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थायराइड के कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू टिप्स

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विश्वभर में थायराइड तेजी से अपने पांव पसार रहा है। अकेले भारत में 4.2 करोड़ लोग थायराइड से ग्रस्त हैं , जो चिंताजनक विषय है। यही कारण है कि इस लेख से हम थाइराइड की जानकारी देंगे, ताकि आप इससे जागरूक हो सकें। इस लेख में हम ‘थायराइड क्यों होता है’, ‘थायराइड ग्रंथि किसे कहते हैं’ और ‘थायराइड कितने प्रकार का होता है’, इन सब चीजों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा, थायराइड के घरेलू उपचार भी बताएंगे। हालांकि, थायराइड के घरेलू उपचार थायराइड को पूरी तरह ठीक तो नहीं कर सकते, लेकिन इसके लक्षणों व अन्य शारीरिक समस्याओं से राहत जरूर दिला सकते हैं। साथ ही थायराइड की दवाई के असर को बढ़ा सकते हैं। वहीं, थायराइड ऐसी समस्या है, जिसमें मेडिकल ट्रीटमेंट सबसे जरूरी है। इसलिए, लेख में हम थायराइड की दवाई के बारे में भी कुछ सुझाव देंगे।

थायराइड क्या है? – 
थायराइड कोई बीमारी नहीं, बल्कि हमारे गले में आगे की तरफ पाए जाने वाली एक ग्रंथि होती है। यह तितली के आकार की होती है। यही ग्रंथि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। थायराइड ग्रंथि टी3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और टी4 यानी थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारी सांस, ह्रदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर पड़ता है। साथ ही ये हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करते हैं। जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या कहते हैं

इसके अलावा, मस्तिष्क में पिट्यूरी ग्रंथि से एक अन्य हार्मोन निकलता है, जिसे थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) कहते हैं। यह हार्मोन शरीर में अन्य दो थायराइड हार्मोंस टी3 और टी4 के प्रवाह को नियंत्रित करता है। यह आपके वजन, शरीर के तापमान, मांसपेशियों की ताकत और यहां तक ​​कि आपके मूड को भी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को और जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे ज्यादा हो, उन्हें थायराइड होने की आशंका ज्यादा होती है। साथ ही अगर परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो, तो भी इसके होने की आशंका ज्यादा रहती है ।

थायराइड के प्रकार – 
मुख्य रूप से थायराइड के छह प्रकार माने गए हैं, जो इस प्रकार हैं :

हाइपोथायरॉइडज्म– जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम मात्रा में हार्मोंस का निर्माण करती है।

हाइपरथायरॉइडज्म – जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोंस का निर्माण करती है।

गॉइटर  – भोजन में आयोडीन की कमी होने पर ऐसा होता है, जिससे गले में सूजन और गांठ जैसी नजर आती है।

थायराइडिटिस – इसमें थायराइड ग्रंथि में सूजन आती है।

थायराइड नोड्यूल – इसमें थायराइड ग्रंथि में गांठ बनने लगती है।

थायराइड कैंसर 
थायराइड के लक्षण – 
अगर शरीर में नीचे बताए गए निम्न प्रकार के लक्षण नजर आते हैं, तो ये थायराइड की ओर संकेत हो सकते हैं। ध्यान रहे कि थायराइड के लक्षण सामान्य बीमारी जैसे भी नजर आ सकते हैं, इसलिए बेहतर है कि शरीर में आए किसी भी परिवर्तन को गंभीरता से लेना चाहिए ।
  • कब्ज
  • थकावट
  • तनाव
  • रूखी त्वचा
  • वजन का बढ़ना या कम होना
  • पसीना आना कम होना
  • ह्रदय गति का कम होना
  • उच्च रक्तचाप
  • जोड़ों में सूजन या दर्द
  • पतले और रूखे-बेजान बाल
  • याददाश्त कमजोर होना
  • मासिक धर्म का असामान्य होना
  • प्रजनन क्षमता में असंतुलन
  • मांसपेशियों में दर्द
  • चेहरे पर सूजन
  • समय से पहले बालों का सफेद होना
थायराइड के कारण और जोखिम कारक- 
नीचे बताए गए जोखिम कारक थाइराइड के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं:
अगर पहले कभी थाइराइड हुआ हो।
  • गोइटर होने से।
  • 30 साल से ज्यादा उम्र होने पर।
  • टाइप 1 मधुमेह या अन्य ऑटोइम्यून विकारों का इतिहास।
  • गर्भपात, समय से पहले पूर्व जन्म या बांझपन।
  • ऑटोइम्यून थायराइड रोग या थायरायड रोग का पारिवारिक इतिहास।
  • टाइप 2 डायबिटीज के कारण।
  • महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा होता है।
  • गलत खान-पान, जैसे अधिक तला हुआ खाना।
  • जंक फूड व मैदे से बने खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन।
  • बढ़ता वजन या मोटापा।
नोट : महिलाओं को थायराइड होने का जोखिम ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा, अगर किसी अन्य को थायराइड रोग के लक्षण या संकेत दिखे, तो भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

