बच्चों के पेट फूलने की समस्या बहुत आम होती है। वास्तव में यह समस्या दूध पीने, पेट में कब्ज बनने सहित विभिन्न कारणों से होती है। बच्चों का पेट फूलने पर वे कई दिनों तक लगातार रोते हैं और कई बार उनकी परेशानी न समझ में आने पर जबरदस्ती कुछ खिलाने या दूध पिलाने के कारण बच्चों को उल्टी भी होने लगती है और उन्हें तेज बुखार भी हो जाता है। इस लेख में हम आपको छोटे बच्चों के पेट फूलने के कारण, लक्षण और घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।
छोटे बच्चों का पेट फूलने का कारण –
आमतौर पर छोटे बच्चों के पेट फूलने के कई कारण होते हैं। आइये इनमें से कुछ मुख्य कारणों के बारे में जानते हैं।
शिशु के पेट फूलने का कारण हो सकता है कोलिक
कोलिक या उदरशूल एक ऐसी समस्या है जो आमतौर पर तीन सप्ताह के नवजात शिशु को होता है। जिसके कारण उसका पेट फूल जाता है और वह तीन घंटे से अधिक समय तक लगातार रोता है। जन्म के बाद लगभग तीन महीनों तक नवजात शिशु को कोलिक होता है जो कि पेट की सेंसिटिविटी से जुड़ा होता है और पेट की मांसपेशियों को कठोर कर देता है। इसके अलावा मिट्टी खाने के कारण भी बच्चे का पेट फूलता है।
नवजात शिशु के पेट फूलने का कारण लैक्टोज की अधिकता
जब बच्चा अपने शरीर में लैक्टोज को सहन नहीं कर पाता है तो उसका पेट फूलने लगता है। लैक्टेज नामक एंजाइम लैक्टोज को सही तरीके से तोड़कर पचाने का काम करता है लेकिन जब शरीर में लैक्टेज की कमी हो जाती है तो लैक्टोज पच नहीं पाता है और बच्चे का पेट सूज जाता है और पेट में ऐंठन भी होने लगती है।
छोटे बच्चों का पेट फूलने का कारण पेट में संक्रमण (गैस्ट्रोइंटेरिटिस)
डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों के पेट में संक्रमण होने के कारण भी पेट फूलता है और साथ में बच्चे को बुखार, डायरिया, उल्टी सहित अन्य समस्याएं भी जकड़ लेती हैं। इसे गैस्ट्रोइंटेरिटिस कहा जाता है। पेट में संक्रमण वायरस के कारण होता है जो 48 घंटों या एक हफ्ते में पेट में घर बना लेते हैं और बच्चा लंबे समय तक पेट फूलने की समस्या से पीड़ित रहता है।
नवजात शिशु का पेट फूलना कब्ज के कारण
बच्चों का पेट फूलने का एक बड़ा कारण कब्ज भी होता है। मां का दूध पीने की बजाय बॉटल का दूध पीना और शरीर में पानी की कमी के कारण नवजात शिशु को कब्ज होता है और पेट टाइट हो जाता है। इसके अलावा यदि मां कठोर भोजन करती है या मां को भोजन सही तरीके से न पच रहा हो तो भी बच्चे को पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
छोटे बच्चों का पेट फूलना सिलिएक रोग के कारण
माना जाता है कि सिलिएक रोग के कारण भी बच्चों का पेट फूलता है। यह रोग ब्रेड, पास्ता और मैगी जैसे खाद्य पदार्थ खाने से होता है। बच्चे का शरीर इसमें पाए जाने वाले ग्लूटेन को पचा नहीं पाता है जिसके कारण उसे पेट फूलने सहित अन्य पेट की बीमारियां हो जाती हैं।
बच्चे का पेट फूलने का लक्षण –
- पेट फूलने पर बच्चा कई दिनों तक मल नहीं कर पाता है या मल करने में उसे बहुत तकलीफ होती है।
- बच्चे का पेट फूलने पर बच्चा सही तरीके से दूध नहीं पीता है।
- अगर बच्चा सामान्य दिनों से अधिक रो रहा हो और पेट पर हाथ रख रहा हो तो यह पेट फूलने का संकेत हो सकता है।
- बच्चा दूध उगल दे रहा हो, उसे दूध पच नहीं रहा हो तो यह पेट फूलने का लक्षण हो सकता है।
