कई ऐसी शारीरिक समस्याएं हैं, जिनके कई लक्षण मिले-जुले रूप में होते हैं। इसी वजह से इनकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल भरा हो जाता है। ‘अग्नाशयशोथ’ भी कुछ ऐसी ही समस्या है, जो पेट के ऊपरी भाग में दर्द के साथ अपने होने का संकेत दे सकती है। ऐसे में जरूरी है कि इस स्वास्थ्य परेशानी के विषय में आपको पता हो, ताकि समय रहते इससे बचाव व इसका इलाज करवाया जा सके। इस लेख में आप जान पाएंगे कि अग्नाशयशोथ क्या है और अग्नाशयशोथ के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार होते हैं। साथ इस लेख में अग्नाशयशोथ के उपचार और इससे बचे रहने के उपाय भी साझा किए जाएंगे।
अग्नाशयशोथ क्या है? –
अग्न्याशय में होने वाली सूजन को ‘अग्नाशयशोथ’ कहा जाता है। अग्न्याशय (Pancreas) एक बड़ी ग्रंथि (Gland) है, जो पेट के पीछे और छोटी आंत के पहले भाग के नजदीक मौजूद होती है। यह ग्रंथि छोटी आंत में डाइजेस्टिव एंजाइम्स को स्रावित (Secretes) करने का काम करती है। अग्न्याशय में सूजन की समस्या तब होती है, जब डाइजेस्टिव एंजाइम, अग्न्याशय को ही पचाने का काम करने लगते हैं (1)। इस समस्या के कई प्रकार और कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में आगे लेख में बताया गया है।
अग्नाशयशोथ के प्रकार –
अग्न्याशय में होने वाली सूजन दो प्रकार से व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। नीचे इस विषय में जानकारी दी गई है –
एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस (Acute Pancreatitis) – यह अग्नाशयशोथ का एक प्रकार है, जो अचानक उत्पन्न होता है, लेकिन सही उपचार से कुछ दिनों में ठीक भी हो जाता है। यह ज्यादातर गॉल्स्टोन (पित्ताशय में होने वाली पथरी) के कारण होता है।
क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस (Chronic Pancreatitis) – यह अग्नाशयशोथ की गंभीर स्थिति है। यह समय के साथ और जटील होती जाती है। इसका मुख्य कारण शराब का अधिक सेवन माना जाता है।
अग्नाशयशोथ के कारण और जोखिम कारक –
जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अग्नाशय में होने वाली सूजन ही अग्नाशयशोथ की समस्या है और इसके होने के पीछे कई कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं, जिन्हें क्रमवार तरीके से नीचे बताया गया है
एक्यूट और क्रॉनिक अग्नाशयशोथ के सामान्य कारण और जोखिम कारक –
- पित्ताशय में पथरी
- अल्कोहल का अधिक सेवन।
- अग्न्याशय से संबंधित आनुवंशिक बीमारी।
- दवाओं का दुष्प्रभाव।
- वायरस या पैरासाइट संक्रमण।
- पेट से जुड़ी चोट।
- अग्नाशय का कैंसर।
एक्यूट अग्नाशयशोथ होने का कारण : इसके होने का सबसे बड़ा कारण गॉल स्टोन यानी पित्ताशय में पथरी है। पित्ताशय की पथरी अग्न्याशय में सूजन का कारण बनती है, क्योंकि यह पथरी अग्नाशयी वाहिनी (Pancreatic Duct) में फंस जाती है। इस स्थिति को गॉल्स्टोन पैन्क्रियाटाइटिस कहा जाता है।
क्रानिक अग्नाशयशोथ होने का कारण : इसके होने का सबसे आम कारण शराब का अधिक सेवन और आनुवंशिक विकार है। इसके अलावा, इसके होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –
- अग्नाशय वाहिनी में रुकावट
- रक्त में वसा का उच्च स्तर
- रक्त में कैल्शियम का उच्च स्तर
अग्नाशयशोथ के लक्षण –
एक्यूट और क्रॉनिक अग्नाशयशोथ के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं–
एक्यूट अग्नाशयशोथ के लक्षण : इसमें पेट के ऊपरी भाग में दर्द धीरे-धीरे या अचानक से शुरू हो सकता है। यह दर्द पीठ तक फैल सकता है और कुछ दिनों तक बना रह सकता है। इसके अलावा, एक्यूट अग्नाशयशोथ के कुछ और भी लक्षण हो सकते हैं –
- बुखार
- मतली और उल्टी
- दिल की धड़कन का तेज होना।
- पेट में सूजन।
क्रॉनिक अग्नाशयशोथ के लक्षण : एक्यूट अग्नाशयशोथ की तरह ही इसमें भी पेट के ऊपरी भाग में दर्द शुरू हो सकता है। हालांकि, कुछ लोगों को यह दर्द नहीं भी हो सकता है। भोजन करने के बाद यह दर्द बढ़ भी सकता है। इसके अलावा, नीचे बताए गए लक्षण भी सामने आ सकते हैं –