थायराइड का इलाज – 
थायराइड का इलाज (thyroid ka ilaj) मरीज की उम्र, थायराइड ग्रंथि कितने हार्मोन बना रही है और मरीज की चिकित्सकीय परिस्थिति कैसी है, उसके अनुसार किया जा सकता है। हमने ऊपर थायराइड के कुछ प्रकारों के बारे में बताया था, तो अब यहां हम उसी के अनुसार इलाजों बता रहे हैं । ध्यान रहे कि ये सिर्फ सुझाव हैं, क्योंकि किस मरीज को कैसे ट्रीटमेंट की जरूरत है, इस बारे में डॉक्टर ही बेहतर बता सकते हैं।

हाइपो थायराइड : इसका इलाज दवा के जरिए किया जा सकता है। दवा के सेवन से शरीर को जरूरी हार्मोंस मिलते हैं। इसमें डॉक्टर सिंथेटिक थायराइड हार्मोन टी-4 लेने की सलाह देते हैं, जिससे शरीर में हार्मोंस का निर्माण शुरू हो सकता है। हाइपो थायराइड की अवस्था में कुछ मरीजों को यह दवा जीवन भर लेनी पड़ सकती है।
   
हाइपर थायराइड : डॉक्टर थायराइड रोग के लक्षण और कारणों के आधार पर हाइपर थायराइड का इलाज कर सकते हैं। यह इलाज कुछ इस प्रकार से हो सकता है :

एंटीथायराइड – डॉक्टर एंटीथायराइड दवा दे सकते हैं, जिसके सेवन से थायराइड ग्रंथि नए हार्मोन का निर्माण करना बंद कर सकती है ।
    
बीटा-ब्लॉकर दवा– इसके सेवन से थायराइड हार्मोन का शरीर पर असर होना बंद हो सकता है। साथ ही दवा ह्रदय गति को भी सामान्य कर सकती है। इसके अलावा, जब तक अन्य किसी इलाज का असर शुरू नहीं होता, तब तक यह दवा दूसरे लक्षणों के असर को भी कम कर सकती है। एक खास बात यह है कि इस दवा के सेवन से जरूरी थायराइड हार्मोन बनने में कोई कमी नहीं आती।
    
रेडियोआयोडीन : इस उपचार से थायराइड हार्मोंस बनाने वाले थायराइड सेल को नष्ट किया जा सकता है, लेकिन यह हाइपो थायराइड का कारण बन सकता है।
    
सर्जरी : सर्जरी की जरूरत तब हो सकती है, जब मरीज को कुछ निगलने या फिर सांस लेने में तकलीफ हो। सर्जरी में थायराइड का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा निकाला जा सकता है। ऐसे में हमेशा के लिए हाइपो थायराइड होने की अंदेशा हो सकती है।

थायराइडिटिस : एनीसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन 20 मिलीग्राम प्रेडनिसोलोन (-एक स्टेरॉयइड दवा) के सेवन से थायराइडिटिस का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।