- बच्चे को लंबे समय तक हिचकी और डकार आ रहा हो तो यह बच्चे का पेट फूलने का लक्षण है।
बच्चे का पेट फूलने का घरेलू उपचार –
पेट से जुड़ी अधिकांश बीमारियां घरेलू उपायों से ही ठीक हो जाती हैं इसलिए बच्चे का पेट फूलने पर आपको निम्न तरीके से घरेलू उपचार करना चाहिए।
बच्चों का पेट फूलने का घरेलू इलाज दही –
चूंकि बच्चे के पेट में संक्रमण होने के कारण भी उसका पेट फूलता है इसलिए इस समस्या के लिए के लिए दही को काफी फायदेमंद माना जाता है। वास्तव में दही में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पेट को शांत रखते हैं और पेट फूलने के लक्षणों को कम करते हैं। इसलिए यदि बच्चे का पेट फूले तो उसे दही चटाना चाहिए।
बच्चे का पेट फूलने का घरेलू इलाज अन्नानास –
बच्चों में पेट संबंधी सभी समस्याओं के लिए अन्नानाश काफी फायदेमंद होता है। इसका कारण यह है कि इसमें शक्तिशाली एसिड पाया जाता है जो गैस को बेअसर करता है और आंत प्रणाली को रेगुलेट करता है जिससे पेट फूलने से छुटकारा मिल जाता है।
बच्चे का पेट फूलने पर दें चीनी और नमक का घोल –
शरीर में पानी की कमी की भरपायी करने और पेट फूलने की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए बच्चे को चीनी और नमक का घोल पिलाना चाहिए। यह घोल पेट में मल सूखने नहीं देता है जिसके कारण बच्चे का पेट नहीं फूलता। इसके अलावा चीनी और नमक का घोल बच्चे को तुरंत एनर्जी भी प्रदान करता है तथा पेट के संक्रमण से बचाता है।
बच्चे का पेट फूले तो गुनगुने पानी से नहलाएं –
अगर बच्चे को पेट फूलने की समस्या हो तो उसे गुनगुने पानी से स्नान कराना चाहिए। माना जाता है कि गुनगुना पानी आंत प्रणाली को सक्रिय करता है जिससे पेट की गैस बाहर निकलती है और बच्चे का पेट धीरे धीरे सामान्य हो जाता है और उसके शरीर को भी आराम मिलता है और बच्चे का रोना बंद हो जाता है।
बच्चे का पेट फूलने पर मसाज करें –
माना जाता है कि बच्चे की पीठ और पेट पर मसाज करने से उसका पेट नहीं फूलता है। वास्तव में नवजात शिशुओं को लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता है जिसके कारण शरीर अकड़ जाता है और पेट भी फूलने लगता है। सही तरीके से और सही ऑयल से खूब मसाज करने पर शरीर की अकड़न खत्म होती है और पेट की गैस भी बाहर निकल आती है जिससे बच्चे का पेट शांत हो जाता है।
बच्चे का पेट फूलने का इलाज सेब का सिरका –
अगर पेट फूलने के कारण बच्चा बेचैन हो और रो रहा हो तो एक चम्मच सेब के सिरके में एक चम्मच शहद मिलाएं और गुनगुने पानी में मिलाकर बच्चे को चटाएं। अगर बच्चा बड़ा है तो उसे पानी पिलाएं। पेट फूलने की समस्या खत्म हो जाएगी।
बच्चे का पेट फूलने पर फल खिलाएं –
अगर बच्चा दूध पीने के अलावा कुछ ठोस या द्रव भी खाता हो तो पेट फूलने पर उसे सेब, चीकू, नाशपाती, केला जैसे फलों का जूस बनाकर या इन्हें मसलकर खिलाएं। इन फलों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और अपच नहीं होने देता जिससे पेट नहीं फूलता है।
बच्चे का पेट फूलने पर दें जीरे का पानी –
जीरे को पानी में उबालकर ठंडा करें और छान लें। इस पानी को बच्चे को चम्मच से पिलाएं। पेट फूलने की समस्या खत्म हो जाएगी। जीरे में कुछ ऐसे तत्व पाये जाते हैं जो अग्न्याशय में एंजाइम को स्रावित करते हैं जिसके कारण बच्चे का पाचन बेहतर होता है और पेट नहीं फूलता है।

