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बायो एजेण्ट्स व बायो पेस्टीसाइड्स,महत्व व उपयोगिता व प्रयोग की विधि

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एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन के अन्तर्गत बायो एजेण्ट्स/ बायो पेस्टीसाइड्स का समावेश हो जाने के कारण विभिन्न फसलों को कीट/ रोग से सुरक्षा में पर्याप्त सफलता प्राप्त हो रही है। जिन क्षेत्रों में इनका प्रयोग हो रहा है । वहॉ न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है । अपितु मानव एवं पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में पर्याप्त सफलता मिली है।

तना/फली छेदक कीट से फसलों की रोकथाम हेतु ट्राइकोकार्ड एवं एन०पी०वी० के प्रयोग से काफी लाभ मिला है । इससे न केवल खाद्यान दलहनी एवं तिलहनी फसलों को लाभ हुआ है अपितु गन्ना एवं सब्जियों पर भी इसका प्रयोग लाभप्रद रहा है। उकठा, जड़–गलन, तना गलन तथा अन्य फफूँदीजनित रोगों के उपचार हेतु ट्राइकोडरमा का प्रयोग व्यापक स्तर पर प्रारम्भ हुआ है ।

तथा बीज शोधन में भी इसका उपयोग दिनो दिन बढ़ रहा है। प्रदेश की विभागीय आई०पी०एम० प्रयोगशालाओं में ट्राइकोडरमा, ब्यूवेरिया, बैसियाना, सूडोमोनास, मेन्टाराइजियम तथा एन०पी०वी० आदि बायोएजेन्ट्स उत्पादित किये जा रहे है। जिनका उपयोग विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अर्न्तगत आयोजित प्रदर्शनों तथा विकास कार्यों में किया जाता है। नीम का तेल एवं बी०टी० बायोपेस्टीसाइड्स के रूप में उपलब्ध है । तथा इनका प्रयोग विभिन्न कीट/रोगों के नियंत्रण/प्रबन्धन करने के लिए किया जाता है। प्रदेश में इनकी पर्याप्त उपलब्धता है। विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत इनका प्रयोग सुनिश्चित कराया जाये। बायो एजेण्ट्स/बायो पेस्टीसाइड्स के व्यापक प्रचार पर समुचित बल दिया जाये।

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