गॉइटर : अगर थायराइड ग्रंथि सही प्रकार से काम कर रही है, तो इसमें कोई इलाज की जरूरत नहीं भी पड़ सकती है। कुछ समय में यह अपने आप ही ठीक हो सकता है। वहीं, अगर इलाज किया भी जाता है, तो डॉक्टर ऐसी दवा दे सकते हैं, जिससे थायराइड सिकुड़ कर अपने सामान्य आकार में आ सकता है। सिर्फ कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

थायराइड नोड्यूल : इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज की ग्रंथि की स्थिति किस प्रकार की है। यह इलाज इस प्रकार से किया जा सकता है :
  • अगर ग्रंथि ने कैंसर का रूप नहीं लिया है, तो डॉक्टर सिर्फ मरीज की स्थिति पर नजर रखेंगे। मरीज की नियमित रूप से जांच की जा सकती है और ब्लड टेस्ट व थायराइड अल्ट्रासाउंड टेस्ट किए जा सकते हैं। अगर ग्रंथि में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आता है, तो हो सकता है कि कोई उपचार न किया जाए।
  • अगर ग्रंथि का आकार बड़ा हो जाता है या फिर कैंसर का रूप ले लेता है, तो डॉक्टर सर्जरी के विकल्प को चुन सकते हैं। ग्रंथि का आकार बड़ा होने से सांस लेने या कुछ निगलने में परेशानी हो सकती है।
  • अगर ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन का निर्माण करती है, तो रेडियोआयोडीन का सहारा लिया जा सकता है। रेडियोआयोडीन के जरिए ग्रंथि को सिकोड़ने में मदद मिल सकती है, ताकि वह कम मात्रा में थायराइड हार्मोन का निर्माण कर सके।
थायराइड कैंसर : कैंसर का एकमात्र इलाज सर्जरी है। सर्जरी के जरिए या तो पूरी थायराइड ग्रंथि को निकाला जा सकता है या फिर आराम से जितने हिस्से को निकाला जा सके उतने को निकाला जा सकता है। अगर कैंसर छोटा है और लिम्फ नोट्स में नहीं फैला है, तो सर्जरी बेहतर विकल्प हो सकता है। इस बारे में डॉक्टर ही बेहतर राय दे सकते हैं। इसके अलावा, डॉक्टर सर्जरी के बाद रेडियोआयोडीन थेरेपी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सर्जरी के दौरान जो कैंसर सेल अंदर ही रह जाते हैं या अन्य जगह फैल जाते हैं, उन्हें रेडियोआयोडीन थेरेपी के जरिए नष्ट किया जा सकता है। थायराइड कैंसर का इलाज करने से पहले एक बार डॉक्टर मरीज से उपचार के संबंध में बात कर सकते हैं।

थायराइड के घरेलू उपचार – 
यहां हम स्पष्ट कर दें कि ये घरेलू नुस्खे हर किसी पर असर करें संभव नहीं है, क्योंकि हर किसी की शारीरिक क्षमता व थायराइड अवस्था अलग-अलग होती है। ऐसे में कुछ नुस्खे किसी पर असर कर सकते हैं और किसी पर नहीं। इसलिए, इलाज के साथ-साथ इन घरेलू नुस्खों को इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

1. अश्वगंधा
सामग्री :
  • अश्वगंधा का कैप्सूल (500mg)
प्रयोग का तरीका :

  • रोज  अश्वगंधा का कैप्सूल खा सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?
प्रतिदिन एक या दो कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :
अश्वगंधा को एडापोजेनिक जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है। एडाप्टोजेन शरीर को तनाव से लड़ने में मदद कर सकता है। जानवरों पर हुए प्रयोग में यह पाया गया है कि अश्वगंधा थाइराइड हार्मोन को बढ़ाने में मदद कर सकता है। वहीं, एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार अश्वगंधा हाइपो थायराइड के मरीजों के इलाज में मददगार साबित हो सकता है । साथ ही इसका असर व्यक्ति के थाइराइड की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसलिए, डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए।

2. केल्प
सामग्री :
  • केल्प सप्लीमेंट, जिसमें 150-175 माइक्रोग्राम आयोडीन हो।
प्रयोग का तरीका :

