधारणा नहीं है अपितु ऐतिहासिक सत्य है. इसका विवरण देखै

*15 अगस्त 1947 को रात के 12 बजे स्वतंत्रता और देश विभाजन की घोषणा होते ही भारत में रहने वाले सभी मुसलमान पाकिस्तानी नागरिक हो गये थे देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था. मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया गया था और बाकी हिन्दुस्तान हिन्दूओं के लिए माना गया.*

*मुसलमानों की जनसंख्या के आधार पर एक तिहाई भूभाग और एक तिहाई खजाना दिया गया. और पाकिस्तान के लिए और उपरोक्त भूभाग और खजाना प्राप्त करने के लिए मोहम्मद अली जिन्ना ने डायरेक्ट ऐक्शन द्वारा बीस लाख हिन्दुओ का नरसंहार कराया था.*

*बनाये गये पाकिस्तान को छोड़कर केवल 72 लाख मुसलमान भारतीय भूभाग से गयेे थे और लगभग तीन करोड़ मुसलमान अपने जमीन मकान आदि बेचकर पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे थे कि गांधी महात्मा ने अपने मुस्लिम प्रेम के वश प्रोपेगेंडा फैलाया जो मुसलमान पाकिस्तान जाना चाहैं वे पाकिस्तान जा सकते हैं और जो भारत में रहना चाहै वे भारत में रह सकते हैं!*

*गांधी महात्मा की इस उद्घोषणा का कोई आधिकारिक या वैधानिक महत्व नहीं था क्योंकि गांधी किसी सरकारी पद पर नहीं थे. परन्तु मुसलमानों ने मान लिया कि गांधी तो राष्ट्रपिता हैं इसलिए उनकी बात तो सम्विधान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगी. इसलिए तीन करोड़ मुसलमान भारत में ही रुक गये!* 

*ध्यान देने की बात है कि इन्डिपैन्डैन्स एक्ट या पार्टीसन डीड या पार्टीसन के नियमों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि मुसलमान चाहे पाकिस्तान जायै या भारत में रुकना चाहै तो भारत में रुकवायेंगे! यह विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था और बीस लाख हिन्दुओ की कुर्बानी के बाद हुआ था, इस लिए किसी भी मुसलमान को भारत में रुकने का कोई अधिकार नहीं था! श्री बी आर अमबेडकर ने भी अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Pakistan Or partition of India में भी कहीं नहीं लिखा है कि धार्मिक आधार पर हो रहे देश विभाजन के बाद किसी भी मुसलमान को अपनी चोइस का  यह अधिकार होगा कि वह चाहे तो पाकिस्तान जाये और चाहे तो भारत में रुका रहे! श्रीअम्बेडकर ने तो यहाँ तक कहा था कि यदि एक भी मुसलमान भारत में रहता है तो यह पार्टीसन के नियमों का उल्लंघन होगा!* 

*नेहरू की लोकप्रियता उस समय शून्य हो गयी थी और सरदार पटेल के प्रधानमंत्रित्व के अधिकार को गांधी से मिलीभगत करके धूर्तता से हडप लिया था इसलिए उसे लगरहा था कि हिन्दू उसे वोट नहीं दैगे और प्रधानमंत्रित्व कायम रखना मुश्किल हो जायेगा, इसलिए मुसलमानों को अपना वोटबैंक बनाकर देश में रोकना सही कूटनीति समझी!*

*सरदार पटेल ने मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने केलिए बारबार उकसाया, यहाँ तक कि जिन्ना ने भी सभी मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने के लिए कईबार सन्देश भेजा, लेकिन नेहरू ने अपने निहित स्वार्थ के वश किसी की भी बात पक्षर ध्यान नही दिया और तीन करोड़ मुसलमानों को भारत में रोके रखा!*

*जब सम्विधान का लिखना पूरा होने को आया और चुनाव होना निकट आ गया, तब नेहरूजी को ध्यान आया कि मेरे मुसलमान वोटर तो भारत के नागरिक ही नहीं रहे हैं तो ये वोट कैसे कर पायैगे? कोई भी विपक्षी पार्टी या चुनाव आयोग मुसलमानों के वोट करने पर अडंगा डाल सकते हैं तो फिर क्या होगा?* 

तो फिर उसने कूटनीति का आश्रय लिया! उस समय तक सरदार पटेल और जिन्ना का देहावसान हो चुका था, इसलिए उसकी कूटनीति की सफलता में कोई रुकावट नहीं रही थी! उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाक़त अली खान से फोन पर मंत्रणा की और उसे दिल्ली बुलाया! 

8 अप्रैल 1950 को दोनों ने एक समझौता किया, जिसे "जिसे नेहरू लियाकत अलीखानपैक्ट " के नाम से इतिहास में दर्ज किया गया है! उस पैक्ट में सबसे पहली टर्म है कि दोनों देशों में विभाजन के बाद जो अल्पसंख्यक रुके रह गए हैं उन्हें नागरिकता देने और उनकी जानमाल की रक्षा अपने अपने देश में दोनों देश करैगे! 

देखिए ऐक्जैक्ट वर्डिंग क्या है :--

"The governments of India and Pakistan solmanly agree that each shall ensure, to the minorities throughout it's territory compelet equality of citizenship irrespective of religion, a full sense of security in respective of life culture....... "

 इस  प्रथम टर्म से यह तो स्पष्ट हो ही जाता है कि विभाजन के बाद से 8-4-1950 तक मुसलमान भारत के नागरिक नहीं थे, और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह बात है कि इस पैक्ट के बाद भारत सरकार के द्वारा मुसलमानों को वधिवत नागरिकता दी गयी हो इस का कोई ऐतिहासिक रिकार्ड या प्रमाण नहीं मिलता है! न तो किसी आर्डीनैन्स के द्वारा मुसलमानों को सामूहिक नागरिकता दी गई और न ही व्यक्तिगत रूप से मुसलमानों को नागरिकता दी गयी!