- दस्त
- जी मिचलाना
- चिकना और दुर्गंधयुक्त मल
- उल्टी
- वजन का घटना
- अग्नाशयशोथ से होने वाली जटिलातएं
एक्यूट अग्नाशयशोथ से जुड़ी जटिलताएं :
- किडनी फेल्योर
- फेफड़ों की क्षति।
- अग्न्याशय में पस का जमना।
- हार्ट फेल्योर का खतरा।
- क्रॉनिक अग्नाशयशोथ से जुड़ी जटिलताएं :
- छोटी आंत या पित्त नलिकाओं में रुकावट
- अग्न्याशय में द्रव (Fluid) का जमना
- मधुमेह
- पोषक तत्वों का ठीक प्रकार से अवशोषण (Absorption) न हो पाना।
अग्नाशयशोथ का इलाज –
अग्नाशयशोथ का उपचार निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है –
एक्यूट अग्नाशयशोथ की स्थिति में : उपचार और आराम के जरिए एक्यूट अग्नाशयशोथ कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन अगर स्थिति गंभीर बनती जा रही है, तो डॉक्टर निम्नलिखित तरीके से इसका उपचार कर सकते हैं :
- अगर अग्नाशयशोथ का कारण गॉल्स्टोन है, तो डॉक्टर सर्जरी कर गॉल ब्लैडर को अलग कर सकते हैं।
- अगर अग्नाशय में पस जम गई है, तो डॉक्टर उसे बाहर निकालने का काम कर सकते हैं। साथ ही डॉक्टर अग्नाशय के डैमेड टिश्यू को भी अलग कर सकते हैं।
- उपचार में डॉक्टर ईआरसीपी विधि की भी मदद ले सकते हैं। इसकी मदद अग्नाशय वाहिनी में रुकावट को ठीक करने के लिए ली जाती है।
- क्रॉनिक अग्नाशयशोथ की स्थिति में : क्रॉनिक अग्नाशयशोथ की स्थिति में डॉक्टर दर्द को दूर करने और जटिलताओं से बचाव के लिए निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं :
- पाचन में मदद करने के लिए डॉक्टर मरीज को एंजाइम पिल्स दे सकते हैं। साथ ही डॉक्टर विटामिन की गोलियां भी दे सकते हैं।
- क्रॉनिक अग्नाशयशोथ की वजह से मधुमेह भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर नियमित रक्त शर्करा की जांच और खान-पान संबंधी डाइट चार्ट का पालन करने की सलाह दे सकते हैं। साथ ही दवाइयों में भी बदलाव कर सकते हैं।
- इसके अलावा, गंभीर स्थिति में डॉक्टर सर्जरी कर सकते हैं। इसमें डॉक्टर अग्नाशय के डैमेज व संक्रमित भाग को निकाल सकते हैं।
- दुर्लभ मामलों में डॉक्टर पूरे अग्नाशय को बाहर निकाल कर ट्रांसप्लांटेशन भी कर सकते हैं।
अग्नाशयशोथ आहार –
अग्नाशयशोथ के उपचार के दौरान डॉक्टर कुछ आहार पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, तो कुछ आहार लेने की सलाह दे सकते हैं। कई बार आहार को फीडिंग ट्यूब की मदद से भी लेना पड़ सकता है। नीचे जानिए अग्नाशयशोथ में सेवन करने और न करने वाले आहार के बारे में
अग्नाशयशोथ की स्थिति में सेवन करने वाले आहार :
- कम वसा वाले खाद्य पदार्थ
- कम समय और आसानी से पच जाने वाले खाद्य पदार्थ
- फलों का जूस
- जिन खाद्य पदार्थों से दूर रहना है :
- ऐसे भोजन, जो पचने में वक्त लगाएं।
- अधिक वसा और मसालेदार भोजन
- अल्कोहल का सेवन।
- कैफिन युक्त पेय पदार्थ
नोट: अग्नाशयशोथ की अवस्था में आहार के संबंध में एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें।
अग्नाशयशोथ से बचने के उपाय –
अग्नाशयशोथ से बचाव के लिए नीचे बताए गए उपाय किए जा सकते हैं
- शराब और धूम्रपान से बचें।
- बच्चों को सही समय पर टीका लगवाएं।
- स्वस्थ आहार का सेवन करें।
- वजन को नियंत्रित रखें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें।
हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख को पढ़ने के बाद आप जान गए होंगे कि अग्नाशयशोथ क्या है और अग्नाशयशोथ के कारण व लक्षण क्या-क्या हो सकते हैं। साथ ही आपको अग्नाशयशोथ के उपचार संबंधी जानकारी भी मिल गई होगी। लेख में इस समस्या से बचाव के कुछ जरूरी टिप्स भी दिए गए हैं, जिनका पालन कर आप अग्नाशयशोथ के जोखिम व इसकी जटिलताओं को कम कर सकते हैं।


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