  • केल्प के इस सप्लीमेंट का सेवन करें।
कितनी बार करें प्रयोग?
  • कुछ हफ्तों या महीनों तक प्रतिदिन एक बार इसका सेवन कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :
केल्प एक प्रकार की समुद्री खरपतवार होती है, जो समुद्र की गहराई में पाई जाती है। इसे आयोडीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है । अगर किसी को आयोडीन की कमी से होने वाली थाइराइड की समस्या है, तो केल्प इस पर प्रभावी साबित हो सकता है । फिलहाल, इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है।

3. रोजमेरी एसेंशियल आयल
सामग्री :
  • रोजमेरी तेल की तीन-चार बूंदें
  • एक चम्मच नारियल तेल
प्रयोग का तरीका :
  • रोजमेरी तेल को नारियल तेल में मिक्स कर दें।
  • अब इस तेल को थायराइड के एक्यूप्रेशर पॉइंट पर लगाएं। ये पॉइंट गले, टांग के निचले हिस्से और पैर के नीचे होते हैं। इस बारे में ऑनलाइन या डॉक्टर से जानकारी मिल सकते हैं।
  • इन पॉइंट्स पर करीब दो मिनट तक मालिश करें।
  • रोजमेरी तेल की कुछ बूंदें नहाने वाले पानी में डालकर 15 से 20 मिनट तक उसमें बैठ भी सकते हैं।
  • अगर थायराइड के कारण सिर के बाल उड़ रहे हैं, तो रोजमेरी तेल से सिर की मालिश भी कर सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?
  • जल्द आराम पाने के लिए प्रतिदिन उपयोग कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :
रोजमेरी तेल में रोजमेरिक एसिड होता है, जो हायपरथायरॉडिज्म के लिए लाभकारी हो सकता है। यह थाइराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन  पर असर कर थाइराइड की परेशानी में असर कर सकता है। इसका प्रभाव कुछ हद तक मरीज की स्थिति पर भी निर्भर करता है कि उसे किस तरह की समस्याएं हो रही हैं । थाइराइड की दवा के साथ अगर रोजमेरी का उपयोग किया जाए, तो थाइराइड में होने वाली परेशानियों से थोड़ा-बहुत आराम मिल सकता है।

4. गुग्गुल
सामग्री :

  • गुग्गुल का 25mg सप्लीमेंट
प्रयोग का तरीका :

  • प्रतिदिन 25mg सप्लीमेंट का सेवन कर सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?
वैसे तो प्रतिदिन एक से दो बार इसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन बेहतर होगा कि पहले डॉक्टर से जरूर पूछा जाए।
किस प्रकार है फायदेमंद :
गुग्गुल को गुग्गुल के पेड़ से प्राप्त किया जाता है। गुग्गुल में गुग्गुलुस्टेरोन पाया जाता है, जिसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी व कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले गुण के साथ-साथ थायराइड को सामान्य रूप से काम करने में मदद करने की क्षमता होते हैं । यह थाइराइड हार्मोन को सही तरीके से काम करने में मदद कर सकता है। जानवरों पर हुए शोध में पाया गया है कि गुग्गुल का उपयोग हायपोथायरॉडिज्म में सुधार कर सकता है 

5. हल्दी
हल्दी का उपयोग खाना बनाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक औषधि की तरह भी किया जा सकता है। इसका उपयोग थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार करने के तौर पर भी किया जा सकता है। इसमें मौजूद इंटीइंफ्लेमेटरी गुण के कारण यह थाइराइड की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। शोध के अनुसार, थायरॉयड ग्रंथि के कार्य और संरचना सोडियम फ्लोराइड (विषाक्त प्रभाव) के कारण प्रभावित हो सकती है। वहीं, हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण इन विषाक्त प्रभावों के खिलाफ सुरक्षात्मक तरीके से काम कर सकता है । इसके अलावा, अगर खाने में हल्दी का सेवन और साथ ही आयोडीन युक्त नमक का उपयोग किया जाए, तो गॉइटर की समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है । यहां हम स्पष्ट कर दें कि इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है। हां, अगर खाने में संतुलित मात्रा में हल्दी का सेवन किया जाए, तो इसके नुकसान न के बराबर हैं।

6. सेज की चाय
सामग्री :