नेहरू लियाकत अली पैक्ट तो माइनरिटीज को नागरिकता देने के स्टोयरिटी या आत्मसवीकृति या प्रतिज्ञा देने जैसा मात्र है, इसके द्वारा नागरिकता दे नहीं दी गयी थी! 

यह मुसलमानों का दुर्भाग्य माना जायेगा कि तुष्टिकरण प्रदाता नेहरू जी मुसलमानों को नागरिकता देना भूल गए और उन्हें अब पाकिस्तान जाना पडेगा! 

सुबह का भूला यदि शाम को भी घर🏠 आजाये तो भूला नहीं माना जायेगा! 

अब तक अनजाने में मुसलमान वोट, राशन और सरकारी नौकरी आदि का लाभ लेते रहे तो उनका यह कृत्य उन्हें सदा के लिए अधिकार नहीं दे देता है! इसलिए उन्हें वोट के अधिकार से वंचित किया जायेगा और जो कन्वर्टेड मुसलमान घर वापसी कर लेते है तो वे मुसलमान नही रहैगे और पूर्ण नागरिक बनजायैगे.

जो विदेशी डीएनए के आक्रान्ताओं के वन्शज  शेष रहैगे उनका  क्या किया जायेगा उसके लिए म्यांमार के बौद्ध भिक्षु श्री आशिन

 विराथू  से सलाह लेना सही मार्गदर्शक रहेगा कि उन्होंने दुष्ट रोहिंग्याओ से कैसे छुटकारा पाया? 

विधिविशेषज्ञ, इतिहासज्ञ और सम्विधान विशेषज्ञों से नम्र निवेदन है कि  यदि मैने कुछ गलत लिखा है तो कृपया मुझे मेरी गलतियों से अवगत करायैं !!

[10/12, 20:41] omvasudhabrothersister: यह सब भारत की वर्तमान भारत सरकार को सर्वविदित है.. फ़िर भी हिंदुओं के वोट से पूर्ण बहुमत प्राप्त कर... पूर्व की भारत सरकार की तरह ही,, सनातन धर्म संस्कृति साथ ही भारत विरोधी मुस्लिम एवम् ईसाई समुदाय विशेष को हिंदुओं के अरबों खरबों रूपये टैक्स एवम् 4 लाख़ हिंदू मंदिरों की दान पेटी के 4 लाख़ करोड़ रूपए प्रतिवर्ष खर्च कर क्यों सर्वांगीण विकास कर रही है,, साथ ही खूनी कुरान नमाज़ पढ़ने रोज़े ईद मुहर्रम मनाने साथ ही जेहादी मदरसों को चलाने की वैधानिक अनुमति दिए है,44 योजनाएं बनाकर जेहादी मुस्लिम कौम एवम् ईसाई समुदाय विशेष को समर्पित है... बल्कि विगत 8 वर्षों में 5 करोड़ 20 लाख़ युवा तालिबानों लव जेहादियों को स्कॉलरशिप देकर हायर स्टडी करवा चुकी है, जिन्हें केंद्र एवम् राज्य सरकारों में धड़ाधड़ नौकरी प्राप्त हो रही हैं, प्रतिवर्ष 5 हज़ार 500 करोड़ रुपए खर्च कर उद्योग धंधों को लॉन देकर स्थापित करवाया जाता है.. जेहादी मुस्लिम समुदाय विशेष को.. क्यों ? कोंग्रेस एवम् अन्य क्षेत्रीय दलों की सरकारें जेहादी मुस्लिम कौम एवम् ईसाई समुदाय विशेष को समर्पित राजनैतिक स्तर पर रहती हैं... सेकुलर गिरोह बनाकर, भारत को सैकुलर देश बना कर, जिसमें हिंदूत्ववादी राष्ट्रवादी देशभक्त भाजपा सरकार ने पूर्व की सरकारों से भी अत्यधिक योजनाऐं मुस्लिम ईसाई समुदाय हितों में क्यों चला रखी हैं... साथ ही अल्पसंख्यक आयोग मंत्रालय बनाकर मुस्लिम एवम् ईसाई समुदाय हितों को प्राथमिकता दी है... परिणामस्वरूप विगत 65 वर्षों से भी अधिक शक्तिशाली मुस्लिम एवम् ईसाई समुदाय भारत में उभर कर आया है... साथ ही खुलेआम हिंदुओं का धर्मांतरण पलायन कराने में संलग्न है, भारत के 9 राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाने पर भी.. बंगाल में हिंदू को अपनी राह चुनने के लिए अकेला छोड़ दिया है,, बिहार झारखंड राजस्थान छत्तीसगढ में हिंदू ईसाई मुस्लिम समुदाय विशेष के षड्यंत्रों से पीड़ित हैं.. सिर्फ़ भारत में खूनी कुरान नमाज़ पढ़ने रोज़े ईद मुहर्रम मनाने साथ ही जेहादी मदरसों को चलाने की वैधानिक अनुमति भर से.... वहीं ईसाई मिशनरियों ने हिंदुओं को धर्मांतरण कराने के साथ ही संचालित लाखों कॉन्वेंट स्कूल में करोडों हिंदू बच्चों को उनके मूल धार्मिक परम्पराओं से विमुख कर दिया है.... फ़िर भी भारत सरकार द्वारा मुस्लिम एवम् ईसाई हितों में  अरबों खरबों रूपये की संचालित दर्ज़नो योजनाएं क्यों ?


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