  • एक कप पानी
  • दो चम्मच सेज की पत्तियां या
  • एक चम्मच सूखे सेज की पत्तियां (ऑनलाइन या बाजार में उपलब्ध)
  • शहद (वैकल्पिक)
  • नींबू का रस (वैकल्पिक)
प्रयोग का तरीका :
  • एक पैन में पानी डालकर उसे गर्म करने के लिए रखें। जब पानी उबलने लगे, तो उसे गैस से उतार लें।
  • अब इसमें ताजा या सूखे सेज की पत्तियों को डालकर पांच से दस मिनट के लिए छोड़ दें।
  • अब इस मिश्रण को छानकर एक कप में डाल लें, ताकि सेज के पत्ते अलग हो जाएं।
  • फिर इस मिश्रण में स्वाद के लिए नींबू और शहद को मिक्स करके सेवन करें।
किस प्रकार है फायदेमंद :
सेज की पत्तियां जिसे तेज पत्ता भी कहा जाता है, उसका उपयोग भी थाइराइड की समस्या में किया जा सकता है। यूरोपियन जरनल ऑफ पब्लिक हेल्थ की ओर से किए गए शोध में पाया गया कि सेज से बनी चाय का सेवन करने से थायराइड कैंसर का खतरा कम हो सकता है। वहींं, अगर किस को थायराइड कैंसर है, तो उससे उबरने में मदद मिल सकती है  सेज में भी रोजमेरी की तरह ही रोजमैरिनिक एसिड  होता है, जो थाइराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन पर असर कर सकता है। सेज की चाय के साथ-साथ उसकी सब्जी बनाकर भी सेवन किया जा सकता है 

7. लहसुन
सामग्री :

  • लहसुन की एक या दो कलियां
प्रयोग का तरीका :

  • रोज सुबह लहसुन की एक या दो कलियों का सेवन किया जा सकता है।
  • अगर लहसुन खाने का मन नहीं करता है, तो लहसुन को सब्जी में उपयोग करके खा सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :
स्वास्थ्य के लिए लहसुन के कई फायदे हैं और थाइराइड भी उन्हीं में से एक है। चूहों पर हुए एक शोध के अनुसार, थायराइड में वृद्धि के खिलाफ लहसुन का सुरक्षात्मक प्रभाव देखा गया है। लहसुन में एलिसिन व फ्लेवोनाइड जैसे कई कंपाउंड पाए जाते हैं, जो थायराइड पर अपना असर दिखा सकते हैं । ऐसे में थाइराइड की दवा के साथ-साथ डॉक्टर के निर्देशानुसार लहसुन का सेवन भी किया जा सकता है।

8. अदरक
सामग्री :
  • थोड़ा-सा अदरक
  • एक कप पानी
  • थोड़ा-सा शहद
प्रयोग का तरीका :
  • सबसे पहले अदरक को बारीक टुकड़ों में काट लें।
  • इसके बाद पानी को गर्म करें और अदरक के टुकड़े उसमें डाल दें।
  • अब पानी को हल्का गर्म होने के लिए रख दें। फिर उसमें शहद डालकर मिक्स करें और चाय की तरह पिएं।
  • इसके अलावा, खाना बनाने में भी अदरक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अदरक को ऐसे ही साबुत चबाकर भी खाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :
अदरक थायराइड के सही तरह से काम करने के लिए एक महत्वपूर्ण घरेलू उपाय हो सकता है। अदरक में जिंक, पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है। साथ ही इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो इसे अच्छा घरेलू उपचार बनाते हैं। थायराइड के इलाज के लिए अदरक का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ डॉक्टर द्वारा बताए गई दवा का सेवन करना भी जरूरी है।

9. अलसी
सामग्री :
  • एक चम्मच अलसी का पाउडर
  • एक गिलास फलों का रस
प्रयोग का तरीका :
  • अलसी के पाउडर को पानी या फिर फलों के रस में डालें।
  • अब इसे अच्छी तरह मिक्स करें और पिएं।
कितनी बार करें प्रयोग?
  • इस मिश्रण को प्रतिदिन एक से दो बार पिया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :
थाइराइड ग्लैंड के सही तरीके से काम करने के लिए अलसी भी महत्वपूर्ण घरेलू उपाय हो सकता है। इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है और जो हायपोथायरॉडिज्म के जोखिम से बचाव चाहते हैं, वो इसका सेवन कर सकते हैं । अगर किसी को हायपोथायरॉडिज्म है, तो वो डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलसी का सेवन कर सकते हैं। वहीं, एक अन्य मेडिकल रिसर्च के अनुसार अलसी का ज्यादा या लंबे वक्त तक उपयोग गॉइटर या आयोडीन कमी के कारण होने वाली समस्या का कारण भी हो सकता है । इसलिए, इसका सेवन डॉक्टर या विशेषज्ञ की देखरेख में करें।

10. कलौंजी
थायराइड रोग का उपचार करने के लिए कलौंजी का उपयोग भी किया जा सकता है। शोध के अनुसार, कलौंजी के पाउडर का सेवन करने से हाशिमोटो के थायराइडिटिस के रोगियों में कुछ सुधार पाया गया । इस प्रकार थाइराइड की समस्या के जोखिम से बचाव के लिए कलौंजी का सेवन किया जा सकता है, लेकिन इस बारे में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य और उम्र के अनुसार इसका कितना सेवन करना है, उसका पता चल सके।

11. तुलसी
सामग्री :
  • एक छोटा सॉसपैन
  • आठ से दस तुलसी के पत्ते
  • जरूरत के अनुसार पानी
  • एक चम्मच नींबू का रस (वैकल्पिक)
  • आधा चम्मच बारीक कटा अदरक (वैकल्पिक)
  • एक या दो इलायची
  • मिठास के लिए शहद या चीनी
प्रयोग का तरीका :
  • एक सॉस पैन में पानी को उबाल लें।
  • फिर इसमें तुलसी के पत्ते, अदरक और इलायची को डालकर लगभग 10 मिनट तक उबलने दें।
  • अब चाय को छानकर इसमें शहद या चीनी और नींबू के रस को डालकर गर्मा-गर्म पिएं।
  • अगर किसी को तुलसी की चाय नहीं पसंद, तो सिर्फ तुलसी के पत्तों का भी सेवन किया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :
तुलसी को कई वर्षों से आयुर्वेदिक औषधि की तरह उपयोग किया जा रहा है। अगर बात करें थाइराइड की, तो इसमें एंटी-थायराइड गुण मौजूद होते हैं और इसी आधार पर थायराइड के इलाज के लिए तुलसी का सेवन करने का सुझाव दिया जा सकता है । यहां हम स्पष्ट कर दें कि इससे संबंधित कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए, बेहतर होगा कि यह घरेलू उपचार इस्तेमाल करने से पहले इस बारे में एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

12. वर्जिन नारियल तेल
सामग्री :
  • एक से दो चम्मच वर्जिन नारियल तेल
  • एक गर्म पानी
प्रयोग का तरीका :
  • रोज एक गिलास पानी में वर्जिन नारियल तेल मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
  • अगर ऐसे नहीं पसंद, तो नारियल के तेल का उपयोग खाना बनाने के लिए कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :
थायराइड रोग का उपचार करने के लिए नारियल तेल अच्छा उपाय साबित हो सकता है। यह थायरायड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने में मदद कर सकता है । अगर कोई मरीज थाइराइड की दवा ले रहा है, तो बेहतर होगा वर्जिन नारियल तेल लेने से पहले डॉक्टर से इस बारे में एक बार सलाह जरूर लें।

थायराइड चार्ट –
थायराइड का पता लगाने के लिए थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) के स्तर की जांच की जाती है। सामान्य टीएसएच (TSH) के स्तर के बारे में हम नीचे जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं 
सामान्य टीएसएच (TSH) 0.45 से – 5.0 mIU/L (मिली-इंटरनैशनल यूनिट पर लीटर) होता है।
अगर टीएसएच का यह स्तर सामान्य से ज्यादा हो, तो इसका मतलब यह है कि हार्मोंस का निर्माण कम हो रहा है। इसे हाइपोथायरॉइडज्म कहा जाता है।
वहीं, अगर टीएसएच सामान्य से कम हो, तो इसका मतलब यह है कि हार्मोंस का निर्माण ज्यादा हो रहा है। इसे हाइपरथायरॉइडज्म कहा जाता है।

थायराइड में क्या खाएं, क्या न खाएं – 
थायराइड की समस्या में अगर सुधार करना है, तो थायराइड का उपचार करने के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय और डाइट में सुधार की जरूरत है। नीचे हम थाइराइड में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इस बारे में जानकारी दे रहे हैं ।
क्या खाएं :
  • पोषक तत्व युक्त खाद्य पदार्थ जैसे – हरी सब्जियां, फल या फलों के जूस व नट्स का सेवन किया जा सकता है।
  • मछली और बीन्स के जरिए प्रोटीन का सेवन करें।
  • खाना बनाने के लिए ऑलिव आयल यानी जैतून का तेल व वर्जिन नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • खाने में डाइटरी फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं, क्योंकि यह पाचन क्रिया में मदद कर सकता है।
  • ऐसे फैट का चुनाव करें, जो एलडीएल (LDL) यानी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम कर सके। इसके लिए बीज, नट्स व फलियों का चुनाव कर सकते हैं।
क्या न खाएं :
  • कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें या कम से कम सेवन करें। ये ह्रदय संबंधी समस्याओं और कैंसर का कारण हो सकते हैं।
  • सैचुरेटेड फैट जो मीट और चीज़ प्रोडक्ट से मिलता है, उसका सेवन न करें।
  • सॉफ्ट ड्रिंक या ऐसे ही अन्य पेय पदार्थों का सेवन न करें।
  • दूध का सेवन न करें या कम से कम करें। ऐसा इसलिए, क्योंकि कुछ लोगों को लैक्टोज इनटॉलेरेंस की समस्या होती है। थायराइड की अवस्था में दूध का सेवन करने से टीएसएच का स्तर प्रभावित हो सकता है ।
  • जंक फूड जैसे – चिप्स, कैंडी, बर्गर व पिज्जा आदि खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
थायराइड से बचाव – 
थायराइड में परहेज करना भी जरूरी है। इसलिए, नीचे दिए गए कुछ टिप्स को फॉलो करके कुछ हद तक थायराइड से बच सकता है।

  • आयोडीन युक्त नमक का सेवन करें।
  • स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से योग व व्यायाम करें। इसके लिए भुजंगासन, हलासन, विपरीत-करणी, मत्स्यासन व धनुरासन आदि किए जा सकते हैं। बेहतर होगा कि ये योगासन प्रशिक्षित योग ट्रेनर की देखरेख में ही किए जाएं।
  • नियमित रूप से वजन चेक कराते रहें।
  • धूम्रपान, शराब व कैफीन से दूर रहें।
  • ज्यादा तली-भुनी, जंक फूड और मिर्च-मसाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • जैसा कि ऊपर जानकारी दी गई है कि गर्भवती महिलाओं को भी थाइराइड का जोखिम हो सकता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान और बाद में भी थायराइड जरूर चेक करवाएं ।
  • हर 5 साल में थायराइड की जांच करवाते रहें। खासकर, 30 साल के बाद तो यह और जरूरी हो जाता है। हमने लेख में ऊपर यह भी बताया है कि 30 साल से ऊपर के व्यक्ति को थाइराइड का खतरा हो सकता है।
यह बात तो स्पष्ट है कि अगर शुरू से नियमित दिनचर्या और संतुलित खानपान का पालन किया जाए, तो थायराइड क्या, कोई भी बीमारी तंग नहीं कर सकती। ‘थायराइड क्यों होता है’, ‘थायराइड ग्रंथि किसे कहते हैं’ और ऐसी ही अन्य थाइराइड की जानकारी आपको इस लेख में मिल गई होगी। साथ ही ध्यान रहे कि थायराइड का उपचार और थायराइड की दवाई का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें। वहीं, बात करें लेखे में बताए गए घरेलू उपायों की, तो ये थाइराइड के दौरान होने वाली समस्याओं से राहत दिलाने और थायराइड की दवाई के असर को बढ़ाने का काम कर सकते हैं।

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